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'अगर आपको 2 साल में एक मैच खेलने को मिलता है, तो यह काम नहीं करेगा'

ऋद्धिमान साहा (Wriddhiman Saha) ने भारत (India) के लिए टेस्ट क्रिकेट में विकेट के पीछे अच्छा कार्य किया है। काफी सालों तक टेस्ट टीम का हिस्सा रहने के बाद अब ऋषभ पन्त के आने से साहा को टीम में शामिल करने में मुश्किल आई है। हालांकि साहा को इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है लेकिन अंतिम ग्यारह में उनकी जगह शायद ही बने। अपने क्रिकेटिंग सफर को लेकर साहा ने प्रतिक्रिया दी है।

क्रिकट्रेकर से बातचीत में साहा ने कहा कि माही भाई के संन्यास के बाद मुझे टीम में नियमित मौके मिले थे। उन्होंने कहा कि जब माही भाई टीम में थे तो सबको पता था कि माही भाई हर मैच खेलने वाले हैं। मैं हर मौके को लपकने के लिए तैयार था। मेरे डेब्यू के दौरान ऐसा हुआ था, मुझे कहा गया कि मैं नहीं खेल रहा हूँ लेकिन अचानक मुझे खेलना पड़ा। इसके बाद मैंने ऐसे तैयारी की जैसे मैं हर मैच खेलने वाला हूँ लेकिन मैं जानता था कि हर मैच में मौका नहीं मिलेगा।

ऋद्धिमान साहा का पूरा बयान

साहा ने कहा कि जब माही भाई ने 2014 में संन्यास लिया, तब मुझे नियमित तौर पर खेलने का मौका मिला। इससे पहले मैं किसी की चोट पर कवर के तौर पर ही खेलता था। उस समय माही भाई को कभी चोट लगती, तभी मुझे खेलने का मौका मिलता था।

भारतीय विकेटकीपर ने कहा कि मैं 2014 के बाद से नियमित रूप से भारत के लिए खेला। मैंने 2018 तक लगातार खेला, अर्धशतक और शतक बनाए और अच्छा स्कोर किया। अगर आपको दो साल में एक बार गेम मिलता है, तो यह काम नहीं करेगा। लेकिन यह सब टीम प्रबंधन को तय करना है।

गौरतलब है कि ऋषभ पन्त के आने के बाद ऋद्धिमान साहा को ज्यादा मौके नहीं मिले हैं। पन्त की धुआंधार बल्लेबाजी साहा पर भारी पड़ती है।

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Edited by Naveen Sharma
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