अपने ओलंपियन को जानें: साइना नेहवाल के बारे में 10 बातें (बैडमिंटन)

साल 2015 में विश्व स्तर पर साइना नेहवाल ने कमाल का प्रदर्शन किया। ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचनेवाली वें पहली महिला बनी, इसके अलावा पहली महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनी जिन्हें रैंक 1 का स्थान मिला। इसके साथ ही वें वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय बनी। हिसार में जन्मी इस एथेलीट के नाम 9 ख़िताब है और ये रिकॉर्ड वें अपर्णा पोपट के साथ साझा करती हैं। इसके बाद उन्हें प्रीमियर बैडमिंटन लीग में लखनऊ के अवध वारियर्स के ओर से खेलते देखने मिलेगा। ये रही साइना नेहवाल से जुडी 10 बातें: #1 साइना नेहवाल का जन्म 17 मार्च 1990 को हरयाणा के हिसार में डॉ हरवीर सिंह और ऊषा रानी के घर हुआ। उनके पिता हैदराबाद में राजेंद्रनगर के ICAR, के प्रिंसिपल वैज्ञानिक है और वहां के डायरेक्टरेट ऑफ़ ओइलसीड्स रिसर्च हैं। उनकी एक बहन भी जिसका नाम अबू चंद्रांशु नेहवाल है। #2 साइना ने बैटमिंटन खेलना छह साल की उम्र में शुरू किया और इसके पीछे का श्रेय वें अपने माता पिता के प्रोत्साहन को देती हैं। हर सुबह प्रैक्टिस के लिए वें और उनके पिता 25 किलोमीटर दूर जाया करते थे। #3 साल 2006 में वें पहली बार चर्चा में आई जब 16 साल की उम्र में उन्होंने राष्ट्रीय अंडर-19 चैंपियनशिप जीती। इसके अलावा इतिहास रचते हुए एक बार नहीं बल्कि दो बार एशियाई सॅटॅलाइट चैंपियनशिप जीती। उसी साल वांग यिहान के हातों वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप के फाइनल में हारते हुए वें दूसरी स्थान पर रहीं। #4 इसके साथ ही 2008 के बीजिंग ओलंपिक्स खेलों के क्वार्टर फाइनल में पहुंचनेवाले वें पहली बैडमिंटन खिलाड़ी बनी। उसके बाद वें चाइनीज़ टाईपे ओपन के फाइनल में लीडिया चेह ली या को हराकर ख़िताब जीता। उसी साल वर्ल्ड सुपर सीरीज के फाइनल में वें पहुंची और उन्हें "मोस्ट प्रॉमिसिंग प्लेयर ऑफ़ द ईयर" घोषित किया गया। #5 साल 2009 उनके लिए और खास था, क्योंकि उस साल वें सुपरसीरीज ख़िताब जीतनेवाली पहली भारतीय बनी। इंडोनेशिया ओपन के फाइनल में उन्होंने चीन के वांग लीं के हातों तीन गेम जीते। उसी साल हैदराबाद में हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वार्टरफाइनल में वें पहुंची। साल 2009-10 के लिए उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार दिया गया। #6 साल 2010 उनके लिए और ज्यादा अच्छा रहा, वें ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप के क्वार्टरफाइनल तक पहुंची और फिर महिलाओं के टीम की अगुवाई करते हुए उन्होंने उबर कप जीता। लेकिन साल की सबसे अच्छी बात रही दिल्ली का कामनवेल्थ खेल जिसमें मलेशिया के वोंग मियाउ छु को हारते हुए स्वर्ण पदक जीता। जीत के बात उन्होंने कहा "जब मैं मैच पॉइंट से पिछड़ रही थी, तब मुझे झटका लगा। ये बड़ा मुकाबला था और इसमें मुझे जीतना ही था। सालों बाद जो लोग वहां मौजूद थे वें बताएँगे की साइना ने गोल्ड कैसे जीता। इसपर मुझे गर्व है।" #7 इसके दो साल बाद लंदन ओलंपिक्स में पदक पाने वाली पहली भारतीय बनी। उन्हें कांस्य पदक मिला जब चीन की वांग सिन ने चोट के चलते मैच बीच में छोड़ दिया। उस समय स्कोर 18-21, 0-1 था। "मुझे भी भी यकीन नहीं हो रहा की मैंने पदक हासिल कर लिया है। बैडमिंटन का खेल कठिन होता है और इसमें मुझे पदक की उम्मीद नहीं थी। ये बिल्कुल सपना सच होने जैसा है।" मैच के बाद नेहवाल ने कहा। #8 साइना नेहवाल ने अपने हे देश की पी वी सिंधु को हारते हुए दूसरा इंडियन ओपन खिताब जीता। साल के अंत में उन्होंने चाइना यूएन सुपरसीरीज जीती। ऐसा करनेवाली वें पहली भारतीय हैं। #9 लेकिन इतिहास के पन्नो में बैडमिंटन का नाम साल 2015 के लिए जाना जाएगा। उस साल साइना नेहवाल ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप और बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंची। इसके अलावा अप्रैल में वें नंबर 1 स्थान पर पहुंची। ऐसे करनेवाली वें पहली भारतीय बैटमिंटन खिलाडी बनी। "जब मैंने ये खेल खेलना शुरू किया, तब मुझे उम्मीद नहीं थी कि मैं नंबर 1 खिलाडी बनूँगी। ये मेरी माँ का सपना था, वें मुझसे कहा करती थी "साइना तुम्हे मेरे लिए ओलिंपिक मैडल लाना है।" और आज मैं सोचती हूँ, मैं नंबर 1 बन गयी, मुझे विश्वास नहीं होता।" #10 साल 2015 का अंत अच्छा नहीं रहा, क्योंकि वें दुबई सुपरसीरीज के सेमीफाइनल में नहीं पहुँच पाई, लेकिन उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई। दूसरे ग्रुप मैच में उन्होंने कैरोलिना मरीन को हराया। कराटे की ब्लैक बेल्ट और शाहरुख़ खान की बड़ी प्रसंशक 1 कोर्ट के बाहर साइना शाहरुख़ की बड़ी प्रसंशक हैं और इस साल उन्हें उनसे मिलने का मौका मिला। 2 व्यस्त शेड्यूल के बावजूद वें शुक्रवार को हॉलीवुड या बॉलीवुड की कोई फिल्म देखने का समय निकाल लेती है, इससे कुछ समय के लिए वें अपना ध्यान कहीं और केंद्रित कर पाती हैं। 3 कराटे में उनके नाम ब्लैक बेल्ट है। 4 लन्दन ओलंपिक्स में कांस्य पदक जीतने के बाद उन्हें क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने BMW 3 सीरीज कर गिफ्ट दी, लेकिन हैदराबाद से बेंगलुरु शिफ्ट होने के बाद वें उसे चला नहीं पाती। उनके पास वर्ल्ड रैंकिंग नंबर 2 है और ये जल्द गिरने नहीं वाला। सबसे मुश्किल चुनौती: भारत की पी वी सिंधु, चाइना के खिलाड़ी हमेशा से इस खेल में मजबूत रहे हैं, लेकिन यहाँ पर पदक के लिए साइना को कई दीवारों से होकर गुजरना होगा। लेखक: शंकर नारायण, अनुवादक: सूर्यकांत त्रिपाठी

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