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5 भारतीय खिलाड़ी जिनकी बायोपिक बनना चाहिए

CONTRIBUTOR
Modified 14 Jan 2017

बी-टाउन में कई प्रकार की बायोपिक बनने लगी है। और अगर आपको बॉलीवुड और खेलों से प्यार है, तो खिलाड़ियों की बायोपिक सबसे बेहतर चीज बनकर निकली है। 2016 को स्पोर्ट्स बायोपिक्स का वर्ष बोला जा सकता है, क्योंकि इस दौरान बड़ी स्क्रीन पर खिलाड़ियों की कई प्रेरणादायक कहानियां निकलकर सामने आई। भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की संघर्षपूर्ण कहानी हो या फिर समाज के विपरीत जाकर गीता फोगाट के स्वर्ण पदक जीतने की कहानी। इन बायोपिक को देश ने काफी सराहना दी। मैरीकॉम की कहानी भी काफी प्रेरणादायक रही। भारतीय खेलों पर शानदार फिल्म बनी, लेकिन ऐसे कई एथलीट हैं, जिन्होंने उपलब्धि हासिल करके देश का सम्मान बढ़ाया और संघर्षों से पार भी पाया। हालांकि यह मुमकिन नहीं कि भारत को गौरवान्वित करने वाले प्रत्येक एथलीट पर बायोपिक बने, लेकिन कुछ ऐसे दिग्गज एथलीट जरुर हैं जिनकी कहानी काफी प्रेरणादायक है और उनकी उपलब्धि बड़ी स्क्रीन पर दिखाई जा सकती है।


#1 विश्वनाथन आनंद

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आनंद शतरंज के महान खिलाड़ी हैं, जिन्होंने ज्यादा चर्चाएं तो नहीं बंटोरी, लेकिन देश को काफी सम्मान दिलाया है। मध्य वर्गीय परिवार में जन्मे आनंद के पिता दक्षिण रेलवेज में महाप्रबंधक थे और उनकी मां गृहणी थी। आनंद जब 6 वर्ष के थे तब उनकी मां ने ही उन्हें शतरंज खेलना सिखाया। आनंद को अपने ज़माने के सर्वश्रेष्ठ रैपिड शतरंज खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। वह 2007-2013 तक शतरंज के बादशाह रहे। उन्होंने 2000, 2007, 2008, 2010 और 2012 में कुल मिलाकर 5 बार विश्व शतरंज चैंपियनशिप जीती। आनंद ने 6 बार शतरंज ऑस्कर जीता और वह उन 6 खिलाड़ियों में से एक हैं, जिन्होंने फिडे की रेटिंग सूची में 2800 का आंकड़ा पार किया। आनंद के नाम कई अंतर्राष्ट्रीय पदक भी दर्ज हैं और उनके ध्यान के आधार पर एक शानदार फिल्म बन सकती हैं। कई अवॉर्ड्स के साथ ही ध्यान देने वाली बात यह है कि आनंद ने पद्म विभूषण, पद्म भूषण, राजीव गाँधी खेल रत्न, पद्म श्री और अर्जुन अवॉर्ड जीता।
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Published 14 Jan 2017
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