COOKIE CONSENT
Create
Notifications
Favorites Edit

Asian Games 2018 : गोल्डन पंच लगाने को तैयार भारतीय मुक्केबाज

49   //    16 Aug 2018, 03:34 IST

इंडोनेशिया में होने वाले एशियाई खेलों का काउंट डाउन अपने अंतिम चरण में पहुंचा चुका है। खिलाड़ियों ने भी कमर कस ली है। उनका एकमात्र मकसद पिछले खेलों से बेहतर प्रदर्शन कर पदकों की संख्या बढ़ाना है। इंचियोन एशियाई खेलों में भारत ने 11 स्वर्ण, 10 रजत और 36 कांस्य पदक के साथ कुल 57 पदक अपनी झोली में डाले थे। इसमें सबसे ज्यादा पदक एथलेटिक्स में आए थे। मुक्केबाजी में भारत आठवें नंबर पर रहा था। इस प्रतियोगिता के लिए भारत ने कुल 13 खिलाड़ियों को दल में शामिल किया था। इनके सहारे उसने इस स्पर्धा में एक स्वर्ण और चार कांस्य पदक जीते थे। जकार्ता में हो रहे 2018 एशियाई खेलों में भारत के सिर्फ 10 मुक्केबाज ही भाग ले रहे हैं। ऐसे में भारतीय मुक्केबाज कैसा प्रदर्शन करते हैं  और कितने पदक हासिल करते हैं वो तो 18 अगस्त के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल अनुभवी मैरी कॉम के बिना उतर रही भारतीय टीम के मुक्केबाजों पर एक नजर...

अनुभवी मनोज करेंगे अगुआई

इस एशियाई खेलों में सात पुरुष जबकि तीन महिला मुक्केबाज रिंग में चुनौती पेश करेेंगे। पिछली बार की स्वर्ण पदक विजेता मैरी कॉम इस बार इंडोनेशिया नहीं गई हैं। साथ ही भारतीय टीम को कांस्य पदक विजेता सरिता देवी, पिंकी रानी और सतीश कुमार के अनुभव की भी कमी खलेगी। इन दिग्गजों की गैरमौजूदगी में सारा जिम्मा मनोज कुमार के कंधों पर होगा। भारत के दस सदस्यीय दल में मनोज एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके पास दो एशियाई खेलों के अलावा दो ओलंपिक का अनुभव है। वे इस बार पदक का सूखा समाप्त करने की कोशिश में लगे हैं। उनका बेहतरीन प्रदर्शन भारतीय मुक्केबाजों को प्रेरित करेगा।

विकास से इतिहास रचने की उम्मीद

महज 18 साल की उम्र में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रचने वाले विकास कृष्ण यादव से भारत को 2010 एशियाड के प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद है। अभी विकास के पास दो ओलंपिक का अनुभव है। 2014 इंचियोन खेलों में विकास सेमी फाइनल मुकाबले में हार गए थे और उन्हें कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा था। इसके बाद 2015 में हुए एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में उन्हें रजत पदक से काम चलाना पड़ा। इसी साल विश्व एमेच्योर मुक्केबाजी चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में विकास को हार का मुंह देखना पड़ा था। रियो ओलंपिक के 75 किलो ग्राम वर्ग में भी वह अपनी लय को हासिल नहीं कर पाए और प्री क्वार्टर फाइनल में हार के साथ बाहर हो गए। हालांकि एशियाई खेलों से ठीक पहले ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ में सोना जीत कर उन्होंने उम्मीद जगा दी। हालांकि उन्हें यह बखूबी पता है कि यहां मुकाबला और कड़ा है लेकिन यहीं से 2020 ओलंपिक के लिए रास्ता भी बनेगा।

थापा से गोल्डन पंच की दरकार

25 साल के शिव थापा पिछले कुछ समय से खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं। गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ खेलों के लिए भी वह टीम में जगह बनाने में नाकाम रहे थे। हालांकि शिव की ऐसी काबिलियत है कि वे किसी भी समय उलटफेर कर सकते हैं। लगातार तीन एशियन चैंपियनशिप में पदक हासिल करने वाले शिव एकमात्र खिलाड़ी हैं। लंदन ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले शिव यहां 60 किलो ग्राम वर्ग में देश के लिए गोल्डन पंच लगाने की कोशिश में लगे हैं।

गौरव पर भी होंगी निगाहें

गोल्ड कोस्ट में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2018 के फ्लाईवेट वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले गौरव सोलंकी पर भी सभी की निगाहें टिकी हैं। 21 साल के इस मुक्केबाज को पदक का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। वहीं गोल्ड कोस्ट में 49 किलो ग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाले अमित पंघल और मोहम्मद हसमुद्दीन से भी भारत को पदक की उम्मीद है।

महिला मुक्केबाजों में है दम

महिला मुक्केबाजों की बात करें तो मैरी कॉम की गैर मौजूदगी में विश्व चैंपियनशिप की पदक विजेता सोनिया लाठेर जकार्ता में महिला मुक्केबाजी की अगुआई करेंगी। मणिपुर की सरजूबाला देवी भी किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने 2014 विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें देश का अगला मैरी कॉम भी कहा जाने लगा है। मुक्केबाजी दल में सबसे अधिक अनुभवी 31 साल की पवित्रा के पास 60 किलो ग्राम वर्ग में पदक जीतने का बेहतरीन मौका है। एशियाई खेलों में महिला मुक्केबाजी में सिर्फ तीन भार वर्ग हैं और तीनों में मुक्केबाज अपना पदार्पण करेंगी। जहां तक गोल्ड कोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ की बात है तो वहां सिर्फ मैरी कॉम ही पोडियम तक पहुंची थी। हालांकि इस आधार पर महिला मुक्केबाजों को परखना सही नहीं है। उन्हें जकार्ता में चीन, कजाखस्तान और कोरियाई मुक्केबाजों से चुनौती मिलेगी।

मैरी कॉम की कमी खलेगी

भारत को एशियाई खेलों में दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम की कमी खलेगी। वह इन खेलों में भारत के लिए पदक जीतने वाली एकमात्र महिला मक्केबाज हैं। उनके नाम एशियाई खेलों में सबसे अधिक दो पदक हैं जिसमें एक स्वर्ण और एक कांस्य शामिल हैं। मैरी कॉम ने 2010 के एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था। वहीं 2014 में उन्होंने सोने पर पंच लगाया था। 2012 लंदन ओलंपिक में मैरी कॉम ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। 35 साल के इस दिग्गज खिलाड़ी ने चोट और विश्व चैंपियनशिप में शिरकत करने के कारण इन खेलों से हटने का फैसला किया।

हवा सिंह अब तक के सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज

एशियाई खेलों में सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज की बात जब-जब होगी तो एक ही नाम सामने आएगा और वो है हवा सिंह का। हावा सिंह के नाम इन खेलों में दो स्वर्ण पदक हैं। यह कारनाम करने वाले वे पहले और आखिरी मुक्केबाज हैं। उनके बाद कोई भी भारतीय उनके इस रिकॉर्ड को तोड़ने में कामयाब नहीं हो पाया है। हवा सिंह ने पहला स्वर्ण पदक 1966 में बैंकॉक में आयोजित एशियाई खेलों में जीता था। उन्होंने इस स्वर्धा के फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान के अब्दुल रहमान को हराया था। वहीं दूसरा स्वर्ण पदक उन्होंने 1970 में बैंकॉक में ही हासिल किया। इस बार उनके सामने ईरानी मुक्केबाज की चुनौती थी। उन्होंने फाइनल में उमरान हतामी को हराकर इतिहास रच दिया।

पदम बहादुर ने भारत को दिलाया था पहला स्वर्ण पदक

भारत को मुक्केबाजी में पहला स्वर्ण पदक दिलाने का श्रेय पदम बहादुर को जाता है। उन्होंने लाइटवेट 60 किलो ग्राम वर्ग में 56 साल पहले 1962 में जकार्ता में आयोजित एशियाई खेलों में यह कारनामा किया था। तब उन्होंने फाइनल मुकाबले में जापान के मुक्केबाज कानेमारु को शिकस्त दी थी।

पुरुष और महिला टीम

पुरुष ः अमित पंघल (49 किग्रा), गौरव सोलंकी (52 किग्रा), मोहम्मद हसमुद्दीन (56 किग्रा), शिव थापा (60 किग्रा), धीरज (64 किग्रा), मनोज कुमार (69 किग्रा), विकास कृष्ण यादव (75 किग्रा)

महिला ः सरजूबाला देवी (51 किग्रा), सोनिया लाठेर (57 किग्रा), पवित्रा (60 किग्रा)

कुछ अन्य तथ्य


  • भारत ने अब तक कुल 55 पदक मुक्केबाजी स्पर्धा में जीते हैं।

  • इनमें आठ स्वर्ण, 16 रजत ौर 31 कांस्य पदक शामिल हैं।

  • एशिायई खेलों में मुक्केबाजी की शुरुआत 1954 में मनीला खेलों से हुई थी।


 

ANALYST
संदीप भूषण राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में खेल पत्रकार के तौर पर कार्यरत हैं। इससे पहले वह दैनिक जागरण में भी काम कर चुके हैं। इनके क्रिकेट और हॉकी के साथ ही कबड्डी, फुटबॉल और कुश्ती से जुडे कई लेख राष्ट्रीय अखबारों में छप चुके हैं।
Fetching more content...