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Asian Games 2018 में इतिहास रचने वाले भारत की झोली में आ सकते थे 5 और स्वर्ण पदक

Syed Hussain
ANALYST
Modified 03 Sep 2018

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में भारत ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल 69 पदक जीते। तो वहीं हमेशा की तरह 132 स्वर्ण, 92 रजत और 65 कांस्य के साथ चीन नंबर-1 पर रहा। चीन के पदकों की संख्या 289 रही, जबकि भारत इस तालिका में 8वें पायदान पर था। इससे पहले भारत की झोली में सबसे ज़्यादा 65 पदक 2010 एशियाई खेलों में आए थे। भारत ने 2018 एशियाड में 15 स्वर्ण पदक, 24 रजत और 30 कांस्य पदक अपने नाम किए। सबसे ज़्यादा स्वर्ण पदक जीतने के भी अपने रिकॉर्ड की भारत ने बराबरी कर ली। 1951 एशियन गेम्स में भी भारत को 15 स्वर्ण पदक मिले थे और इस बार भी सोने की संख्या 15 रही। हालांकि कई ऐसे इवेंट रहे जहां भारत स्वर्ण पदक के पास पहुंच कर चूक गया, अगर ये चूक न हुई होती तो स्वर्ण पदकों की संख्या 20 तक पहुंच सकती थी। एक नज़र डालते हैं भारत की उन पांच चूकों पर जो हमें 5 स्वर्ण पदक और दिला सकती थी।

#5 विकास कृषण सेमीफ़ाइनल में पहुंचकर चोट की वजह से बाहर हुए

  भारत के लिए मुक्केबाज़ी में अमित पंघल ने स्वर्ण पदक दिलाया था, साथ ही साथ भारत की सबसे बड़ी उम्मीद विकास कृषण भी बेहतरीन लय में थे। 26 वर्षीय कृषण ने 60 किग्रा लाइटवेट प्रतियोगिता में सेमीफ़ाइनल तक पहुंच चुके थे। लेकिन सेमीफ़ाइनल मुक़ाबला खेलने से पहले ही उन्हें चोट की वजह से बाहर होना पड़ा और उनकी झोली में स्वर्ण की जगह कांस्य पदक ही आया। दरअसल, चीन के मुक्केबाज़ एरबीकी तंगलातिहान के ख़िलाफ़ क्वार्टरफ़ाइनल मुक़ाबले में विकास की बाईं आंख के ऊपर चोट आ गई थी और यही उनके बाहर होने का कारण बन गई।
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Published 03 Sep 2018
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