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अपने ओलंपियन को जानें: कविता राउत के बारे में 10 बातें (लॉन्ग डिस्टेंस रेस)

Modified 11 Oct 2018, 13:32 IST
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कविता राउत एक अनुभवी और लम्बी दुरी के रेस की एक काबिल खिलाडी है। रिकॉर्ड तोड़ना, कामनवेल्थ और एशियाई खेलों में पदक हासिल करने जैसे काम ये 30 वर्षीय खिलाडी ने किये हैं। नाशिक की ये खिलाडी अब रियो ओलंपिक्स के लिए जाएँगी। इसलिए हम यहाँ पर उनके करियर पर एक नज़र डालते हैं। ये रही कविता राउत से जुडी 10 बातें:


  1. कविता का जन्म महाराष्ट्र में नाशिक के पास सवारपाड़ा गाँव में हुआ। वें अपने परिवार की मंझली बेटी है और बाकि दो भाई हैं।

  2. बचपन से ही राउत का झुकाव खेल की ओर रहा है। परिवार की आर्थिक हालात खराब होने के कारण उन्होंने दौड़ना सही खेल समझा क्योंकि इसे बिना जुटे पहने भी किया जा सकता है और इससे परिवार पर किसी तरह का बोझ नहीं बैठेगा। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "मैं एल गरीब परिवार से हूँ। मेरा एल बड़ा भाई है और एक छोटा भाई है। मुझे खेल में दिलचस्पी थी लेकिन मेरे परिवार की आर्थिक हालात ठीक नहीं थी। इसलिए मैंने दौड़ने के खेल खेलने का निर्णय किया, क्योंकि इसे नंगे पैरों से भी खेला जा सकता है।"

  3. कविता ने 2001 से दौड़ना शुरू किया और जल्द ही विजेंद्र सिंह की देखरेख में आई जिन्होंने कविता को 1000 मीटर, 3000 मीटर और 5000 मीटर दौड़ने लगाया। 16 वर्षीय इस लड़की ने ट्रेनिंग के पंद्रह दिनों बाद ही अपनी काबिलियत दिखाई और नेशनल में रजत पदक जीता। उनके कोच को लगा की वें 10000 मीटर के खेल में अच्छा करेंगी और इसलिए उन्होंने कविता को इस दौड़ में हिस्सा लेने की ट्रेनिंग दी।

  4. साल 2009 में बैंगलोर में हुए सनफीस्ट वर्ल्ड 10k में उन्होंने 10 किलोमीटर दौड़ में नेशनल रिकॉड बनाते हुए इसे 34:32 समय में पूरा किया।

  5. साल 2009 में चीन के गुआंगज़ौ में हुए 18 वें एशियाई एथेलेटिक्स चैंपियनशिप में कविता को 5000 मीटर दौड़ में पहला अंतराष्ट्रीय पदक मिला।

  6. कविता का ऐसा प्रदर्शन अगले 50 वें नेशनल ओपन एथेलेटिक्स चैंपियनशिप तक जारी रहा। यहाँ पर उन्होंने 32:41.31 का टाइम देकर प्रीती श्रीधरन के रिकॉर्ड को तोड़कर खुद का रिकॉर्ड कायम किया।

  7. 2010 में दिल्ली कामनवेल्थ खेलों में उन्होंने 10000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर सनसनी फैला दी। ये एक ऐतिहासिक पल था क्योंकि तट्रैक एंड फील्ड इवेंट में किसी धावक द्वारा हासिल किया गया ये पहला पदक था। 1958 में कार्डिफ गेम्स में दिग्गज धावक मिल्खा सिंह के बाद किसी सिंगल इवेंट में पदक हासिल करने वाली वें पहली खिलाडी थी।

  8. कविता का ऐसा प्रदर्शन का ऐसा प्रदर्शन गुआंगज़ौ के एशियाई खेलों में भी जारी रहा जहां पर उन्होंने 31:51.44 की टाइमिंग के साथ रजत पदक जीता। ये उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ स्कोर था। इसके अलावा उसी दौरान उन्होंने 5000 मीटर दौड़ में भी कांस्य पदक जीता।

  9. 2014 में इंचियोन के एशियाई खेलों में हिस्सा न ले पाने के बाद उन्होंने शानदार वापसी की और बैंगलोर के नेशनल ओपन में 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता। इसके बाद उन्होंने कोलकाता 25k, वसई-विहार हाफ मैराथन और हैदराबाद 10k के साथ साथ मुम्बई हाफ मैराथन भी जीती।

  10. हाल ही में उनकी उपलब्धि फरवरी 2016 में गुवाहाटी में हुए दक्षिण एशियाई खेलों में दिखी। वहां पर स्वर्ण जीतने के बाद इस 30 वर्षीय खिलाडी ने ओपी जैशा, ललिता बब्बर और सुधा सिंह के बाद रियो ओलंपिक्स के लिए क्वालीफाई किया है। क्वालीफाई करने के लिए 2:42:00 से अच्छी टाइमिंग देनी थी और कविता की टाइमिंग थी, 2:38:38।

कविता राउत के बारे में कुछ और बातें:

  • कविता राउत को 2012 में अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया। साल 1985 में आखरी बार किसी महाराष्ट्रियन खिलाडी को ये पुरुस्कार मिला था। 1985 में इसे पूर्व धावक और मौजूदा एथेलेटिक्स फ्रेडरेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष आदिले सुमारिवाला ने जीता था।

  • एथेलेटिक्स के बारे में ज्यादा कुछ न जानते हुए भी कविता के घरवालों ने उनका समर्थन किया। कविता ने कहा, "मेरा परिवार छोटे से गांव से हैं। उन्हें एथेलेटिक्स के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन फिर भी उन्होंने मुझे इस खेल में आगे बढ़ने दिया।"

  • इस खेल को ज्यादा से ज्यादा बढ़वा मिले इसलिए उन्होंने अपने शहर नाशिक में साल 2011 में एक अकादमी खोली। इस अकादमी का नाम "एकलव्य एथेलेटिक्स और स्पोर्ट्स इंस्टिट्यूट" है और ये युवा खिलाड़ियों की देखभाल और उनके पढाई का खर्च उठाती है।

  • इसके अलावा वो ONGC के लिए काम करती है।

लेखक: सुदेशना बनर्जी, अनुवादक: सूर्यकांत त्रिपाठी Published 13 Jul 2016, 15:37 IST
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