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अपने भारतीय ओलंपियन को जानें: साक्षी मलिक (महिला पहलवान)

Modified 11 Oct 2018, 13:39 IST
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साक्षी मलिक 58 किग्रा भार वर्ग में भारतीय पहलवान हैं। जूनियर स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाकर साक्षी ने अपने से काफी सीनियर और लोकप्रिय गीता फोगट के साथ खुद को स्थापित किया। साल 2016 उनके करियर में टर्निंग पॉइंट की तरह है। वह अबतक फोगट बहनों की लोकप्रियता के आगे गुमनाम थीं। लेकिन अब उनकी खुद की पहचान है। साल 2010 की कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक विजेता को न सिर्फ उन्होंने हराकर ओलंपिक क्वालीफाइंग ट्रायल में जगह बनाई। बल्कि उन्होंने रियो का टिकट भी हासिल किया।

यहां हम आपको साक्षी के बारे में 10 अहम बातें बता रहे हैं:

#1 साक्षी का जन्म 3 सितम्बर 1992 में हरियाणा के रोहतक जिले के मोखरा गांव में हुआ। उनके पिता सुखबीर मलिक दिल्ली ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन में नौकरी कर रहे हैं और उनकी मां भी सरकारी कर्मचारी हैं। #2 साक्षी जब 12 साल की थीं तभी से उन्हें रेसलिंग में दिलचस्पी थी। साल 2004 में उन्होंने अपने अभी के कोच इश्वर दहिया का अखाड़ा ज्वाइन किया। जो छोटू राम स्टेडियम में है। साक्षी ने अपनी कुश्ती स्किल को बेहतर करने के लिए लड़कों के साथ अभ्यास करना शुरू किया। साक्षी ने एक इंटरव्यू में कहा, “मेरी उम्र 12 की रही होगी तभी से मैंने पहलवानी शुरू कर दी थी, मैं साधारण लडकियों से हटकर कुछ अलग करना चाहती थी। इसी वजह से मुझे लड़कों के साथ ट्रेनिंग करनी पड़ी।” #3 दहिया के लिए लड़कियों को ट्रेनिग देना आसान नहीं था, अक्सर स्थानीय लोग उनका विरोध करते रहते थे। लेकिन चीजें बदलती गयीं और उनका अखाड़ा लड़कियों के लिए सबसे अच्छा माना जाने लगा है। साक्षी को अपनी पढाई और पहलवानी में संतुलन बनाना कठिन रहा है। लेकिन उनके अलमा मेटर वैश पब्लिक स्कूल और वैश गर्ल्स कॉलेज ने उनकी खूब मदद की। #4 इसके अलावा साक्षी के माता-पिता ने भी उनकी खूब मदद की। जिसमें उनके कोच, उनका खाना और वह सारी जरूरतें जिनकी जरूरत एक पहलवान को होती है। #5 साक्षी ने जूनियर स्तर पर अपने प्रदर्शन से छाप छोड़ना शुरू किया था। उन्होंने 2010 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। साल 2014 में उन्होंने सेनियर स्तर पर डेव शुल्ज अंतर्राष्ट्रीय रेसलिंग टूर्नामेंट में अमेरिका की जेनिफर पेज जो वर्ल्ड कांस्य विजेता थीं, को हराकर 60 किग्रा में स्वर्ण पदक जीता। इस जीत के बाद साक्षी ने कहा, “पोडियम पर खड़ी होकर मैं क्या कहूं कुछ समझ नहीं आ रहा है। मेरा मन राष्ट्रगान सुनकर विह्वल हो गया है। मैं इस दिन को कभी नहीं भूल पाऊंगी।” #6 साल 2014 में हुए ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में 58 किग्रा में साक्षी ने रजत पदक जीता। इस दौरान उन्होंने कैमरून की एड्विग गोनो और कनाडा की ब्रेक्सट्न रे स्टोन को हराया था। फाइनल में उन्हें नाइजीरिया की अमिनत अडेनियी से 0-4 से हार का सामना करना पड़ा था। #7 मलिक ने इसके बाद साल 2015 में दोहा में हुए सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में 60 किग्रा में कांस्य पदक जीता था। साक्षी ने 5 में से दो मुकाबलों में जीत हासिल की थी। वह खुद का सबसे अच्छा प्रदर्शन कॉमनवेल्थ खेल में मिली जीत को मानती हैं। “साल 2014 में ग्लासगो में कॉमनवेल्थ खेलों में अपने रजत पदक को पसंदीदा प्रदर्शन मानती हूं। यद्यपि साल 2015 में एशियन चैंपियनशिप में मेरा जो प्रदर्शन था वह कांस्य उससे कहीं ज्यादा ग्लासगो में चुनौती थी।” #8 इस बार वह रियो जा रहीं हैं और वह यहां मेडल जीतकर अपने सपने को हकीकत में बदलना चाहती हैं। इस्ताम्बुल में हुए दूसरे क्वालिफिकेशन राउंड में उन्होंने रियो का टिकट पक्का किया था। इस मुकाबले में उन्होंने 58 किग्रा में रजत पदक जीता था। “रियो के लिए क्वालीफाई करना मेरे लिये सपने के सच करने जैसा है। अब मेरा मुख्य उद्देश्य देश के लिए ओलंपिक में मैेडल जीतने का सपना है।” #9 हाल ही में जुलाई में उन्होंने स्पेनिश ग्रैंड प्रिक्स में कांस्य पदक जीतकर अपनी तैयारी का नमूना पेश किया है। #10 साक्षी को JSW स्पोर्ट्स की तरफ से स्पोर्ट्स एक्सीलेंस प्रोग्राम के तहत सहायता मिलती है। Published 27 Jul 2016, 14:24 IST
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