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अपने ओलंपियन को जानें: गगन नारंग (शूटिंग) से जुडी 10 बातें

सुर्यकांत त्रिपाठी

भारत के मुख्य शूटर गगन नारंग करीब एक दशक से भारत का तिरंगा लहरा रहे हैं। विश्व कप मैडल जितना, रैंकिंग के ऊंचाई पर पहुंचना और ओलंपिक्स में पकड़ जितना, गगन नारंग से सब कुछ हासिल किया है। अबसे छह महीने बाद रियो ओलंपिक्स में वें वापस अपना अच्छा प्रदर्शन जारी करना चाहेंगे। भारत के मुख्य शूटर से जुडी कुछ बातें: #1 चेन्नई के पंजाबी अरोरा परिवार में बिम्सेन नारंग और अमरजीत के घर 6 मई 1983 को गगन का जन्म हुआ था। बाद में उनका परिवार हैदराबाद चला गया जहां पर उनकी परवरिश हुई। छह साल की उम्र में जब उन्होंने गुबारे फोड़ने के लिए खिलौनेवाली बन्दूक उठाई थी, उसे देखकर उनके भविष्य का अंदाज़ा हो गया था। #2 2003 में घरेलू दर्शकों के आमने गगन नारंग ने एफ्रो-एशियाई खेलों के 10 मीटर राइफल शूटिंग स्पर्धा में स्वर्ण जीता था और यहीं से उनके शूटिंग करियर को शुरुआत हुई। डीप साल बाद इसी श्रेणी में उन्हें एशियाई चैंपियनशिप गोल्ड मिला। #3 साल 2006 उनके लिए बेहद खास था, गुआंगज़ौ में हुआ विश्व कप उनका पहला विश्व कप था और उन्होंने उसमे स्वर्ण पदक जीता। उनका ऐसा प्रदेशन कामनवेल्थ और एशियाई खेलों में जारी रहा और यहाँ पर उन्होंने कुल चार स्वर्ण और टीम कांस्य पदक जीते। इससे उनके रैंकिंग को भी बहुत फायदा पहुंचा। #4 साल 2008 में बैंकॉक के आईएसएसएफ विश्व कप फाइनल के 10 मीटर एयर राइफल में भी गगन को कामयाबी मिली। ये गगन को हमेशा याद रहेगा, क्योंकि यहाँ पर उन्होंने 600/600 का स्कोर बनाये रखा। ये सब तब हुआ जब साल 2008 में बीजिंग ओलंपिक्स में उनका ख़राब प्रदर्शन देखने मिला। #5 साल 2009 में आईएसएसएफ विश्व कप चांगवों में 50 मीटर तीन पोजीशन ईवेंट में उन्होंने स्वर्ण हासिल कर के ये बताया कि वें दूसरें इवेंट्स में भी अच्छे है। #6 2010, दिल्ली कामनवेल्थ खेलों में अपने प्रदर्शन से गगन नारंग से अपने प्रसंशकों को ख़ुशी से झूमने का मौका दिया था। वहां पर उन्होंने चार स्वर्ण पदक जीते और उसके बाद गुआंगज़ौ के एशियाई खेलों में उन्हें दो रजत पदक मिले। #7 उनके करियर का सबसे अच्छा पल था साल 2012 का लंदन ओलंपिक्स में 10 मीटर राइफल शूटिंग जहाँ पर उन्हें कांस्य पदक मिला। उनका स्कोर 701.1 था। दो बार लगातार ओलंपिक्स में नाकामयाब होने के बाद उन्होंने यहाँ पर पदक हासिल किया। 2012 के ओलंपिक्स खेलों में ये भारत का पहला पदक था। जीत के बाद उन्होंने कहा, " ऐसा लग रहा है कि मेरे ऊपर से बहुत भारी वजन उतर गया। पिछले दो ओलंपिक्स के लिए मैं क्वालीफाई नहीं कर पाया था और इस बात से मैं खफा था, लेकिन आख़िरकार मुझे भी एक ओलंपिक्स पदक मिला।" #8 गर्दन और कंधे की चोट के कारण वें 10 मीटर राइफल शूटिंग में हिस्सा लेना कम करना पड़ा और उन्हें 50 मीटर राइफल प्रोन और 50 मीटर तीन पोजीशन खेलों पर ध्यान केंद्रित करना पड़ा। यहाँ पर भी कामयाबी पाते हुए 2014 के ग्लासगो कामनवेल्थ खेलों में उन्होंने 50 मीटर राइफल प्रोन में रजत और 50 मीटर तीन पोजीशन में कांस्य पदक जीता। #9 साल 2015 में अमेरिका में हुए ISSF विश्व कप के 50 मीटर राइफल प्रोन ईवेंट में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर एक और ओलंपिक्स के लिए अपनी सीट पक्की की। #10 हाल ही में हुए दक्षिण एशियाई खेलों में नारंग ने अपने नाम छह पदक किये, जिनमें तीन पदक टीम इवेंट में मिले। 50 मीटर राइफल प्रोन मुकाबले भी उन्होंने 628.5 के अंक के साथ नेशनल रिकॉर्ड तोडा। प्रेरणास्रोत: मोहम्मद अली 1. गगन नारंग दिग्गज बॉक्सर ओहम्मद अली को अपना रोल मॉडल मानते थे। 2008 में जब उन्होंने 600/600 का स्कोर हासिल किया तब उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रेसिडेंट बराक ओबामा उनके प्रेरणास्रोत हैं। 2. शूटिंग के अलावा उन्हें क्रिकेट, टेनिस, टेबल टेनिस और कबड्डी में भी रूचि है। उनके पसंदीदा खिलाडी है रोजर फेडरर और माइकल शूमाकर। 3. उनकी पसंदीदा फिल्म है, परसूट ऑफ़ हैप्पीनेस और पसंदीदा एक्टर हैं ऑस्कर विजेता निकोल किडमैन और पेनेलोपे क्रूज। 4. 32 वर्षीय नारंग को चाइनीज़ खाना पसंद है और घूमने के लिए मलेशिया में लैंगकॉवी। 5. वें एयर इंडिया के साथ असिस्टेंट मैनेजर के पद पर हैं और साल 2008 में NGO ओलिंपिक गोल्ड क्वेस्ट द्वारा आगे किये गए पहले एथेलीट हैं। 6. 2010 के कामनवेल्थ खेलों में कामयाबी के बाद उन्होंने "गन्स फ़ॉर ग्लोरी" नाम की अकादमी की शुरुआत की पुणे से। इसके बाद इसके ब्रांचेस मुम्बई और सिकंदराबाद में भी खोले गए। अभी कुल 10 सेंटर्स बनाने की योजना है। लेखक: सुदेष्णा बनर्जी, अनुवादक: सूर्यकांत त्रिपाठी


Edited by Staff Editor

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