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Rio Olympics 2016: 10 मीटर एयर पिस्टल के बारे में जानिए

Modified 11 Oct 2018, 13:39 IST
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महिला निशानेबाजों के 10 मीटर एयर राइफल इवेंट के बाद रियो ओलंपिक में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल दूसरी प्रतिस्पर्धा होगी। राष्ट्रीय निशानेबाज़ी सेंटर डियोडोरो में 6 अगस्त को ये प्रतिस्पर्धा होगी। गुरप्रीत सिंह और जीतू राय भारत की तरफ से इस मुकाबले में उतरेंगे। राय इससे पहले 2014 के कामनवेल्थ खेलों, एशियन खेलों और मारीबोर आईएसएसएफ वर्ल्डकप में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। गुरप्रीत सिंह के कामनवेल्थ खेलों के रिकॉर्ड को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि वह भारत के लिए डार्क हॉर्स साबित हो सकते हैं। वहीं महिलाओं में हिना सिद्धू का ओलंपिक में 7 अगस्त को मुकाबला है। साल 2012 में सिद्धू ओलंपिक में भाग ले चुकी हैं, जहां उन्होंने फाइनल राउंड में 203.8 का स्कोर करके रिकॉर्ड बनाया था। इसलिए इस 26 वर्षीय भारतीय निशानेबाज़ से इस बार उम्मीदें हैं। हालांकि विभिन्न इवेंट्स और जेंडर के हिसाब से नियम अलग-अलग हैं और जो इस बारे ज्यादा जानना चाहते हैं उनके लिए हम यहां पूरी कवरेज पेश कर रहे हैं।

10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट होता क्या है?

जैसाकि नाम से ही पता चलता है कि इसमें लक्ष्य 10 मीटर की दूरी पर रहता है। इसके अलावा लक्ष्य की ऊंचाई जमीन से 1.4 मीटर होती है। लक्ष्य में 10 रिंग होते हैं जिसके बीचोबीच केंद्र पर निशाना लगाना होता है। इसमें निशानेबाज़ एक शॉट में अधिकतम 10.9 अंक का ही स्कोर बना सकते हैं। इस इवेंट में पिस्टल का वजन अधिकतम 1.5 किग्रा हो सकता है जिसका कैलिबर 4.5 मिमी ही हो सकता है। नियम महिला और पुरुष इवेंट में अगले राउंड में क्वालीफाई करने के लिए नियम भिन्न होते हैं। पुरुषों को 60 शॉट के लिए 75 मिनट का समय दिया जाता है। अगले राउंड में क्वालीफाई करने के लिए अधिकतम सभी शॉट से मिलाकर 10 अंक की जरूरत होती है। सबसे ज्यादा 600 अंक ही निशानेबाज़ हासिल कर सकता है। वहीं महिलाओं को 40 शॉट के लिए 50 मिनट मिलते हैं। स्कोरिंग के नियम एक जैसे हैं। महिला निशानेबाज़ सबसे ज्यादा 400 अंक हासिल कर सकती हैं। फाइनल फाइनल राउंड में शीर्ष 8 निशानेबाज़ को जगह मिलती है, जिनके बीच पदक के लिए संघर्ष होता है। इस राउंड में क्वालिफिकेशन राउंड के स्कोर को नहीं जोड़ा जाता है। आईएसएसएफ ने 10 मीटर एयर राइफल इवेंट की तरह ही फाइनल राउंड के नियम एक जैसे बनाये हैं। प्रतिभागी को इसमें 3 शॉट्स के 2 सेट्स मिलते हैं। जिसे 150 सेकंड में पूरा करना होता है। एक सीरीज के बाद 14 शॉट्स उसे और मिलते हैं। इन 14 शॉट्स के प्रत्येक शॉट के लिए 50 सेकंड फिक्स होते हैं। 8 वीं शॉट के बाद से निशानेबाजों का एलिमिनेशन शुरू हो जाता है। अगले हर दो शॉट्स के न्यूनतम अंक वाले को एलेमिनेट किया जाता रहता है। अगर दोनों फाइनलिस्ट का स्कोर टाई हो जाता है तो परिणाम के लिए शूटआउट का सहारा लिया जाता है। इस राउंड में स्कोरिंग सिस्टम में काफी बदलाव होता है, फाइनल राउंड में सबसे ज्यादा 218 अंक बनाया जा सकता है। इस इवेंट में भारतीय निशानेबाज़
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पुरुष: जीतू राय, गुरप्रीत सिंह महिला : हिना सिद्धू   लन्दन 2012 के परिणाम पुरुष स्वर्ण पदक: जोंगोह जिन(दक्षिण कोरिया) रजत पदक: लुका टेस्कोनी (इटली) कांस्य पदक: ऐन्द्रिजा ज्लाटिक(सर्बिया) महिला स्वर्ण पदक: वेन्जुन गुओ(चीन) रजत पदक: नतालिया पडेरिना (रूस) कांस्य पदक: नीनो सालूवाजे (जार्जिया) Published 28 Jul 2016, 15:28 IST
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