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अपने भारतीय ओलिंपियन को जाने: अपूर्वी चंदेला (निशानेबाज़)

जितेंद्र तिवारी

पिछले तीन ओलम्पिक में भारतीय निशानेबाजों के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सितारों के सामने भारतीय खिलाड़ियों की ये एक बड़ी उपलब्धि रही है। ये सिलसिला साल 2004 के एथेंस ओलंपिक में राज्यवर्धन सिंह राठौर के डबल ट्रैप इवेंट में रजत पदक जीतने के बाद से शुरू हुआ था। साल 2008 के बीजिंग ओलम्पिक में वह हुआ, जो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। निशानेबाज़ अभिनव बिंद्रा ने 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में स्वर्ण पदक जीता। इस क्षण ने पूरे देश को अवाक कर दिया था। ये किसी निशानेबाज़ का सपना सच नहीं हुआ था। बल्कि बड़े स्तर पर किसी एथलीट ने बहुत बड़ी सफलता हासिल की थी। साल 2012 के ओलम्पिक में हमें अपने निशानेबाजों से काफी उम्मीदें बढ़ गयीं थी। जिस पर हमारे निशानेबाज़ खरे भी उतरे। गगन नारंग ने 10 मीटर एयर पिस्टल में कांस्य पदक जीता तो विजय ने 25 मीटर एयर पिस्टल में रजत पदक जीता था। बीते तीन साल से लन्दन समर गेम्स के बाद से भारतीय निशानेबाजों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कमाल का प्रदर्शन किया है। दिलचस्प बात ये है कि ऐसा सिर्फ पुरुषों ने ही नहीं किया है। महिला निशानेबाज़ 22 वर्ष की अपूर्वी चंदेला ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। अपूर्वी के रूप में भारत को एक बेहतरीन टैलेंट मिला है। जिसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना प्रभाव छोड़ा है। साल 2011 में चंदेला खबरों में तब आयीं जब उन्होंने जूनियर स्तर पर एशियन चैंपियनशिप में 391 का स्कोर बनाकर 9वां स्थान हासिल किया था। चंदेला के लिए साल 2012 में सबसे बड़ी सफलता मिली उन्होंने राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीता, इसी में साल 2013 में कांस्य पदक भी जीता था। साल 2014 में भी चंदेला ने इसी इवेंट में दोबारा जीत हासिल की। लेकिन साल 2014 में सबसे अहम पल तब आया, जब चंदेला ने ग्लासगो कामनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीता। उसके बाद साल 2015 में चंगवन में हुए वर्ल्डकप में चंदेला ने कांस्य पदक जीतकर रियो ओलम्पिक 2016 में अपनी जगह पक्की कर ली। इससे पहले म्युनिक वर्ल्डकप के फाइनल में पहुँचने पर चंदेला ने सिल्वर मैडल जीता। महिला निशानेबाजी में आय बड़ा बदलाव चंदेला के उदय होने से भारतीय महिला निशानेबाजी में आमूलचूल बदलाव देखने को मिला है। इस बदलाव का परिणाम हैं, अंजलि भागवत, जो पहली ऐसी भारतीय महिला निशानेबाज़ हैं, जो दुनिया की नम्बर रैंक हासिल की। वहीं सुमा शिरूर ने एशियन चैंपियनशिप में 400 का स्कोर करके वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया। इसके अलावा दीपाली देशपांडे ने एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। साथ ही उन्हें 2004 में ओलम्पिक के लिए चुना गया था। स्पोर्ट्सकीड़ा के साथ हाल ही में गगन नारंग ने एक इंटरव्यू में कहा था कि चंदेला का भविष्य में बेहतरीन निशानेबाज़ होंगी। वहीं बिंद्रा ने कहा था कि उसे शांत दिमाग से रियो में खेलना चाहिए। नारंग ने कहा, “रियो में जितने भी लोगों ने क्वालीफाई किया है, उन सभी के मैडल जीतने के चांस हैं। अगर इवेंट के दिन उसके दिमाग और शरीर का तालमेल अच्छा बैठ जाएगा। मगर ये देखना दिलचस्प होगा।” अभिनव बिंद्रा ने कहा, “पहले मैच से उसे बगैर दबाव के खेलना होगा उसे ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है। यही उसे अपने पहले ओलम्पिक में सफलता हासिल करने का तरीका होगा।” अब ये देखना दिलचस्प होगा की महिला निशानेबाजी में चंदेला, भागवत से कदम आगे बढ़ाते हुए अच्छा प्रदर्शन करती हैं। ओलपिंक में पोडियम में खड़ा होना भी अपने आप में एक गर्व है। उसके बाद उनसे करोड़ों लोगों की आशाएं जुडी हैं।


Edited by Staff Editor

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