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Tokyo Paralympics - क्या नोएडा के डीएम लाएंगे टोक्यो पैरालंपिक में पदक?

Tokyo Paralympics - सुहास एल वाई गौतम बुद्ध नगर के डीएम हैं
Tokyo Paralympics - सुहास एल वाई गौतम बुद्ध नगर के डीएम हैं
Lakshmi Kant Tiwari
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भारत में बैडमिंटन एक लोकप्रिय खेल है। ओलंपिक के बारे में बात करें तो हमारे देश के खिलाड़ी लगातार 3 ओलंपिक से इस प्रतियोगिता में पदक जीत रही है। 2020 टोक्यो पैरालंपिक में भी हमारे शटलर्स से कुछ ऐसी ही उम्मीद की जा रही है। नोएडा (गौतम बुद्ध नगर) के जिला मजिस्ट्रेट सुहास एल वाई इस प्रतियोगिता में पदक जीतने के होड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। आइए एक नजर सुहास के करियर पर डालकर कुछ रोचक बातें जानने की कोशिश करते हैं।

1) सुहास एल वाई का जन्म हस्सन,कर्नाटक में हुआ था। सुहास ने अपनी स्कूलिंग शिवमोगा से की है । वहीं ग्रेजुएशन उन्होंने नेशनल इंस्टयूट आफ टेक्नोलॉजी सुरतकल से की है। 2004 में इन्होने अपना ग्रेजुएशन कम्पयूटर साइंस में की है। वहीं सुहास के पिता के बारे में बात करें तो वो भी सरकारी कर्मचारी हैं।

2) खेल और सरकारी जिम्मेदारी एक साथ

सुहास एल वाई ना ही सिर्फ एक सफल पैरा एथलीट हैं। वो बतौर अधिकारी भी उतनी ही फुर्ति से काम करते हैं।कर्नाटक में जन्म लिए सुहास फिलहाल गौतमबुद्ध नगर में बतौर जिलाधिकारी काम कर रहे हैं। 2016 में प्रधानमंत्री पुरस्कार के लिए इनका नाम चयनित हुआ था। वहीं सुहास को काफी राज्य पुरस्कार से भी नवाजा गया है।

3) विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज हैं

सुहास एल वाई की अगर अपलब्धि पर नजर डालेंगे तो शायद उसे गिनते-गिनते काफी समय निकल जाएगा। 2017 और 2019 में सुहास ने भारत को टर्किश ओपन पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक दिलाया था। 2019 में ही गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी थाइलैंड,चीन,युगांडा और डेनमार्क ओपन में अपने देश के लिए कांस्य पदक जीतने में सफल रहे थे।

सुहास विश्व पैरा बैडमिंटन में तीसरे स्थान पर काबिज हैं, जिसके आधार पर ही उनसे कयास लगाए जा रहे हैं कि वो 2020 पैरालंपिक में भी पदक अपने नाम करेंगे।

4) भारत के पहले सरकारी कर्मचारी जिनके नाम विश्व स्तर पर पदक है

चीन में आयोजित एशियन पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता में सुहास ने 2016 में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। इस प्रतियोगिता में शटलर ने हैरी शुशानाटो को हराकर शीर्ष स्थान प्राप्त किया था । सुहास ने एशियन प्रतियोगिता में पदक जीतने के साथ वो भारत के ऐसे पहले अधिकारी बन गए थे। जिन्होने विश्व स्तरीय प्रतियोगिता में पदक अपने नाम किया था। इस दौरान ये आजमगढ़ के जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत थे।

सुहास की इस उपलब्धि पर पूरी दुनिया कायल है। खासकर सरकारी कर्माचारी। अमूमन अधिकारी को लेकर लोगों की ये लोगों की राय होती है कि वो आलसी होते हैं। लेकिन नोएडा के इस जिलाधिकारी से ये साफ जाहिर होता है कि हमारे अधिकारी हर एक जिम्मेदारी को सच्चे देशप्रेम से करते हैं।


Edited by निशांत द्रविड़

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