5 कमेंटेटर्स जिन्होंने कमेंट्री करते वक़्त बेतुके बयान दिए

भारत में क्रिकेट बस एक खेल नहीं है, बल्कि एक त्योहार के जैसा है। यहाँ हर एक बच्चा एक क्रिकेटर बनने का सपना जरूर देखता है और कई तो इसमें कामयाब भी होते हैं। यह खेल है ही इतना रोमांचक और इसे और रोमांचक बनाता है इसमें होने वाली कमेंट्री ।

कमेंटेटर्स कई बार मैच के दौरान कुछ मज़ाकिया वाक्यों का जिक्र जरूर करते हैं। यह वही कमेंटेटर्स है, जोकि दर्शकों का ध्यान मैच में बनाए रखते हैं।

एक मैच के दौरान एक कमेंटेटर लाइव स्कोर, खिलाड़ियों का विश्लेषण, उनके मूव, पिच कंडीशन और दर्शकों के रिएक्शन के बारे में बात करते है। लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू और वीरेंदर सहवाग जैसे क्रिकेट एक्सपर्ट अपने विश्लेषण के दौरान दर्शकों को मनोरंजन भी करते हैं।

हर्षा भोगले हमेशा ही बड़ी गंभीरता के साथ मैच की कमेंट्री करते है, लेकिन कई बार कमेंटेटर्स मज़ाक करने के चक्कर में कुछ बेमतलब का ही बोल जाते हैं।

आइये नज़र डालते है,5 कमेंटेटर्स पर जोकि कमेंट्री करते हुए लाइन से भटक जाते हैं:

1- नवजोत सिंह सिद्धू

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नवजोत सिंह सिद्धू पूर्व भारतीय क्रिकेटर और भारतीय संसद के पूर्व सदस्य भी है। क्रिकेट से रिटायर होने के बाद, उन्होंने अपना ज़्यादातर समय कमेंट्री , टीवी शो और राजनीति में ही बिताया है। सिद्धू एक प्रसिद्ध क्रिकेट कमेंटेटर है, जोकि कमेंट्री करते हुए हमेशा मज़ाकिया अंदाज़ ही अपनाते है।

इस पूर्व सांसद ने एक मैच के दौरान एक ऐसा कमेंट किया, जिसका कोई मतलब नहीं बनता था। उन्होंने कहा, "गेंद ऐसी जगह लगी है हड्डी तो ना टूटे, लेकिन नुकसान बहुत होगा।"

एक और कमेंट जो उन्होंने किया, "फिफ़्टी मारना, एक वर्जिन को किस करने जैसा है। आपको बस आगे जाना हैं।" इस कमेंट का कोई मतलब नहीं बनता।

एक और मैच जिसमें इंडिया खेल रही थी, उन्होंने कहा, "बल्लेबाज़ क्रीज़ से इतने बाहर आ गए है कि धोनी ने पहले चाय पी, उसके बाद अखबार पढ़ी और अंत में जाकर स्टंप आउट किया।"

2- रमीज राजा

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रमीज राजा पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर है और अभी वो क्रिकेट कमेंटेटर भी है। राजा ने एक और बार ऐसे ही कमेंट का इस्तेमाल किया, उन्होंने कहा, "हफीज गेंद को आराम से पुश कर रहे है और निश्चित ही उनके साथ जमशेद को मज़ा आ रहा होगा।"

एक बार सिद्धू और राजा एक साथ मैच की कमेंट्री कर रहे थे और तभी उन्होंने कहा, "अगर अब एक या दो नोबॉल हो जाए और फिर एक छक्का लग जाए, तो निश्चित ही पाकिस्तान यह मैच जीत जाएगा।"

उसके जवाब में सिद्धू ने कहा, "अगर मेरे चाची की मूंछे होती, तो मैं उन्हें चाचा नहीं कहता। "

3- सौरव गांगुली

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सौरव गांगुली एक अनुभवी इंडियन क्रिकेटर है और साथ ही में वो टीम के पूर्व कप्तान भी है। गांगुली को उनके फैंस "दादा" के नाम से बुलाते हैं। वो इस मौजूदा समय में बीसीसीआई के अध्यक्ष भी है।

दादा को सबसे ज्यादा इंडियन टीम की कप्तानी और अपनी एग्रेसिव बल्लेबाज़ी के लिए ही जाना जाता है। रिटायरमेंट के बाद वो कमेंट्री करते हुए भी नजर आए। हालांकि प्रिंस ऑफ कोलकाता ने भी ऐसा कुछ कहा कि जिसका कोई मतलब नहीं था।

उन्होंने कहा, "अगर मैं इंडिया का प्रधानमंत्री होता, तो बहुत सी चीजें बदल पाता।" गांगुली ने यह बात इंडिया और इंग्लैंड के बीच टेस्ट मैच के दौरान कहा। उस समय उनके साथ हर्षा भोगले और राहुल द्रविड़ कमेंटरी कर रहे थे।

एक बार इंडिया और इंग्लैंड का मैच पर्थ में हो रहा था, तो उनके साथ क्रिकेट पंडित ने कहा कि मैच देखने 7,653 लोग आए हैं। उसके जवाब में गांगुली ने कहा कि इससे ज्यादा लोग, तो हमारे यहाँ दुर्गा पूजा में आते हैं।

4- शोएब अख्तर

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शोएब अख्तर पूर्व पाकिस्तानी गेंदबाज है, जिन्हें रावलपिंडी एक्स्प्रेस के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने सबसे तेज़ गेंदबाज के रूप में गिनती होती थी जोकि 161.3 की गति से गेंद कर सकता हो। रिटायरमेंट के बाद वो एक कमेंटेटर बन गए।

जब कमेंट्री की बात हो, तो बेमतलब के कमेंट करने के हिसाब से सिद्धू के बाद अख्तर का नाम भी आता हैं। एक बार उन्होंने कहा, "ऊपर लगी, नीचे लगती तो अलग ही मसला होता।"

एक बार राहुल द्रविड़ के साथ कमेंट्री करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए जीतना काफी मुश्किल था, अब उन्हें बस अफरीदी बचा सकते हैं।

शाहिद अफरीदी के खेलने का तरीका सब जानते ही है, इसलिए द्रविड़ ने भी यह मौका नहीं छोड़ा और कहा, "अगर आपकी उम्मीदें अफरीदी पर टिकी हैं, तो निश्चित ही टीम की हालत बहुत खराब हैं।"

5- हर्षा भोगले

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हर्षा भोगले काफी प्रसिद्ध इंडियन कमेंटेटर है और वो सभी दर्शकों को 90 के दशक से अपनी आवाज में क्रिकेट का विश्लेषण करते आ रहे है।

हर्षा भोगले ने एक बार इंडियन प्लेयर रजत भाटिया का मज़ाक बनाया और कहा, "किसी भी गेंदबाज के पास तीन विविधता होती हैं, तेज़, मध्य और धीमा। लेकिन रजत भाटिया के पास धीमा, उससे धीमा और सबसे धीमा गेंद करने का अंदाज़ हैं।" यह कमेंट मज़ाक में था, लेकिन भाटिया इतने भी धीमी गेंद नहीं करते। इन सब के बावजूद भोगले को बेस्ट इंडियन कमेंटेटर कहा जाता हैं।

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