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SAvIND: दिनेश कार्तिक की 5 विशेषतायें जो टेस्ट टीम में उनके चयन को सही साबित करती है

Rahul Pandey
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कुछ हफ़्ते पहले दिनेश कार्तिक सैयद मुश्ताक अली ट्राफी खेल रहे थे और दक्षिण अफ्रीका के वनडे दौरे के लिए खुद को तैयार कर रहे थे। यहां तक कि उन्होंने कल्पना भी नही की होगी कि उनका टेस्ट टीम के लिए बुलाया जायेगा। पार्थिव पटेल और कार्तिक दोनों ने महेंद्र सिंह धोनी से पहले अपने करियर की शुरुआत की। हालांकि, यह धोनी की विस्फोटक बल्लेबाजी थी और रनों का अम्बार था, जिसने इन दोनो की जगह पक्की नही होने दी। अब ऋद्धिमान साहा के श्रृंखला से बाहर होने और पर्थिव पटेल विकेट के पीछे नाकाम रहने के बाद, यह लगभग निश्चित है कि दिनेश कार्तिक तीसरे टेस्ट में खेलेंगे। आइए यहाँ हम उनकी 5 विशेषतायों पर नजर डालते हैं जो टेस्ट टीम में उनके चयन को सही सिद्ध करते हैं।

# 5 वर्तमान फ़ॉर्म

दिनेष कार्तिक ने सभी को यह बता दिया कि वह लाजवाब फॉर्म में आ चुके हैं, जब उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्राफी में अपना तीसरा अर्धशतक लगाया। टूर्नामेंट की पांच पारियों में उन्होंने 211 रन बनाये, जिसमे केरल के खिलाफ 71 रनो की विस्फोटक पारी के साथ ही गोवा के खिलाफ 56 रन की पारी भी खेली। कार्तिक पिछले काफी समय से अच्छी फॉर्म में हैं और गेंद पर अच्छे से प्रहार कर रहे हैं। वह दुलिप ट्रॉफी में सनसनीखेज थे, जहां उन्होंने इंडिया रेड के लिए एक शतक लगाया था। तमिलनाडु के कप्तान ने चार प्रथम श्रेणी मैचों में 59.20 की शानदार औसत से 296 रन बनाये हैं। इसे भी पढ़ें: SAvIND: ग्रीम स्मिथ ने विराट कोहली के लम्बे समय तक कप्तान बने रहने पर शंका जताई

# 4 दक्षिण अफ़्रीका में रन

वह 2006-07 में भारत के दक्षिण अफ्रीका दौरे के तीसरे टेस्ट का हिस्सा थे। श्रृंखला 1-1 पर टिकी थी, पहले दो टेस्ट में बेंच पर बैठने के बाद, कार्तिक को अंततः केपटाउन में तीसरे टेस्ट में मौका मिला। उन्होंने दोनों हाथों से इस अवसर को लपका, जहाँ उन्होंने डेल स्टेन और मखाया एनटिनी के सामने बल्लेबाजी करते हुए 240 गेंदों में 63 रन की पारी खेली। कार्तिक भारतीय खिलाड़ियों की उस छोटी सूची का हिस्सा हैं जिन्होंने विदेशी जमीन पर रन बनाए हैं। उनके नाम इंग्लैंड में 60 (लॉर्ड्स), 77 (नॉटिंघम) और 91 (ओवल) के स्कोर हैं,जो कठिन बल्लेबाजी की स्थिति के लिए जाने जाते है। भारत के 2007 के इंग्लैंड दौरे में, जब गेंद स्विंग हो रही थी, तब युवा कार्तिक ने साहसपूर्वक विपक्षी टीम का सामना किया था।

# 3 विकेट-कीपिंग कौशल

अगर पार्थिव पटेल को तीसरे टेस्ट से बाहर कर दिया जाता है, जिसकी सबसे अधिक संभावना है, यह उनके ख़राब विकेटकीपिंग कौशल की वजह से होगा, न कि उनकी असफल बल्लेबाजी प्रदर्शन के कारण। दूसरे टेस्ट में पटेल के गिराए गए कैच ने इस तथ्य को दोहराया कि एक विकेटकीपर टीम के सबसे कम आंके जाने वाले सदस्यों में से एक हैं। अगर वह कीपिंग के दौरान चूकता है, तो वह अकेले टीम को जीत से दूर कर सकता है।
दिनेश कार्तिक पार्थिव पटेल की तुलना में बेहतर कीपर हैं। अगर हम दस्ताने के कार्य के संदर्भ में वर्तमान तीनों कीपरों को रैंक करना चाहते हैं, तो यह क्रम- साहा, कार्तिक और पटेल होगा। 32 वर्षीय कार्तिक शुरुआत में सबसे अच्छे कीपरों में से नहीं थे। हालांकि, उन्होंने अपने खेल के इस पहलू पर कड़ी मेहनत की और पिछले कई वर्षों में काफी सुधार किया।

# 2 अनुभव

यह 14 साल पुरानी बात हो गयी है, जब 19 वर्षीय एक लड़के ने 2004 में मुंबई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने टेस्ट मैचों के करियर की शुरुआत की थी। तब से कार्तिक की यात्रा उतार चड़ाव से भरी रही है। उन्होंने टुकड़ों में अच्छा प्रदर्शन किया है नतीजतन, वह टीम में कभी भी एक नियमित सदस्य बन पाने में सक्षम नहीं हुए है। उन्होंने 2010 में बांग्लादेश के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट खेला था, कार्तिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगभग एक दशक के अनुभव के साथ आते हैं। उनके पास लिस्ट -ए के 206 से अधिक मैचों का एक लम्बा अनुभव है। तमिलनाडु के बल्लेबाज ने लगभग 40 की औसत से 6043 रन बनाए हैं, जिसमें उनका सर्वोच्च नाबाद 154 रन का रहा है। उनके नाम पर उनके 11 शतक और 32 अर्धशतक भी हैं और उनका बल्लेबाजी कौशल शानदार है। # 1 टीम मैन पार्थिव की तरह, कार्तिक भी एक बैक-फूट पर खेलने वाले खिलाड़ी हैं। वह कट और पुल शॉट पर मजबूत हैं और गति के खिलाफ खुद को काफी अच्छे से संभाल सकते है। ओपनिंग से लेकर 7 वीं पोजीशन तक बल्लेबाजी कर सकने में समर्थ, कार्तिक ने टीम के बैलेंस के लिए सभी पोजीशन पर बल्लेबाजी की है। आप तमिलनाडु क्रिकेट में किसी से भी मिलते हैं तो वह आपको यही बताएंगा कि दिनेश कार्तिक निर्विवाद रूप से सबसे नि:स्वार्थ खिलाड़ी हैं। कार्तिक कहते हैं "मेरे करियर में एक समय के बाद, मुझे एहसास हुआ कि उन रनों को बनाना ज्यादा अच्छा है, जिनके चलते आपको टीम के लिये टूर्नामेंट की जीत दिलाने में सफलता मिले और आप कितनी बार बड़े मैचों में [आपकी टीम के लिए] खड़े हो पाए हैं।" लेखक: सक्षम मिश्र अनुवादक: राहुल पांडे

Edited by Staff Editor
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