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युवराज सिंह को भारतीय टीम से बाहर रखने के 5 सही कारण

Modified 19 Aug 2017
श्रीलंका के साथ होने वाली वनडे सीरीज के लिए टीम की घोषणा होने के बाद फैन्स को थोड़ी निराशा हुई, क्योंकि युवराज सिंह को टीम में जगह नहीं दी गई। यह तो समय ही बताएगा कि क्या अब इसे इस दिग्गज खिलाड़ी के करियर का अस्त समझा जाए। हालांकि, चयन समिति के चेयरमैन एमएसके प्रसाद का कहना कुछ और है। प्रसाद ने एक हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘युवराज सिंह को आराम दिया गया है न कि उन्हें टीम से बाहर किया गया है। हमने कुछ खिलाड़ियों को छांटा है, जिन्हें अगले 4-5 महीने तक खेलने का मौका दिया जाएगा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘तय समय के बाद देखा जाएगा कि 2019 विश्व कप के लिए टीम इंडिया कैसी होगी। युवराज सिंह और सुरेश रैना के लिए उम्मीद अभी भी बाकी है।’ साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि आगामी विश्व कप के लिए फिटनेस के मानक सख्त होंगे। 35 साल की उम्र में अब युवराज के लिए टीम में वापस जगह बनाना, एक टेढ़ी खीर है। सवाल यह भी उठता है कि उन्हें टीम से बाहर रखना किस हद तक जायज है? आइए जानते हैं ऐसी 5 वजहें, जिनके मुताबिक युवराज को बाहर रखना ही सही है: #5 खराब फॉर्म eceb0-1502871437-800 अगर कटक में 150 रन और चैंपियन्स ट्रॉफी में पाक के खिलाफ अर्धशतकीय पारी को नजरअंदाज करें तो टीम में वापसी के बाद से युवराज का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है। युवराज से उम्मीद की जाती है कि वह बल्लेबाजी के मध्यक्रम को अपने अनुभव से और मजबूती देंगे। वह एकमात्र बल्लेबाज हैं, जो किसी भी गेंदबाज का स्पेल खराब करने का माद्दा रखते हैं। लेकिन यह प्रयोग सफल साबित नहीं हुआ। वापसी के बाद से युवराज ने 11 वनडे मैचों में 41.33 के औसत के साथ 372 रन बनाए हैं। टी-20 में उन्होंने 18 मैचों में 209 रन बनाए हैं। अगर ऊपर बताई गई पारियों को हटा दें तो युवराज 9 मैचों में एक भी अर्धशतक नहीं लगा सके। वेस्टइंडीज के खिलाफ अपनी आखिरी 3 पारियों युवराज का स्कोर 4, 14, 39 का रहा है। लंबे वक्त से जरूरत पड़ने पर युवराज बड़े हिट्स लगाने में भी नाकाम रहे हैं। एक वक्त पर अपनी चुस्त फील्डिंग के लिए मिसाल माने जाने वाले युवराज अब फील्ड पर ढीले दिखने लगे हैं, जिसका नुकसान टीम को उठाना पड़ सकता है।
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Published 19 Aug 2017
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