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क्रिकेट इतिहास की चार घटनाएं जब खिलाड़ियों ने खुदगर्ज़ी का परिचय दिया

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Modified 20 Dec 2019, 22:15 IST

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क्रिकेट एक टीम खेल हो सकता है लेकिन यह भी सच है खिलाड़ियों को टीम में बने रहने के लिए अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन पर भी ध्यान देना होता है।खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह बनाए रखने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।लेकिन कई बार ऐसा भी हुया है जब वे अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए टीम की साख दांव पर लगा देते हैं।

क्रिकेट इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जब क्रिकेटरों ने खेल-भावना के उलट चलकर भद्रपुरुषों के इस खेल की साख को बट्टा लगाया है। तो आइए जानते हैं क्रिकेट इतिहास की चार घटनाएं जब क्रिकेटरों ने खुदगर्ज़ी का परिचय दिया: 

#4. जब डेविड वॉर्नर ने 2012 सीबी सीरीज़ के फाइनल में 140 गेंदों में बनाया शतक 

Australia v Sri Lanka - Tri-Series Final Game 1

डेविड वॉर्नर उन विस्फोटक बल्लेबाजों में से एक हैं जिनसे पूरी दुनिया के बल्लेबाज ख़ौफ खाते हैं। वह पहली गेंद से ही शॉट खेलने के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने एक बार 140 गेंदों में शतक बनाया था और वह भी श्रीलंका के खिलाफ सीबी सीरीज़ के फाइनल में। उनका यह शतक ऑस्ट्रेलियाई टीम की हार का कारण बना।

2012 में, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया इस सीरीज का फाइनल खेल रहे थे। पहले बल्लेबाजी कर रही कंगारू टीम की तरफ से माइकल क्लार्क ने 91 गेंदों पर शानदार 117 रन बनाए। वॉर्नर, जिन्होंने पिछले मैच में 163 रन बनाए थे, से इस मैच में भी अपना प्रदर्शन दोहराने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन ऐसा हो ना सका।

वॉर्नर ने अपनी धीमी पारी में केवल पांच बार गेंद को सीमा-रेखा के पार पहुंचाया। वह पारी के 46 वें ओवर में आउट हुए और ऑस्ट्रेलिया ने निर्धारित 50 ओवरों में 271 रन बनाए।

जबाव में श्रीलंका ने तिलकरत्ने दिलशान के शतक और कुमार संगकारा और महेला जयवर्धने के दोहरे अर्धशतकों की बदौलत 5 ओवर पहले ही यह मैच जीत लिया। इस हार का सबसे बड़ा कारण वॉर्नर की धीमी पारी को माना गया।

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Published 24 Mar 2019, 10:22 IST
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