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5 युवा भारतीय खिलाड़ी जो राष्ट्रीय टीम में चयन की दौड़ में बहुत पीछे हो गये

Rahul Pandey
ANALYST
टॉप 5 / टॉप 10
9.76K   //    16 Mar 2019, 19:40 IST

उन्मुक्त चंद

भारत इस समय दुनिया के शीर्ष क्रिकेट देशों में से एक है, और क्रिकेट की प्रतिभाओं का घर रहा है। देश में क्रिकेट शुरू होने के बाद से कई बेहतरीन क्रिकेटर उभर कर सामने आयी हैं। फारुख इंजीनियर से लेकर सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर से लेकर विराट कोहली तक और अब शुबमन गिल तक कई प्रतिभाशाली क्रिकेटर उभर कर सामने आये हैं।

हालांकि, सभी प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपने देश के लिए नहीं खेल पाते हैं, और अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन न कर पाने के कारण वह इतिहास के पन्नो में दर्ज नाम भर रह जाते हैं करते हैं। समय समय पर ऐसे कई प्रतिभाशाली क्रिकेटर सामने आये हैं और वसीम जाफर, अमोल मजूमदार और सुब्रमण्यम बद्रीनाथ कुछ ऐसे ही नाम रहे हैं।

यहां तक कि क्रिकेटरों की वर्तमान पीढ़ी में, कई युवाओं को आईपीएल के दौरान ही भुला दिया जाता है। यहाँ हम वर्तमान पीढ़ी के 5 ऐसे ही खिलाड़ियों पर नज़र डाल रहे हैं जो कहीं न कहीं चयन की होड़ से बाहर हो चुके हैं


#5 मनन वोहरा

मनन वोहरा

एक ऐसे होनहार युवा बल्लेबाज जिनका प्रदर्शन पिछले 15 महीनों में काफ़ी खराब होता गया है। मनन वोहरा को एक समय भविष्य के बड़े खिलाड़ी के रूप में देखा जाता था। उन्हें शुरुआत में 2012 में U19 विश्व कप टीम के लिए चुना गया था, लेकिन उंगली की चोट के कारण उन्हें नाम वापस लेना पड़ा। मनन वोहरा एक आक्रामक खिलाड़ी रहे हैं, वह KXIP के लिए अत्यधिक प्रभावशाली थे और बल्ले से आक्रामक तेवर दिखाए थे।

आरसीबी ने 2018 की नीलामी में खरीदा और यहीं से इस युवा खिलाड़ी का खराब दौर शुरू हुआ। उन्हें एक ऐसी टीम के लिए सलामी बल्लेबाज के रूप में चुना गया, जिसमें पहले से ही ब्रेंडन मैकलम, क्विंटन डी कॉक, विराट कोहली और पार्थिव पटेल थे। नतीजतन, यह युवा खिलाड़ी सिर्फ 4 मैच खेल पाया था और 2019 की नीलामी के पहले 2 राउंड में उनके लिए कोई बोली नही लगी। हालाँकि वह भाग्यशाली रहे और राजस्थान रॉयल्स ने नीलामी के अंत में उन्हें खरीदा।

हालांकि, अजिंक्य रहाणे, राहुल त्रिपाठी और जोस बटलर जैसे सलामी बल्लेबाजों की मौजूदगी में उन्हें ज्यादा मौके मिलने की संभावना कम ही नज़र आ रही हे। इस 25 वर्षीय खिलाड़ी को इंडिया ए टीम में भी ज्यादा अवसर नहीं मिले और वर्तमान में चयन के मुकाबले से बाहर है। एक होनहार खिलाड़ी के करियर को इस प्रकार ढलान की ओर बढ़ते देखना बहुत निराशाजनक है और सिर्फ उम्मीद ही की जा सकती है कि वह अपने करियर को फिर से पटरी पर ला सकें।

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