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‘बॉल टैंपरिंग’ से कैसे मिलती है मदद और ‘रिवर्स स्विंग’ के लिए क्यों किया जाता है गेंद से छेड़छाड़ ?

Syed Hussain
ANALYST
Modified 29 Mar 2018, 12:15 IST
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दक्षिण अफ़्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए केपटाउन टेस्ट के दौरान कैमरे पर कैमरन बैनक्रॉफ़्ट सैंडपेपर के साथ तब पकड़े गए जब वह उससे गेंद को रगड़ रहे थे। इस घटना के बाद तो मानो क्रिकेट की दुनिया में हड़कंप मच गया, हालांकि ये कोई पहला मौक़ा नहीं था जब किसी क्रिकेटर ने गेंद के साथ छेड़छाड़ की हो और पकड़ाया हो। लेकिन जिस तरह से इस बार कंगारुओं ने इसे एक गेम प्लान के तहत इस्तेमाल किया, वह चौंकाने वाला था। कप्तान स्टीव स्मिथ ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ये माना कि बैनक्रॉफ़्ट से ग़लती हुई है और साथ ही ये कहते हुए सभी को और भी हैरान तब कर दिया कि ये ‘लीडरशप ग्रुप’ के तहत हुआ था। बाद में ये भी बात सामने आई कि इसकी शुरुआत उप-कप्तान डेविड वॉर्नर ने की थी और उन्होंने ही इसके लिए पहले स्टीव स्मिथ और फिर कैमरन बैनक्रॉफ़्ट को इस साज़िश का हिस्सा बनाया।

तेज़ गेंदबाज़ को कैसे मिलती है पारंपरिक स्विंग ?

  एक तेज़ गेंदबाज़ हमेशा चाहता है कि उसके हाथों में नई लाल, सफ़ेद या गुलाबी गेंद मिले ताकि उससे वह बल्लेबाज़ों को अपनी स्विंग से परेशान कर सके। नई गेंद की चमक से जो स्विंग मिलती है उसे पारंपरिक स्विंग कहा जाता है जो क़रीब 10-15 ओवर तक आराम से मिलती है। इसके लिए गेंदबाज़ सीम और चमक का इस्तेमाल बेहतरीन ढंग से करता है, मसलन एक इनस्विंग गेंद डालने के लिए गेंदबाज़ दो उंगलियों के बीच में सीम रखता है और सीम की दिशा लेग स्लिप की तरफ़ रहती है और ठीक इसके उलट आउटस्विंगर के लिए सीम की दिशा पहली स्लिप की तरफ़ होती है। आमूमन बल्लेबाज़ गेंदबाज़ के हाथों में सीम को देखकर अंदाज़ा लगाने की कोशिश करता है कि गेंद इनस्विंग होगी या आउटस्विंग। स्विंग इसपर भी निर्भर करती है कि आख़िरी वक़्त में गेंदबाज़ ने सीम कितनी सटीक रखी है, अगर पिच पर गेंद बिल्कुल सीम पर टकराती है तो गेंदबाज़ को अच्छी स्विंग मिलती है और बल्लेबाज़ चकमा खा सकता है।

रिवर्स स्विंग क्या और कैसे होती है ?

      पांरपरिक स्विंग तो हमने समझाने की कोशिश की, अब अहम ये है कि जब गेंद पुरानी हो जाती है तो फिर तेज़ गेंदबाज़ के लिए कितनी मुश्किल होती है। गेंद जल्दी पुरानी न हो, इसके लिए खिलाड़ी बार बार गेंद को चमकाने की कोशिश करते रहते हैं कोई पसीना लगाता है तो कोई मुंह के सलीवा से भी गेंद को चमकाता रहता है। लेकिन आमूमन 25-30 ओवर के बाद गेंद खुरदुरी होना शुरू हो जाती है, और तब रिवर्स स्विंग अपना कमाल दिखाती है। रिवर्स स्विंग के बारे पूरी जानकारी देने से पहले आपको ये भी जानना ज़रूरी है कि इसका इजाद पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज तेज़ गेंदबाज़ सरफ़राज़ नवाज़ ने किया था, और उन्होंने इसे अपने बाद इमरान ख़ान को बताया। इमरान ने वसीम अकरम और वक़ार युनिस को समझाया, जिसका इस्तेमाल इन दोनों ने शानदार अंदाज़ में किया था। रिवर्स स्विंग की शुरुआत तब होती है जब गेंद पुरानी हो जाती है, तब तेज़ गेंदबाज़ एक हिस्से को पुराना ही रखता है और उसे खुरदुरा छोड़ देता है जबकि दूसरे हिस्से को चमकाता रहता है। जब गेंद का एक हिस्सा खुरदुरा और दूसरा हिस्सा चमकदार होता है तो असर ये होता है कि जब तेज़ गेंदबाज़ के हाथ से गेंद छूठती है तो पारंपरिक जो गेंद चमक के साथ स्विंग होना चाहिए उसपर हवा के दबाव से खुरदुरा वाला हिस्सा ब्रेक लगाने का काम करता है। लिहाज़ा होता ये है कि गेंद जिधर खुरदुरी होती है स्विंग उसके उलटी ओर होती है। इसलिए इसे रिवर्स स्विंग कहा जाता है, उदाहरण के तौर पर मान लीजिए खुरदुरा वाला हिस्सा और सीम पहली स्लिप की ओर है तो तेज़ गेंदबाज़ की ये गेंद आउटस्विंग की जगह इनस्विंग हो जाएगी। इसी तरह अगर खुरदुरा वाला हिस्सा फ़ाइन लेग या लेग स्लिप की तरफ़ है तो गेंद इनस्विंग की जगह आउटस्विंग हो जाती है। यही वजह है कि अक्सर रिवर्स स्विंग के दौरान तेज़ गेंदबाज़ अपने हाथों से गेंद को छुपाए रहते हैं ताकि बल्लेबाज़ ये न देख पाए कि खुरदुरा हिस्सा किधर है और चमकीला हिस्सा किधर है।  

बॉल टैंपरिंग से क्या होता है फ़ायदा ?

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  उम्मीद है अब तक आप ये तो समझ गए होंगे कि पारंपरिक स्विंग और रिवर्स स्विंग में क्या अंतर है। अब अहम ये है कि गेंदबाज़ मैदान पर बॉल टैंपरिंग यानी गेंद के साथ छेड़छाड़ करता क्यों है। हालांकि एक अंदाज़ा तो आपने लगा ही लिया होगा, दरअसल रिवर्स स्विंग तभी होती है जब गेंद पुरानी हो जाए और खुरदुरी हो जाए। लिहाज़ा कई बार ऐसा देखा गया है कि जब नई गेंद से तेज़ गेंदबाज़ों को ख़ास मदद नहीं मिल रही होती है तो इसे पुरानी करने के लिए आउटफ़िल्ड से खिलाड़ी विकेटकीपर के पास बार बार टप्पा खिलाते हुए गेंद फेंकते हैं ताकि गेंद जल्द घिस जाए। पर कभी कभी मैदान पर कुछ ऐसी चीज़ें होती हैं जो हाल ही में कैमरन बैनक्रॉफ़्ट ने किया, खिलाड़ी गेंद को ख़राब करने के लिए सैंड पेपर या कोल्ड ड्रिंक का ढक्कन या फिर अपने नाख़ून या दातों का इस्तेमाल करते हुए पकड़ाए गए हैं। ऐसा करने के पीछे उनकी मंशा ये रहती है कि वह गेंद को ख़राब कर दें ताकि तेज़ गेंदबाज़ को इसका फ़ायदा मिल सके, कभी कभी सीम के धागे को भी निकाल देने से गेंदबाज़ों को फ़ायदा पहुंचता है। आईसीसी ने इस तरह की किसी भी चीज़ों को प्रतिबंधित क़रार दिया है और ऐसा करते हुए गेंद के साथ छेड़छाड़ करते हुए पाए जाने पर सज़ा का भी प्रावधान है जो अभी अभी स्टीव स्मिथ, डेविड वॉर्नर और कैमरन बैनक्रॉफ़्ट पर लगा भी। आख़िर में ये भी बताते चलें कि सिर्फ़ गेंद को ख़राब करना ही प्रतिबंधित नहीं है बल्कि पसीने और सलीवा की जगह किसी भी तरह की क्रीम, जेली बीन्स या च्विंगम के ज़रिए उसे ज़्यादा चमकाना भी नियम के ख़िलाफ़ है। यही वजह है इस खेल को जेंटलमेन गेम कहा जाता है लेकिन गाहे बगाहे ऐसी हरकतें भी होती रहती हैं जो इस खेल के साथ खिलवाड़ है।   Published 29 Mar 2018, 12:15 IST
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