डीआरस के लिए मना करने से मैं एम एस धोनी और सचिन तेंदुलकर से बेहद अपसेट था - शशि थरूर 

एम एस धोनी
एम एस धोनी

भारतीय राजनेता शशि थरूर क्रिकेट के भी काफी शौकीन हैं और इसके तकनीकी पहलुओं के बारे में भी काफी जानते हैं। शशि थरूर ने बताया कि डिसीजन रिव्यू सिस्टम यानि डीआरएस का क्रिकेट में कितना बड़ा महत्व है। थरूर के मुताबिक ये क्रिकेट के सबसे बेहतरीन खोज में से एक है।

स्पोर्ट्सकीड़ा क्रिकेट के फेसबुक पेज पर इंद्रानिल बसु से खास बातचीत में शशि थरूर ने डीआरएस को लेकर अपनी बड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब एम एस धोनी और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज क्रिकेटरों ने शुरुआत में डीआरएस का विरोध किया था तो उन्हें काफी निराशा हुई थी।

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शशि थरूर ने कहा कि वो डीआरएस के फैन रहे हैं और भारत को इसका उपयोग काफी पहले से ही करना चाहिए था। उन्होंने कहा,

मैं टेक्नॉलजी का बहुत बड़ा फैन हूं। शुरुआत से ही मैं डीआरएस का पक्षधर रहा हूं। जब धोनी और सचिन ने इसके लिए मना किया था तो मैं काफी अपसेट हुआ था। मैं क्रिकेट देखता हूं हर बार यही लगता है कि अंपायरों को फैसले लेने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

शशि थरूर ने कहा कि बिना डीआरएस के मैच नहीं देखना चाहता

शशि थरूर ने आगे एक और बड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वो भविष्य में इंटरनेशनल क्रिकेट बिना डीआरएस के नहीं देखना चाहते हैं।

डीआरएस एक बहुत बड़ा इनोवेशन है। मैं बिना डीआरएस के इंटरेशनल क्रिकेट दोबारा नहीं देखना चाहता। डीआरएस की वजह से कई सारे गलत फैसलों को सही करने में मदद मिलती है और फैंस को भी ये उत्साहित करता है। ये किसी कहानी में एक अतरिक्त रोमांच पैद करता है। जहां तक मेरा सवाल है तो ये काफी अच्छी तकनीक है।

आपको बता दें कि जब डीआरएस की शुरुआत हुई थी तब भारतीय टीम इसके पक्ष में नहीं थे। हालांकि समय बीतने के साथ भारतीय बोर्ड इसके लिए राजी हो गया। एम एस धोनी को डीआरएस लेने में सबसे माहिर माना जाता था। जब भी वो किसी चीज के लिए डीआरएस लेते थे तो वो बिल्कुल सही साबित होता था।

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