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Hindi Cricket News - आईसीसी ने एंटी-करप्शन कोड के तहत ओमान के क्रिकेटर पर सात साल का प्रतिबंध लगाया

  • ओमान के क्रिकेटर युसूफ अब्दुलरहीम अल बलूशी को आईसीसी ने दी बड़ी सजा
FEATURED WRITER
न्यूज़
Modified 25 Feb 2020, 11:41 IST

आईसीसी
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आईसीसी ने ओमान के क्रिकेटर युसूफ अब्दुलरहीम अल बलूशी को एंटी-करप्शन कोड के तहत सात सालों के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। अल बलूशी को एंटी-करप्शन कोड के चार आर्टिकल का हनन करने की वजह से दोषी पाया गया था और आधिकारिक सुनवाई के बाद उन्होंने अपनी गलती मान ली। आईसीसी ने अल बलूशी को दोषी पाने के बाद 23 जनवरी को अस्थायी तौर पर प्रतिबंधित किया था।

युसूफ अब्दुलरहीम अल बलूशी को निम्नलिखित आर्टिकल के साथ खिलवाड़ करने का दोषी पाया गया है -

आर्टिकल 2.1.1 - किसी ऐसे एग्रीमेंट के साथ जुड़ना जिससे मैच के परिणाम या और किसी तरह से मैच पर प्रभाव पड़े

आर्टिकल 2.1.4 - किसी और को आर्टिकल 2.1 के हनन के लिए उकसाना

आर्टिकल 2.4.4 - आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप क्वालीफ़ायर 2019 में उन्हें तीन अलग-अलग लोगों ने मैच फिक्स करने के लिए सम्पर्क किया, लेकिन इसकी जानकारी अल बलूशी ने नहीं दी

आर्टिकल 2.4.7 - दोषी पाए जाने के डर से एंटी-करप्शन यूनिट के इन्वेस्टीगेशन में जानबूझकर देरी करवाना, साथ ही इन्वेस्टीगेशन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों के साथ छेड़छाड़ करना, जिसके तहत एंटी-करप्शन कोड में उन्हें दोषी पाया जाए

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आईसीसी के अनुसार अगस्त 2019 में किसी व्यक्ति ने अल बलूशी से टी20 वर्ल्ड कप क्वालीफ़ायर के मैच को फिक्स करने के लिए सम्पर्क किया। उस व्यक्ति से अल बलूशी की जान-पहचान एक अरेबियन कार्निवाल लीग के दौरान हुई थी। इसके अलावा उस व्यक्ति ने अल बलूशी को ओमान के तीन और खिलाड़ियों से भी इस संदर्भ में बातचीत करने को कहा था। उसके बाद अल बलूशी ने उस व्यक्ति के दो एसोसिएट के साथ मुलाक़ात की, जिन्होंने उन्हें क्वालीफ़ायर में खेल रहे ओमान के कुछ खिलाड़ियों से सम्पर्क करने को कहा। अल बलूशी ने इस बात की जानकारी एंटी-करप्शन यूनिट को नहीं दी।

अल बलूशी ने जिस ओमनी क्रिकेटर को मैच फिक्स करने का ऑफर दिया, उन्होंने इसे ठुकरा दिया और एंटी-करप्शन यूनिट को इसकी जानकारी दी। एंटी-करप्शन यूनिट ने इसके बाद अल बलूशी से पूछताछ की और उससे पहले ही उन्होंने अपने मेसेज डिलीट कर दिए थे। अंत में आधिकरिक ट्रिब्यूनल सुनवाई के दौरान बलूशी ने अपनी गलतियों को माना और इसी वजह से उन्हें सिर्फ सात साल के लिए निलंबित किया, वरना सज़ा और लम्बी हो सकती थी।

Published 25 Feb 2020, 11:41 IST
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