Create
Notifications

IPL 2020 - 3 कारण क्यों दिनेश कार्तिक को कोलकाता नाइट राइडर्स की कप्तानी नहीं छोड़नी चाहिए थी

दिनेश कार्तिक
दिनेश कार्तिक
सावन गुप्ता
visit

आईपीएल के इस सीजन में कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम का प्रदर्शन अभी तक मिला-जुला रहा है। उन्होंने कुछ मैच जीते हैं तो कुछ मुकाबले हारे भी हैं और प्वॉइंट्स टेबल में चौथे पायदान पर हैं। हालांकि इन सबके बीच एक चौंकाने वाली खबर निकलकर सामने आई। दिग्गज बल्लेबाज दिनेश कार्तिक ने कोलकाता नाइट राइडर्स की कप्तानी छोड़ दी है।

दिनेश कार्तिक ने अपने साथी खिलाड़ी इयोन मोर्गन को कोलकाता नाइटराइडर्स की कप्तानी सौंप दी है। इयोन मोर्गन को कोलकाता नाइटराइडर्स का कप्तान बनाने की मांग उठती रही है। केकेआर का प्रदर्शन शुरुआती कुछ मैचों में अच्छा नहीं रहा था उस समय दिनेश कार्तिक की जगह मोर्गन को कप्तान बनाने की मांग उठी थी। मोर्गन ने दिनेश कार्तिक की कप्तानी की तारीफ भी की थी लेकिन अब स्थिति बदल गई है और दिनेश कार्तिक ने खुद ही कप्तानी से अलग होकर खेलने का फैसला करते हुए इयोन मोर्गन को यह जिम्मा सौंप दिया है।

ये भी पढ़ें: 3 खिलाड़ी जिन्हें आरसीबी को प्लेइंग इलेवन से बाहर कर देना चाहिए

दिनेश कार्तिक की कप्तानी इस सीजन खराब नहीं रही है। कोलकाता नाइटराइडर्स ने दिनेश कार्तिक की कप्तानी में इस सीजन अब तक 7 में से चार मुकाबले जीते हैं। अभी तक दिल्ली कैपिटल्स और मुंबई इंडियंस के अलावा अगर बाकी सभी टीमों से तुलना करें तो ये प्रदर्शन बेकार नहीं है। इसीलिए कार्तिक को कप्तानी नहीं छोड़नी चाहिए। ऐसा क्यों है आइए उसकी 3 वजहें हम आपको बताते हैं।

3 कारण क्यों दिनेश कार्तिक को केकेआर की कप्तानी नहीं छोड़नी चाहिए थी

3.इंडियन गेंदबाज ज्यादा होने से कम्यूनिकेशन की कमी

Photo Credit - IPL
Photo Credit - IPL

केकेआर की टीम में ज्यादातर गेंदबाज भारतीय हैं और इनमें से भी कई सारे युवा गेंदबाज हैं। केवल पैट कमिंस के रूप में ही एक विदेशी तेज गेंदबाज टीम में है। प्रसिद्ध कृष्णा, शिवम मावी और कमलेश नागरकोटी जैसे युवा गेंदबाजों को शायद इयोन मोर्गन के साथ बातचीत करने और आपसी तालमेल बिठाने में ज्यादा दिक्कत हो।

दिनेश कार्तिक के कप्तान होने से ये खिलाड़ी आसानी से अपनी बात कह सकते हैं क्योंकि एक भारतीय कप्तान होने से युवा खिलाड़ी ज्यादा सहज रहते हैं।

2.लगातार कप्तान बदलने से टीम को नुकसान होने का डर

Photo Credit - IPL
Photo Credit - IPL

दिनेश कार्तिक ने 2018 में केकेआर की कप्तानी संभाली थी। अपनी कप्तानी में 2 बार टीम को चैंपियन बनाने वाले गौतम गंभीर उस सीजन दिल्ली की टीम में चले गए थे और उसके बाद दिनेश कार्तिक को कप्तान बनाया गया था।

दिनेश कार्तिक ने उस सीजन टीम को प्लेऑफ तक पहुंचाया था और एक बल्लेबाज के तौर पर 49 से ज्यादा की औसत और 147 से ज्यादा की स्ट्राइक रेट से 498 रन बनाए थे। इस सीजन भी उन्होंने उपयोगी पारियां खेली हैं। जब कोई कप्तान अपनी टीम को प्लेऑफ तक पहुंचाए तो उसे कुछ सीजन कप्तानी का मौका जरुर मिलना चाहिए। जल्दी-जल्दी कप्तान बदलने से टीम का संतुलन कभी सही नहीं बन पाता है। किंग्स इलेवन पंजाब की टीम इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

1.बीच सीजन कप्तान बदलने से ड्रेसिंग रूम में पैनिक का माहौल

Photo Credit - IPL
Photo Credit - IPL

जब किसी टीम का कप्तान बीच सीजन में ही कप्तानी छोड़ दे तो इससे लगता है कि उस टीम में सबकुछ सही नहीं है। भले ही वो टीम प्वॉइंट्स टेबल में टॉप-4 में ही क्यों ना हो। दिनेश कार्तिक के कप्तानी छोड़ने से केकेआर की टीम में भी सभी खिलाड़ियों के अंदर असुरक्षा की भावना जगी होगी और ये किसी भी टीम के लिए अच्छा संकेत नहीं होता है। इसकी वजह से टीम का प्रदर्शन और भी खराब हो जाता है।

Edited by सावन गुप्ता
Article image

Go to article

Quick Links:

More from Sportskeeda
Fetching more content...
App download animated image Get the free App now