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भारत के दोनों वन-डे वर्ल्ड कप जीतने के पैटर्न पर एक नज़र

ANALYST
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2.32K   //    24 May 2019, 10:17 IST

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वर्ल्ड कप का 12वां संस्करण 30 मई से इंग्लैंड और वेल्स में खेला जाएगा। इस टूर्नामेंट में विश्व की 10 सर्वश्रेष्ठ टीमें भाग ले रही हैं। भारतीय टीम भी अपना तीसरा वर्ल्ड कप खिताब जीतने के उद्देश्य से इंग्लैंड पहुंच चुकी है। इस टीम की कप्तानी विराट कोहली कर रहे हैं साथ ही वर्ल्ड कप 2011 विजेता टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी इस टीम का हिस्सा हैैं।

वर्ल्ड कप का तीसरा संस्करण (1983) भारतीय टीम के लिए बहुत यादगार रहा। क्योंकि इसी संस्करण में भारतीय टीम ने शुरुआती लगातार दो संस्करणों की विजेता रह चुकी वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार वर्ल्ड कप का खिताब जीता था। उस समय भारतीय टीम के कप्तान कपिल देव हुआ करते थे। इसके 28 साल बाद साल 2011 में फिर ऐसा मौका आया जब भारतीय टीम ने महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में वर्ल्ड कप का खिताब जीता।

आज हम बात करने जा रहे हैं भारतीय टीम के दोनों वर्ल्ड कप (1983 और 2011) का खिताब जीतने का पैटर्न कैसा रहा और दोनों में क्या समानताएं रही।

#1. अच्छी सलामी जोड़ी और नंबर 3 बल्लेबाजी:

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वर्ल्ड कप 1983 में सुनील गावस्कर और 2011 में सचिन तेंदुलकर बड़े नाम थे, जो सलामी बल्लेबाज थे। सबसे बड़ी बात कि ये दोनों मुम्बई के ही थे। दोनों ही बल्लेबाज तकनीक के साथ बल्लेबाजी करने के लिए मशहूर थे। 1983 में क्रिस श्रीकांत और 2011 में वीरेंदर सहवाग हार्ड हिटर सलामी बल्लेबाज थे। इसके अलावा नंबर 3 पर बल्लेबाजी के लिए फाइनल में मोहिंदर अमरनाथ (1983) और गौतम गंभीर (2011) थे। दोनों ही खिलाड़ी दिल्ली के थे। दोनों ही वर्ल्ड कप में सलामी बल्लेबाजी में तकनीक और उग्र बल्लेबाजी का शानदार मिश्रण था। यदि सलामी बल्लेबाज फ्लॉप साबित हुए तो नंबर 3 पर अच्छा बल्लेबाज था जो स्कोरबोर्ड पर रन बढ़ा सकता था।

नोट: दोनों ही वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने 4 लीग मैच जीते थे और फाइनल मुकाबला शनिवार को खेला गया था।

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