"एक दिन मैंने ड्रेसिंग रूम में बल्‍ला फेंका और स्‍टेडियम से बाहर चला गया", संजू सैमसन ने याद किया सबसे निराशाजनक पल

संजू सैमसन ने बताया कि उन्‍होंने एक समय क्रिकेट छोड़कर घर लौटने का मन बना लिया था
संजू सैमसन ने बताया कि उन्‍होंने एक समय क्रिकेट छोड़कर घर लौटने का मन बना लिया था

संजू सैमसन (Sanju Samson) आईपीएल 2022 (IPL 2022) में राजस्‍थान रॉयल्‍स (Rajasthan Royals) की कप्‍तानी कर रहे हैं। टीम ने सैमसन के नेतृत्‍व में अब तक अच्‍छा प्रदर्शन किया है। रॉयल्‍स ने अब तक 10 मैच खेले, जिसमें 6 जीत के साथ टीम अंक तालिका में तीसरे स्‍थान पर है।

संजू सैमसन ने सोमवार को कोलकाता नाइटराइडर्स के खिलाफ अर्धशतक जमाया, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। संजू सैमसन की कोशिश मौजूदा आईपीएल में दमदार प्रदर्शन करके इस साल टी20 वर्ल्‍ड कप के लिए भारतीय टीम में अपनी जगह पक्‍की करने की है।

सैमसन हाल ही में ब्रेकफास्‍ट विथ चैंपियंस शो में आए, जहां उन्‍होंने अपने करियर के निराशाजनक पल को याद किया। उन्‍होंने बताया कि बहुत ही कम उम्र में उनका भारतीय टीम में चयन हो गया था, लेकिन फिर वो करीब पांच साल तक राष्‍ट्रीय टीम से बाहर रहे। सैमसन ने बताया कि वो पांच साल उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहे और एक समय तो ऐसा भी आया जब उन्‍हें केरल की राज्‍य टीम से भी बाहर कर दिया गया था।

शो के होस्‍ट गौरव कपूर से बातचीत करते संजू ने कहा, 'मैंने भारत के लिए जब डेब्‍यू किया तब मेरी उम्र 19 या 20 साल थी। फिर 25 साल की उम्र में मुझे दोबारा राष्‍ट्रीय टीम में मौका मिला। वो पांच मेरे लिए सबसे चुनौतीपूर्ण थे। मैं केरल टीम से भी जगह खो बैठा था। आप फिर खुद पर बहुत शक करते हो। मेरे मन में चल रहा था कि संजू तू वापसी कर पाएगा। अगर आप वास्तिवक और ईमानदार हो तो इन चीजों से गुजरते हो।'

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सैमसन ने एक ऐसी ही घटना याद की जब उन्‍होंने गुस्‍से में ड्रेसिंग रूम में अपना बल्‍ला तोड़ दिया था और फिर मैच बीच में छोड़कर स्‍टेडियम से बाहर चले गए थे। रॉयल्‍स के कप्‍तान ने कहा, 'मैं ब्रेबोर्न स्‍टेडियम पर खेल रहा था। आउट हुआ तो निराश होकर ड्रेसिंग रूम लौटा। वहां अपना बल्‍ला तोड़ा और स्‍टेडियम से बाहर चला गया। तब मैच चल रहा था। मैं सोच रहा था कि क्रिकेट छोड़कर घर बैठूं। मैं केरल लौट जाता हूं।'

उन्‍होंने आगे कहा, 'मैं मरीन ड्राइव चला गया और समुंदर को देखने लगा। मैं सोच रहा था कि हो क्‍या रहा है। मैं वहां करीब तीन-चार घंटे बैठा। फिर रात में लौटा। मैंने अपने बल्‍ले को देखा। वो बहुत अच्‍छा बल्‍ला था। मुझे उसको तोड़ना बहुत बुरा लगा। मैं सोच रहा था कि काश मैंने बल्‍ला तकिया पर मारा होता तो बल्‍ला नहीं टूटता।'

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Edited by Vivek Goel
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