ICC के नए रेवेन्यू डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल पर PCB ने जताई आपत्ति, चेयरमैन बड़ी वजह से नहीं देंगे मंजूरी

सेठी ने ICC के इस वितरण मॉडल पर अधिक स्पष्टता की मांग की है।
सेठी ने ICC के इस वितरण मॉडल पर अधिक स्पष्टता की मांग की है।

ईएसपीएन क्रिकइंफो की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने आईसीसी (ICC) के प्रस्तावित आय वितरण मॉडल के साथ अपनी असंतुष्टि जाहिर की है। यह मॉडल अभी तक फाइनल नहीं हुआ है, लेकिन यह अपना अंतिम रुप लेने के करीब है। इसे जून तक मंजूरी प्राप्त होने की उम्मीद है, जिसके बाद यह आधिकारिक रूप से ICC की AGM में जुलाई में अपनाया जाएगा। लेकिन PCB के वर्तमान प्रमुख, नजम सेठी (Najam Sethi) ने कहा है कि उनका बोर्ड इस मॉडल को मंजूरी नहीं देगा, जब तक उसे इसके पीछे की कार्यप्रणाली के अधिक विवरणों के साथ पेश किया नहीं जाता।

नजम सेठी ने Reuters से बात करते हुए कहा,

हम ICC से इसे बताने की मांग कर रहे हैं कि ये आंकड़े कैसे निर्धारित हुए हैं। हम मौजूदा स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं। जून में बोर्ड इस वित्तीय मॉडल को मंजूरी दे सकता है, पर यदि हमें ये विवरण प्रदान नहीं किए जाते हैं, तो हम इसे मंजूर नहीं करेंगे। सिद्धांत में, भारत को अधिक मिलना चाहिए, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन यह तालिका कैसे विकसित हो रही है?

बीसीसीआई को मिलेंगे 230 मिलियन डॉलर के करीब

इस नये प्रस्तावित रेवेन्यू डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल में आईसीसी दुनिया के 5 अलग क्षेत्रों में मीडिया राइट्स को बेच कर 600 मिलियन डॉलर की सालाना कमाई करेगी, जिसमें इस कमाई का 38.5 फिसदी हिस्सा BCCI को दिया जाने की उम्मीद है, जो कि 230 मिलियन डॉलर के करीब होगा।

इस मॉडल में भारत के बाद सबसे ज़्यादा कमाई करने वाला क्रिकेट बोर्ड ईसीबी होगा। ECB कुल कमाई का 6.89 फ़ीसदी का हिस्सा कमा सकता है जो कि 41.33 मिलियन डालर सालाना होगा। इसके बाद क्रिकेट ऑस्ट्रलिया को 6.25 फ़ीसदी का सालाना हिस्सा मिलेगा जो 37.5 मिलियन डालर के करीब होगा। वहीं के पाकिस्तान के पास आईसीसी के कुल आय का 5.75 फ़ीसदी हिस्सा जा सकता है जो सालाना 34.51 मिलियन डालर होगा। वहीं बाकी देशों को इस नए मॉडल में ICC की आय का 5 फ़ीसदी से कम का हिस्सा मिलेगा।

बता दें कि ICC की इस आय वितरण प्राणली का मापदंड देशों के क्रिकेट इतिहास, पिछले 16 सालों में आईसीसी इवेंट में महिला और पुरुष क्रिकेट का प्रदर्शन, आईसीसी के वाणिज्यिक राजस्व में उनका योगदान, और पूर्ण सदस्य होने से जुड़े हैं

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