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ऑस्ट्रेलिया-भारत पर्थ टेस्ट: 10 साल पहले हासिल की गई ऐतिहासिक जीत पर एक नज़र

पर्थ में जीत हासिल करने के बाद भारतीय टीम
Rahul Sharma
SENIOR ANALYST
Modified 13 Dec 2018, 18:55 IST
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साल 2008, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज की शुरुआत मेलबर्न टेस्ट से हुई। बॉक्सिंग-डे टेस्ट में भारत को हार मिली पहले मुकाबले में मिली हार के बाद भारतीय टीम वापसी करना चाहती थी लेकिन दूसरे टेस्ट में भारतीय टीम को अंपायर व मेजबानों के खराब रवैये के कारण हार का सामना करना पड़ा। सिडनी टेस्ट भारतीय क्रिकेट के इतिहास का सबसे खराब टेस्ट रहा। अंपायरों द्वारा खराब फैसले और हरभजन व सायमंड्स के बीच हुआ मंकी गेट विवाद, इन सभी मनमानी और विवादों के कारण सिडनी टेस्ट ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी थी। भारतीय टीम सीरीज में 2-0 से पीछे चल रही थी और टेस्ट सीरीज का तीसरा टेस्ट विश्व की सबसे खतरनाक पिच, पर्थ के वाका स्टेडियम की पिच पर खेला जाना था। भारतीय टीम के सामने इस टेस्ट मैच को जीत कर सीरीज में वापसी करने का मौका था और साथ ही मेजबानों द्वारा खेली गई खराब क्रिकेट का बदला लेना भी जरुरी हो गया था।

पहली पारी में सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ ने भारतीय टीम का परचम लहराया, तो गेंदबाजी में इरफ़ान पठान, आरपी सिंह, युवा गेंदबाज इशांत शर्मा के साथ कप्तान अनिल कुम्बले ने ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 212 रनों पर समेटने में अपना अहम योगदान दिया। भारत की दूसरी पारी में जहाँ सभी बल्लेबाज नाकाम रहे, तो वीवीएस लक्ष्मण एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया के लिए मुसीबत बनकर सामने आये। आखिरी पारी में गेंदबाजों ने फिर से शानदार प्रदर्शन दिखाया लेकिन एक समय पर लग रहा था कि टीम पर हार का दबाव बन गया है, तो कप्तान कुंबले ने सहवाग के रूप में अपना तुरुप का इक्का फेंका, जिन्होंने 2 महत्वपूर्ण विकेट लेते हुए भारत की जीत सुनिश्चित कर दी। भारतीय टीम की पर्थ में रची गई शानदार जीत पर एक नजर डालते हुए याद करते हैं उस मैच को जिसमें सभी खिलाड़ियों ने अपना अहम योगदान दिया और टीम को विजयी बनाया।

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Published 13 Dec 2018, 18:55 IST
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