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सौरव गांगुली, एमएस धोनी और विराट कोहली की नेतृत्व क्षमता का विश्लेषण

फ़ीचर
1.48K   //    31 Oct 2018, 16:15 IST

Image result for सौरव गांगुली, एमएस धोनी और विराट कोहली की कप्तान के बीच अंतर

किसी भी टीम की सफलता में कप्तान बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मैदान पर लिए हुए उसके फैसले किसी भी मैच का परिणाम बदल सकते हैं।

यह कप्तान की ज़िम्मेदारी है कि वह अपने खिलाड़ियों, विशेष रूप से टीम के युवा खिलाड़ियों में आत्मविश्वास पैदा करे। इसके अलावा, एक कप्तान को खिलाड़ियों के फॉर्म में ना होने की स्थिति में भी उनका साथ देना चाहिए। ऐसे में सौरव गांगुली, एमएस धोनी और टीम इंडिया के वर्तमान कप्तान विराट कोहली के नेतृत्व कौशल का विश्लेषण करना दिलचस्प होगा।

तो आइये इन तीनों कप्तानों के नेतृत्व कौशल का विश्लेषण करते हैं:

सौरव गांगुली

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2000 के दशक के आरंभ में भारतीय टीम की कप्तानी करने वाले सौरव गांगुली ने टीम को विदेशी परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करने का विश्वास दिलाया। उन्होंने वीरेंदर सहवाग, युवराज सिंह, हरभजन सिंह और जहीर खान जैसे खिलाड़ियों के करियर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

गांगुली ने आक्रामक तरीके से टीम का नेतृत्व किया और हमेशा युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गांगुली के पास महान कप्तानों की तरह दूरदृष्टि थी। गांगुली ने हर खिलाड़ी को अपने कौशल का प्रदर्शन करने के लिए पर्याप्त अवसर दिए। 

इंग्लैंड के खिलाफ ऐतिहासिक नेटवेस्ट सीरीज़ जीतने के बाद उनके नेतृत्व में भारत ने बीस साल बाद विश्वकप 2003 के फाइनल में प्रवेश किया था। सही मायनों में सौरव गांगुली ने भारत को दुनिया की नंबर 1 टीम बनाने की नींव रखी थी।  

कप्तान के तौर पर रिकॉर्ड: 

वनडे मैच: 146, जीत: 76, हार: 65, टाई: 5, जीत %: 53.90 

टेस्ट मैच: 49, जीत: 21, हार: 13, ड्रा: 15, जीत %: 42.50

एमएस धोनी 

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एमएस धोनी को 2007 में टी-20 विश्व कप के लिए भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गई और उन्होने अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय करते हुए भारत को पहली बार टी-20 प्रारूप में विश्व विजेता बनाया था। 

बाद में, धोनी के नेतृत्व में भारत ने 2011 में विश्व कप और 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी भी जीती। 2011 के विश्व कप फाइनल में धोनी नंबर 5 पर बल्लेबाज़ी करने उतरे और अंत तक टिके रहे। उन्होंने ही विजयी छक्का लगाकर भारत को 28 साल बाद विश्व विजेता बनाया था। उनका युवराज सिंह से पहले बल्लेबाज़ी करने के लिए उतरना एक साहसिक फैसला था। धोनी के पास नेतृत्व करने का नैसर्गिक गुण था। मैच में दबाव के क्षणों में भी शांत रहना और सटीक फैसले लेने जैसे गुण उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों की सूची में ला खड़ा करते हैं। 

कप्तान के तौर पर धोनी मैदान पर कभी अपनी प्रतिक्रिया नहीं देते थे। भले ही वह खुद के भीतर दबाव महसूस कर रहे हों लेकिन उन्होंने कभी भी खिलाड़ियों पर इसे ज़ाहिर नहीं होने दिया। मैच के दौरान मैदान पर धोनी की फील्ड प्लेसमेंट और गेंदबाज़ी बदलाव हमेशा देखने लायक होते थे और उन्हें पता होता था कि विपक्षी बल्लेबाज़ की कमज़ोरी क्या है। धोनी एकमात्र कप्तान हैं जिन्होंने भारत को आईसीसी के तीनों प्रमुख टूर्नामेंट जिताये हैं लेकिन धोनी ने हमेशा पूरी टीम को जीत का श्रेय दिया है।

कप्तान के तौर पर रिकॉर्ड: 

वनडे मैच: 200, जीत: 110, हार: 74, टाई: 5, कोई परिणाम नहीं:11, जीत %: 59.52

टेस्ट मैच: 60, जीत: 27, हार: 18, ड्रा: 15, जीत %: 45.00

टी-20 मैच: 72, जीत: 41, हार: 28, टाई: 1, कोई परिणाम नहीं: 2, जीत %: 59.28

विराट कोहली

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टीम इंडिया के वर्तमान कप्तान विराट कोहली इस समय टीम को नई ऊंचाईयां प्रदान करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने अपनी आक्रमकता और जोशीले अंदाज़ से टीम में नई जान फूंकने का काम किया है। कोहली में हमेशा हमें जीत की भूख देखने को मिलती है और वह टीम को हर हाल में जीतता देखना चाहते हैं। इस समय कोहली ज़बरदस्त फॉर्म में हैं और वह वर्तमान समय में टेस्ट और वनडे प्रारूप में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ हैं। पिछले कुछ सालों से उन्होंने पूरी टीम के बल्लेबाज़ी स्तर को ऊँचा उठाने का काम किया है। 

हालांकि, विराट कोहली अक्सर मैदान पर अपना आपा खो बैठते हैं जिससे खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस मामले में उन्हें पूर्व कप्तान एमएस धोनी से सीखने की ज़रूरत है। लेकिन दूसरी तरफ, कोहली ने कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल जैसे युवा खिलाड़ियों पर भरोसा दिखाया है। अब यह दोनों कलाई स्पिनर भारत की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और भारतीय टीम का नियमित हिस्सा हैं।

इसके अलावा भारतीय टीम में नंबर 4 पर बल्लेबाज की तलाश अंबाती रायडू पर आकर ख़त्म हुई है। कोहली ने लगातार उन पर भरोसा दिखाया और रायडू ने अपने कप्तान के भरोसे को टूटने नहीं दिया। अगले साल होने वाले विश्व कप में रायडू महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वहीं बाएं हाथ के युवा तेज़ गेंदबाज़ खलील अहमद टीम इंडिया की नई खोज साबित हुए हैं, जिसका श्रेय भी भारतीय कप्तान को ही जाता है।  

विराट कोहली का टीम संयोजन संतुलित है और क्रिकेट प्रशंसकों को कप्तान कोहली से एक बार फिर से भारत को विश्व विजेता बनाने की उम्मीद होगी।

कप्तान के तौर पर रिकॉर्ड: 

वनडे मैच: 56, जीत: 41, हार: 12, टाई:1, जीत %: 75.45

टेस्ट मैच: 42, जीत: 24, हार: 9, ड्रा: 9, जीत %: 57.14

टी-20 मैच: 17, जीत: 11, हार: 6, जीत %: 64.70

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