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"क्रिस सिल्वरवुड और जो रूट के लिए मेरे मन में बहुत सहानुभूति है", इंग्लैंड के दिग्गज गेंदबाज का बड़ा बयान 

स्टुअर्ट ब्रॉड ने कप्तान और कोच को लेकर दी प्रतिक्रिया
स्टुअर्ट ब्रॉड ने कप्तान और कोच को लेकर दी प्रतिक्रिया

एशेज सीरीज में इंग्लैंड की करारी हार के बाद कप्तान जो रुट (Joe Root) और कोच सिल्वरवुड को हटाया जा सकता है। इन दोनों को लेकर टीम के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड (Stuart Broad) ने भी प्रतिक्रिया दी है। उनका भी मानना है कि इन दोनों के ही सामने अपने पदों को बचाने की चुनौती है। हालांकि उन्होंने प्लेइंग इलेवन और कोचिंग स्टाफ में निरंतरता की कमी के कारण अपने कप्तान और मुख्य कोच के प्रति सहानुभूति व्यक्त की।

एशेज में इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर 4-0 से करारी हार का सामना करना पड़ा। इस दौरान टीम के कुछ फैसलों और चयन नीति को लेकर काफी सवाल उठे। बुरी तरह हारने के बाद कई दिग्गजों ने रुट और सिल्वरवुड को हटाए जाने की मांग की है।

द डेली मेल के लिए अपने कॉलम में ब्रॉड ने लिखा,

जो रूट और क्रिस सिल्वरवुड दोनों के लिए प्लेइंग इलेवन या कोचिंग स्टाफ में निरंतरता प्राप्त करना अविश्वसनीय रूप से कठिन रहा है, और इससे चीजों को लागू करना कठिन हो जाता है जिन्हें आप टीम में लाने की कोशिश कर रहे हैं।
मुझे उन दोनों के लिए बहुत अधिक सहानुभूति है। अपने जीवनकाल में, मैंने कप्तान और कोच के तौर पर इतने मुश्किल दो साल किसी के नहीं देखे।

स्टुअर्ट ब्रॉड को भी एशेज के दौरान कुछ मैचों में बाहर बैठना पड़ा था और उन्होंने उस समय निराशा भी व्यक्त की थी।

ऑस्ट्रेलिया में जीत के लिए इंलिश टीम को सर्वश्रेष्ठ होने की जरूरत है - स्टुअर्ट ब्रॉड

स्टुअर्ट ब्रॉड ने कहा कि इंग्लैंड की तुलना में ऑस्ट्रेलिया की टीम ज्यादा संतुलित थी। 35 वर्षीय गेंदबाज ने कहा कि 1986-87 और 2010-11 में उनके विजयी अभियानों में इंग्लैंड की सेटल टीम थी और ऑस्ट्रेलिया कमजोर था। उन्होंने कहा,

दिन के अंत में, हम इंग्लिश खिलाड़ी पर्याप्त रूप सेअच्छे नहीं थे; ऑस्ट्रेलिया हमसे बेहतर टेस्ट टीम है। ऑस्ट्रेलिया में जीतने के लिए, इंग्लैंड टीम को अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की आवश्यकता है।
1986-87 और 2010-11 दोनों में यही हुआ। उन वर्षों में, ऑस्ट्रेलिया अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी लाइन-अप को बदल रहा था, और इंग्लैंड के पास अपनी सर्वश्रेष्ठ टीम थी। दुर्भाग्य से, इस सीरीज में किसी का भी समर्थन नहीं मिला।

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Edited by Prashant Kumar
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