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"वास्‍तव में चाहते हैं कि मुजीब उर रहमान को फिजियो सपोर्ट उपलब्‍ध कराएं", रविचंद्रन अश्विन का अजब बयान

रविचंद्रन अश्विन ने अफगानिस्‍तान के जीतने की कामना की
रविचंद्रन अश्विन ने अफगानिस्‍तान के जीतने की कामना की
Vivek Goel

रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) ने मजाक में कहा कि यह अच्‍छा होता कि भारत (India) अफगानिस्‍तान (Afghanistan Cricket team) के स्पिनर मुजीब उर रहमान (Mujeeb Ur Rahman) को फिजियो समर्थन दिला पाती ताकि वो न्‍यूजीलैंड (New Zealand Cricket team) के खिलाफ मैच के लिए उपलब्‍ध रहते। अश्विन ने यह बयान इस आधार पर दिया कि भारतीय टीम को सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए अन्‍य मैचों के नतीजों पर निर्भर रहना होगा।

अफगानिस्‍तान के खिलाफ मैच में जीत दर्ज करने के बाद सेमीफाइनल की रेस में बनी भारतीय टीम के बारे में बात करते हुए अश्विन ने कहा, 'टीम में इस बात पर विचार हुआ कि कुछ मैच बचे हैं, तो हम कैसे खेलेंगे। हर कोई योजना बना रहा है और आखिरी दो मैचों में बहुत बड़ा कुछ करना चाह रहा है। हमारे हाथ में इसके अलावा कुछ और नहीं है। हम बस अपना प्रयास कर रहे हैं।'

भारत के आगे बढ़ने के लिए न्‍यूजीलैंड का अफगानिस्‍तान या नामीबिया से हारना जरूरी है। भारत को अपना नेट रन रेट भी सुधारने की जरूरत है। अफगानिस्‍तान से उम्‍मीद है कि वह न्‍यूजीलैंड को मात दे सकती है। अश्विन ने उन्‍हें शुभकामना दी है।

अश्विन ने कहा, 'यह मजेदार खेल है और अफगानिस्‍तान ने अच्‍छी क्रिकेट खेली है और हमारी कई उम्‍मीदें उनसे जुड़ी हुई हैं। तो उन्‍हें ढेरों शुभकामनाएं। मैं वाकई चाहता हूं कि मुजीब उर रहमान को हम फिजियो सपोर्ट दे सके। ताकि वो मैदान पर उतर सके। हम बस यही उम्‍मीद कर सकते हैं।'

मुजीब उर रहमान चोट के कारण भारत और नामीबिया के खिलाफ मैच में खेल नहीं सके थे।

परिवार ने बायो-बबल में बड़ी भूमिका निभाई: अश्विन

भारतीय क्रिकेटर्स का कार्यक्रम कड़ा रहा है। इंग्‍लैंड दौरे के बाद इंडियन प्रीमियर लीग और फिर टी20 वर्ल्‍ड कप। कोविड-19 महामारी के कारण खिलाड़‍ियों को बायो-सुरक्षित बबल में रहना पड़ रहा है।

बबल जिंदगी और परिवार की जिम्‍मेदारी के बारे में बात करते हुए अश्विन ने कहा, 'निश्चित ही परिवार बड़ी भूमिका निभाता है। कुछ लोग दुबई में रहते हैं। मेरे दोस्‍त और करीबी, उन्‍हें बबल की जिंदगी नहीं मिलती। वो अब भी मानते हैं कि बबल का मतलब हमें होटल में रहना होता है और हम खेल खेलते हैं और वो मिलना चाहते हैं। हमें अन्‍य लोगों को बिलकुल भी देखने का मौका नहीं मिलता है।'

अश्विन ने आगे कहा, 'हमें अपने में रहना होता है। हमें कमरों में रहना पड़ता है। ऐसा माहौल बनाना पड़ता है जहां हम एक-दूसरे से बातचीत कर सके, कुछ टीम निर्माण वाले खेल खेल सके और पिछले 8-10 महीनों से हम यही कर रहे हैं।'


Edited by Vivek Goel

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