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डाइजेस्टिव सिस्टम सिंड्रोम से पीड़ित हैं 30 फीसदी भारतीय - Digestive System Syndrome se pidit hai 30 fisdi bhartiya

डाइजेस्टिव सिस्टम सिंड्रोम से पीड़ित हैं 30 फीसदी भारतीय
डाइजेस्टिव सिस्टम सिंड्रोम से पीड़ित हैं 30 फीसदी भारतीय
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Ritu Raj
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इन दिनों लोग अपने काम में इतना ज्यादा बिजी हो गए हैं कि वो एक्सरसाइज (Exercise) करना तो दूर सही से खान-पान नहीं कर पाते। जिसके चलते आगे चलकर कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही ऑफिस के चेयर पर घंटों लगातार बैठने से भी पेट संबंधी कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। भारत में डाइजेस्टिव सिस्टम सिंड्रोम के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं और इससे 30 फीसदी लोग पीड़ित हैं।

भारत में 30 फीसदी लोग डाइजेस्टिव सिस्टम सिंड्रोम से पीड़ित (30% of people in India suffer from Digestive System Syndrome)

भारत में बच्चे सहित 30 प्रतिशत लोग मोटापे का शिकार हैं। पाचन तंत्र सिंड्रोम में तोंद निकलना, हाई ट्राईग्लेसाईड, लो कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और हाई शुगर प्रमुख हैं। पुरुषों में 90 सेंटीमीटर से ज्यादा पेट का घेरा और महिलाओं में 80 सेंटीमीटर से ज्यादा इस बात का संकेत है कि वह दिल के दौरे के खतरे की जद में हैं।

कद बढ़ना बंद होने के बाद रुक जाता है दूसरे अंगों का विकास (After the growth stops the development of other organs also stops)

सामान्य वजन मोटापा एक नई समस्या सामने आई है। कई व्यक्ति तो वजन संतुलित होने के बाद भी इससे पीड़ित हैं। पेट के इर्द-गिर्द एक इंच अतिरिक्त चर्बी आपके दिल के रोगों का खतरा डेढ़ गुना बढ़ा देती है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (Indian Medical Association- IMA) के अध्यक्ष केके अग्रवाल का कहना है कि, आमतौर पर जब कद बढ़ना बंद हो जाता है तो दूसरे अंगों का विकास भी रुक जाता है। दिल, गुर्दे और फेफड़ों का वजन उसके बाद नहीं बढ़ता। उसके बाद मांसपेशियां ही बनती हैं। उसके बाद शरीर का वजन केवल चर्बी जमा होने से बढ़ता है।

इतने साल के बाद नहीं बढ़ना चाहिए वजन (Weight should not increase after 20 years)

इसके अलावा उनका मानना है कि, यौवन के शुरुआत के बाद जितना भी वजन बढ़ता है चर्बी के चलते बढ़ता है। इस तरह कुल वजन तो सामान्य हो सकता है, लेकिन यह अतिरिक्त वजन उस व्यक्ति के लिए असामान्य भी हो सकता है। 20 साल के बाद लड़कों और 18 साल के बाद लड़कियों का वजन पांच किलो से ज्यादा नहीं बढ़ना चाहिए।

वजन पर नियंत्रण जरूरी (weight control is essential)

IMA अध्यक्ष का कहना है कि, पेट का मोटापा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट के सेवन से जुड़ा हुआ है न कि मांस से प्राप्त चर्बी से। सामान्य मोटापा मीट की चर्बी से होता है। सफेद चावल, मैदा और चीनी रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट में आते हैं। ब्राउन शुगर, वाइट शुगर से बेहतर होती है। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट बुरे काबोहाइड्रेट्स होते हैं और मीट की चर्बी बुरी चर्बी होती है। ट्रांस फैट और वनस्पति घी सेहत के लिए बुरा होता है। ट्रांस फैट बुरे कोलेस्ट्रोल को बढ़ाता है और अच्छे को कम करता है। वजन कम होने से खर्राटे कम होते हैं, आर्थराइटिस का दर्द कम होता है, ब्लड प्रेशर और अनियंत्रित डायबिटीज नियंत्रित होते हैं।

इन बीमारियों का रहता है खतरा (There is a risk of these diseases)

हाइपरटेंशन और हाई कोलेस्ट्रॉल, जो गंभीर दिल के रोगों का कारण हैं।

सांस के विकार, स्लीप एपनिया और अस्‍थमा।

शरीर में ग्लूकोज सहनशीलता का असंतुलन और इंसुलिन प्रतिरोधात्मकता।

जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों और हड्डियों के विकार।

लीवर में सूजन और दिल की जलन और सामाजिक हीन भावना, आत्म-विश्वास में कमी और लगातार तनाव बढ़ते रहता है।

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।


Edited by Ritu Raj
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