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पुरुषों से ज्यादा महिलाएं क्यों होती हैं थायराइड की शिकार, जानिएं कारण : Womens Are The Victims Of Thyroid More Than Men

पुरुषों से ज्यादा महिलाएं क्यों होती हैं थायराइड की शिकार, जानिएं कारण (फोटो - sportskeedaहिन्दी)
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Vineeta Kumar
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पुरुषों की तुलना में महिलाओं में आयोडीन की कमी और थायरॉयड रोग दोनों होने की संभावना अधिक होती है। ऐसा माना जाता है कि ग्रह की हर तीसरी महिला को इस समस्या का सामना करना पड़ता है।

पुरुषों से ज्यादा महिलाएं क्यों होती हैं थायराइड की शिकार, जानिएं कारण : Women Are The Victims Of Thyroid More Than Men In Hindi

रिपोर्ट के अनुसार, देश के पूर्वी जोन में हाइपोथायरॉइडिज्म का मंद रूप सबक्लिनिकल हाइपोथॉयराइडिज्म अधिक प्रचलित है। वहीं, उत्तरी भारत में हाइपोथायरॉइडिज्म के अधिकतम मामले दर्ज किए गए, जबकि दक्षिणी और पश्चिमी जोन में हाइपरथायरॉइडिज्म एवं इसके विभिन्न प्रकार अधिक संख्या में पाए गए।

इस मौके पर एसआरएल डायग्नोस्टिक्स के प्रेसिडेंट टेक्नोलॉजी एवं मेंटर (क्लिनिकल पैथोलॉजी) डॉ.अविनाश फड़के ने बताया, "आंकड़े दर्शाते हैं कि थॉयरॉइड से जुड़े किस तरह के विकार देश भर के लोगों में मौजूद हैं। सबक्लिनिकल हाइपोथायरॉइडिज्म देश में थॉयराइड का सबसे आम विकार है, जिसका निदान बिना चिकित्सकीय जांच के संभव ही नहीं है।

प्रिवेंटिव हेल्थ चेक के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है और इन्हीं परीक्षणों में यह तथ्य सामने आया कि बहुत से सामान्य एवं स्वस्थ दिखने वाले लोग सबक्लिनिकल हाइपोथायरॉइडिज्म से पीड़ित हैं। असामान्यताओं के ये आंकड़े अपने उच्चतम स्तर पर हो सकते हैं, क्योंकि पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं की राष्ट्रीय डायग्नोस्टिक चेन होने के नाते एसआरएल हाइपो एवं हाइपर थायरॉइड के मरीजों को विस्तार से पूरी जानकारी देता है। इस प्रकार रोग की शुरुआत में ही मरीजों को जागरूक बनाता है।

थायरॉइड की बीमारी आमतौर पर महिलाओं में पाई जाती है और कई तरह की समस्याएं पैदा करती हैं, जैसे वजन बढ़ना, हॉर्मोनों का असंतुलन आदि। पुरुष भी इसका शिकार हो सकते हैं, हालांकि महिलाओं की तुलना में उनके इस रोग से पीड़ित होने की संभावना कम होती है।

अल्पसक्रिय थायरॉइड के लक्षण पुरुषों और महिलाओं में एक ही तरह के होते हैं। जैसे कमजोरी, वजन बढ़ना, अवसाद और कॉलेस्ट्रोल का ऊंचा स्तर। इसके अलावा, पुरुषों में आमतौर पर कुछ अन्य लक्षण भी होते हैं जैसे बाल झड़ना, पेशियों की क्षमता में कमी, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन और यौनेच्छा में कमी।

रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार पुरुषों में थायरॉइड विकार की संभावना महिलाओं की तुलना में 8 गुना कम होती है, लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं कि वे इस खतरे से पूरी तरह सुरक्षित हैं। हालांकि जल्दी निदान एवं उपचार इसमें कारगर साबित हो सकता है। इसके अलावा थायरॉइड हॉर्मोन रिप्लेसमेन्ट एक सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार है, जिसके द्वारा लक्षणों का प्रबंधन करके रोग की जटिलताओं से बचा जा सकता है। सबक्लिनिकल हाइपोथायरॉइडिज्म के लक्षण सामान्य से कम स्तर पर होते हैं, यह एक मूक रोग है जिसके मामले भारतीय आबादी में तेजी से बढ़ रहे हैं।

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।


Edited by Vineeta Kumar
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