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Asian Games 2018 : तीरंदाजों से सोने पर अचूक निशाने की उम्मीद

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15 Aug 2018, 02:18 IST

एशियाई खेलों में भाग लेने वाली भारतीय टीम में इस बार अनुभव और जोश का बेहतरीन तालमेल बिठाया गया है। दीपिका कुमारी और अतनु दास से जहां रिकर्व स्पर्धा में देश को पदक की उम्मीद होगी तो वहीं कंपाउंड वर्ग में विश्व नंबर एक भारतीय महिला टीम की तिकड़ी मुस्कान किरार, ज्योति सुरेखा वेन्नाम और त्रिशा देब से भी पदक की उम्मीद की जा रही है। पुरुष वर्ग में अभिषेक वर्मा लाजवाब फॉर्म में हैं। तीरंदाजों से भारत को इस एशियाई खेलों में बेहतर प्रदर्शन के साथ पदक तालिका में ऊपर चढ़ने की उम्मीद है। आज चर्चा उन्हीं प्रतिभाशाली तीरंदाजों की...

भारत के पास एकमात्र स्वर्ण

एशियाई खेलों की तीरंदाजी स्पर्धा में भारत के पास कुल आठ पदक हैं। हालांकि इसमें स्वर्ण पदक की संख्या एक ही है। बाकि दो रजत और पांच कांस्य हैं। 2014 में पहली बार एशियाई खेलों में कंपाउंड तीरंदाजी स्पर्धा शामिल की गई। भारत को पुरुष कंपाउंड टीम स्पर्धा में स्वर्ण और महिला वर्ग में कांस्य पदक मिला था। 2010 ग्वांगझू में हुए एशियाई खेलों में दीपिका ने टीम इंवेंट में कांस्य पदक जीता था।

अनुभवी पर दारोमदार लेकिन दीपिका सबसे शानदार

2014 में हुए एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाली चौकड़ी में शामिल रहे अभिषेक वर्मा और रजत चौहान पर फिर से पदक का दारोमदार होगा। उनसे अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद है। अभिषेक ने व्यक्तिगत कंपाउंड में रजत पदक भी अपने नाम किया था। इसी तरह त्रिशा देब भी कंपाउंड के साथ एकल स्पर्धा का कांस्य पदक जीतने में सफल हुई थीं। वहीं हाल ही में विश्व कप स्टेज-3 में स्वर्ण पदक जीतने वाली दीपिका कुमारी रिकर्व टीम की सबसे मजबूत कड़ी हैं। उनके नाम 2010 एशियाई खेलों का कांस्य पदक है। इस साल राष्ट्रमंडल खेलों में दीपिका ने उम्दा प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। वहीं विश्व कप फाइनल में दीपिका चार बार रजत पदक जीत चुकी हैं। इसमें 2011, 2012, 2013 औऱ 2015 शामिल हैं। इस लिहाज से यह कहा जा सकता है कि दीपिका अब तक तीरंदाजी में शानदार रही हैं। वहीं अतनु दास और लक्ष्मी रानी के साथ उनकी जोड़ी खूब जमती है। रियो ओलंपिक में भी दीपिका और लक्ष्मी साथ खेल चुकी हैं।

तीरंदाजी में भारतीय महिलाएं बेजोर

भारत की महिला कंपाउंड टीम इस वक्त दुनिया की नंबर एक टीम है। इसके सदस्य मुस्कान किरार, ज्योति सुरेखा, त्रिशा देब ने विश्व कप सभी प्रमुख प्रतियोगिता में पदक जीते हैं। दिव्या दयाल ने अंताल्या में ज्योति सुरेखा और मुस्कान किरार को खिताब जीतने में मदद की। वहीं बर्लिन में ज्योति और मुस्कान के साथ त्रिशा देब ने पदक जीता।

कंपाउंड में पदक की दावेदारी

भारत की कंपाउंड टीम इस प्रतियोगिता में एक मजबूत टीम के तौर पर उतरेगी। इस स्पर्धा में पिछली बार पुरुष टीम ने स्वर्ण पदक जीता था। वहीं कंपाउंड में भारतीय महिला टीम इस समय विश्व में नंबर एक है। विश्व में सातवें नंबर के खिलाड़ी अभिषेक वर्मा के अलावा ज्योति और त्रिशा से भी भारत को पदक की उम्मीद है। तीरंदाजों के हाल के प्रदर्शन के लिहाज से कंपाउंड में तो भारत पदक की दावेदारी कर ही सकता है।

रिकर्व में दक्षिण कोरियाई टीम से चुनौती

रिकर्व टीम में दीपिका, लक्ष्मी और अतनु दास शानदार फॉर्म में है। हालांकि एशियाई खेलों में उन्हें दक्षिण कोरियाई तीरंदाजों के अलावा चीनी ताइपे के खिलाड़ियों से कड़ी टक्कर मिलेगी। हाला में अमेरिका में हुए विश्व कप स्टेज तीन के रिकर्व धनुर्धर दीपिका स्वर्ण पदक जीता था। हालांकि दीपिका और अतनु दास की जोड़ी कांस्य पदक के प्लेऑफ मैच में चीनी ताइपे की तांग चीह चुन और तान या लिंग से 4-5 से हार गई थी। इसलिए उन्हें एशियाई खेलों में भी इन खिलाड़ियों से सतर्क रहने की जरूरत है।

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