बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में 57 साल का सूखा खत्म करने की कोशिश में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी

एशियन चैंपियनशिप में 20 साल के लक्ष्य सेन समेत, श्रीकांत, सिंधू भारत की सबसे बड़ी उम्मीद हैं।
एशियन चैंपियनशिप में 20 साल के लक्ष्य सेन समेत, श्रीकांत, सिंधू भारत की सबसे बड़ी उम्मीद हैं।

फिलिपींस के मनिला में खेली जा रही बैडमिंटन एशिया चैंपियंशिप का आगाज हो गया है। 1 मई तक चलने वाला ये टूर्नामेंट तीन महीने बाद होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों और उसके बाद एशियन गेम्स के लिहाज से भारतीय बैडमिंटन दल के लिए काफी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यहां भी टीमें अपने देश का प्रतिनिधित्व करती हैं। भारत की ओर से ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप के इस साल के उपविजेता लक्ष्य सेन, विश्व चैंपियनशिप सिल्वर मेडलिस्ट श्रीकांत, ओलंपिक मेडलिस्ट पीवी सिंधू समेत कई बड़े नाम प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। भारत ने प्रतियोगिता में सिर्फ 1 बार साल 1965 में गोल्ड मेडल जीता था।

साल 1962 में शुरु हुई इस प्रतियोगिता का आयोजन 1991 से हर साल होता आ रहा है। साल 2019 के बाद अब 2022 में इसका आयोजन किया जा रहा है। टूर्नामेंट में कुल पांच कैटेगरी में मुकाबले होने हैं - पुरुष सिंगल्स, महिला सिंगल्स, पुरुष डबल्स, महिला डबल्स और मिक्स्ड डबल्स। हर कैटेगरी में एक देश की ओर से अधिकतम चार प्रतिभागी होंगे और हर वर्ग में गोल्ड जीतने वाले खिलाड़ियों को 12 हजार रैंकिंग प्वाइंट भी कमाने का मौका मिलेगा।

महिला सिंगल्स में पीवी सिंधू, साइना नेहवाल, मालविका बंसोड़, और आकर्षि कश्यप देश की चुनौती पेश कर रही हैं जबकि लक्ष्य सेन, किदाम्बी श्रीकांत, साईं प्रणीत को पुरुष टीम का हिस्सा बनने का मौका मिला है। 2018 में ब्रॉन्ज जीतने वाले एच एस प्रणॉय चौथे खिलाड़ी के रूप में टीम में थे लेकिन चोट के कारण आखिरी मौके पर उन्हें हटना पड़ा है। पुरुष डबल्स में चिराग शेट्टी और स्वास्तिकराज रणकिरेड्डी की जोड़ी से भारतीय फैंस एक न एक पदक की उम्मीद जरूर कर रहे हैं।

भारत के लिए साल 1965 में इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में दिनेश खन्ना ने पुरुष सिंगल्स का गोल्ड जीता था और इसके बाद देश कभी भी किसी वर्ग में गोल्ड नहीं जीता है। ऐसे में लक्ष्य सेन, श्रीकांत, सिंधू, साइना जैसे खिलाड़ियों से देश को काफी आशा है। साइना नेहवाल ने साल 2010, 2016 और 2018 में महिला सिंगल्स में ब्रॉन्ज जीता था जबकि सिंधू ने 2014 में ब्रॉन्ज अपने नाम किया था।

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Edited by Prashant Kumar