वर्ल्ड कप 2019: 3 कारण जिनके चलते भारत का खिताब जीतना है मुश्किल

अंबाती रायडू

वर्ल्ड कप 2019 की शुरुआत में अब कुछ दिन ही बचें हैं और अधिकांश टीमों ने विश्व कप के लिए अपनी टीमों की घोषणा कर दी है। भारत ने भी विराट कोहली के नेतृत्व वाली टीम की घोषणा कर दी है और जहाँ अम्बाती रायडू को उनके फॉर्म को देखते हुए टीम में शामिल नही किया गया, वहीं दिनेश कार्तिक को ऋषभ पंत पर तरजीह मिली.

क्रिकेट के जानकारों, कप्तानों, पूर्व खिलाड़ियों आदि ने कहा है कि इंग्लैंड और भारत इस साल विश्व कप जीतने के सबसे प्रमुख दावेदार हैं। चैंपियंस ट्रॉफी के बाद से दोनों ही टीमों का प्रदर्शन अच्छा रहा है।

अब जबकि भारत विश्व कप की तैयारी कर रहा है, ऐसा लग रहा है कि विजय शंकर की अनुभवहीनता आदि जैसे कुछ मुद्दे हैं, जो भारत को विश्व कप जीतने की राह मुश्किल बना सकते हैं। आइए एक नजर डालते हैं ऐसे ही तीन कारणों पर जो कि इस बार भारत की राह में रोड़ा बन सकते हैं:


# 3 खिलाड़ियों की खराब फॉर्म

टीम में 4-5 खिलाड़ी बहुत ख़राब फॉर्म में हैं

आईपीएल की शुरुआत से पहले विराट कोहली और चयनकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा था कि विश्व कप के लिए टीम का चयन आईपीएल प्रदर्शन के आधार पर नहीं किया जाएगा। हालाँकि, अब कहीं न कहीं लग रहा कि कहीं यह निर्णय गलत तो नही था!भारत के प्रमुख स्पिनर कुलदीप यादव का फॉर्म टीम प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है। अब तक का आईपीएल कुलदीप के लिए बहुत ख़राब रहा है और उन्हें बल्लेबाजों ने आसानी से पढ़ा है और उनकी गेंदों पर जम कर प्रहार किया है। कई बार उन्होंने एक ओवर में 25 से अधिक रन दिए हैं। उनका गेंदबाजी औसत सभी गेंदबाजों में सबसे खराब है।

वहीं बल्लेबाजों की बात करें तो रोहित शर्मा, विजय शंकर, दिनेश कार्तिक और केदार जाधव भी फॉर्म से बाहर नज़र आये हैं। हालाँकि कार्तिक ने पिछले मैच में 97 * की पारी और रोहित ने चेन्नई के विरुद्ध 67 की पारी खेलकर अब फॉर्म में वापसी के संकेत देकर उम्मीदें तो जगाई हैं, लेकिन उन्हें अब निरंतरता लानी होगी।

# 2 घरेलु समर्थन की कमी

पिछली बार जब भारत ने कप जीता था, जब उनके पास घरेलू समर्थन था

इस बात से इंकार नही किया जा सकता कि भारत के 2011 विश्व कप जीतने का एक बड़ा कारण यह था कि यह भारत में आयोजित किया गया था। घरेलू समर्थन ऐसे बड़े टूर्नामेंट में बड़ा किरदार निभाता है और इस बार इंग्लैंड में भारतीय टीम को उसकी कमी खलने वाली है।

इस चुनौती से भी बड़ी बात यह है कि घरेलू टीम इस साल कप के लिए पसंदीदा है। इंग्लैंड पिछले दो वर्षों में उच्च दर्जे की टीम रही है। उन्होंने पिछले डेढ़ साल में एक भी वनडे सीरीज नहीं गंवाई है। उनके पास घर पर एक प्रभावशाली रिकॉर्ड है और निश्चित रूप से वे घर के समर्थन का उपयोग करेंगे।

इस बीच भारत का इंग्लैंड में अच्छा रिकॉर्ड नहीं है। उन्होंने 2018 में खेली गई एकदिवसीय श्रृंखला गंवाई थी और टेस्ट श्रृंखला भी गंवा दी। हालांकि इस बात से कोई इनकार नहीं करता है कि भारत को भीड़ से काफी समर्थन मिलेगा, मगर जब बात सेमीफाइनल की हो या भारत और इंग्लैंड के बीच मैच कि तो दर्शकों का समर्थन निश्चित रूप से घरेलू टीम को ही मिलता है।

# 1 स्विंग के सामने बल्लेबाजों का ख़राब प्रदर्शन

इन तीनों बल्लेबाजों को स्विंग की स्थिति में परेशानी होती है

केएल राहुल के इंग्लैंड की श्रृंखला के पहले पांच स्कोर 4, 13, 8, 10, 23 थे। रिकॉर्ड यह साफ़ दिखाते हैं कि वह सीमिंग परिस्थितियों में कितना संघर्ष करते हैं। सिर्फ यही नहीं भारत के किसी भी सलामी बल्लेबाज का वहां अच्छा रिकॉर्ड नहीं है।

रोहित शर्मा ने पहले इंग्लैंड के विरुद्ध पहले एकदिवसीय मैच में अच्छा शतक जमाया लेकिन बाकी मैचों में वह फॉर्म से बिलकुल बाहर थे। शिखर धवन को स्विंग होती गेंदों के सामने परेशानी के चलते टीम से बाहर किया गया था और इन-स्विंगिंग गेंद के सामने राहुल की कमजोरी सभी जानते हैं।

एक और खिलाड़ी जो वास्तव में इंग्लैंड में संघर्ष कर रहा है वह है एमएस धोनी। चैंपियंस ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन ख़राब था और भले ही उन्होंने इंग्लैंड के ख़िलाफ सीरीज़ में कुछ रन बनाये, लेकिन वे बेहद धीमी गति से बनाये थे। एकमात्र खिलाड़ी जिसके पास स्विंग के खिलाफ बहुत अच्छी तकनीकी क्षमता है, वह विराट कोहली हैं, लेकिन एक टीम सभी मैचों को जीतने के लिए केवल एक या दो खिलाड़ियों पर भरोसा नहीं कर सकती है।

हालांकि लोग कह रहे हैं कि भारत इस साल खिताब के दावेदारों में से एक है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि वे टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक है, लेकिन पिछले रिकॉर्ड के चलते इस बार भारतीय टीम की राह आसान नही होगी।

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