IND vs ENG: रविचंद्रन अश्विन ने अपने 100वें टेस्‍ट में मैच विनिंग प्रदर्शन पर दी बड़ी प्रतिक्रिया, साथी गेंदबाज की भी जमकर की तारीफ

India  v England - 4th Test Match: Day Three
रविचंद्रन अश्विन के लिए धर्मशाला टेस्ट काफी शानदार रहा

रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) ने अपने 100वें टेस्‍ट को यादगार बनाया और मैच में 128 रन देकर 9 विकेट लिए। धर्मशाला टेस्‍ट की दूसरी पारी में अश्विन ने पांच विकेट लिए और भारत (India Cricket Team) की जीत में अहम भूमिका निभाई।

धर्मशाला में खेले गए पांचवें व अंतिम टेस्‍ट में भारत ने शनिवार को इंग्‍लैंड को एक पारी और 64 रन से मात दी। एचपीसीए स्‍टेडियम पर खेले गए मैच में इंग्‍लैंड की पहली पारी 218 रन पर ऑलआउट हुई। जवाब में भारत ने पहली पारी में 477 रन बनाए। इस तरह मेजबान टीम ने पहली पारी के आधार पर 259 रन की बढ़त बनाई। इंग्‍लैंड की दूसरी पारी दो सेशन के अंदर 195 रन पर ऑलआउट हो गई।

रविचंद्रन अश्विन ने मैच के बाद कहा, 'बहुत खुश हूं। मैं कैसा महसूस कर रहा हूं, उसको बयां नहीं कर सकता हूं। बहुत कुछ हुआ। 100वें टेस्‍ट के बारे में काफी बातचीत हुई। मैं बहुत खुश हूं, बहुत सारी शुभकामनाएं और बधाइयां मिलीं। टेस्‍ट जीतना और विकेट लेना, एक गेंदबाज इससे ज्‍यादा क्‍या मांग सकता है? विभिन्‍न एक्‍शन, गति, रिलीज का तरीका सीरीज में आजमाएं। आपको भारत में इस तरह की शैली की जरुरत है।'

भारतीय ऑफ स्पिनर ने आगे कहा, 'मैं बहुत खुश हूं कि आज जैसी गेंदबाजी हुई, भले ही मेरी कुछ धुनाई हुई। ऐसा लगा कि काफी चीजें हो रही हैं क्‍योंकि नई गेंद पिच पर पड़कर अच्‍छी गिर रही थी। मुझे गेंदबाजी में प्रयोग करने में कुछ असुरक्षित महसूस नहीं होता। हमारी आलोचना होना भी जरूरी है। मैं इसे लेकर चलता हूं और जो सीखता हूं, उसे मैच में करके देखता हूं।'

उन्‍होंने आगे कहा, 'अगर मुझमें कुछ प्रयोग या लागू करने का विश्‍वास है तो मैं ऐसा करने की कोशिश करता हूं। हम जितनी क्रिकेट खेलते हैं, तो उसमें विश्‍लेषण होता है। बल्‍लेबाज आप पर निशाना साधते हैं। अगर आप बदलाव नहीं करेंगे तो वो आपकी धुनाई करेंगे। एक पद्यति पर रहने से काम नहीं बनता।'

रविचंद्रन अश्विन ने कुलदीप यादव की जमकर तारीफ की। अश्विन ने कहा, 'एक छोर से गेंद पटककर आ रही थी, जबकि दूसरे छोर पर गति अपना कमाल दिखा रही थी। नई गेंद से मुझे कुछ उछाल मिला और इसका फायदा हुआ। कुलदीप यादव के हाथों से जिस तरह गेंद निकल रही थी, वो अविश्‍वसनीय है। मैं किसी के लिए इससे ज्‍यादा खुश नहीं हो सकता हूं।'

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Edited by Prashant Kumar