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'मुख्‍य चयनकर्ता होने के नाते मैंने दिग्‍गज खिलाड़‍ियों के खिलाफ कड़े फैसले लिए'

एमएसके प्रसाद
एमएसके प्रसाद
Vivek Goel
FEATURED WRITER

एमएसके प्रसाद ने सोमवार को जोर देकर कहा कि चयनकर्ताओं के चेयरमैन होने के नाते भारतीय क्रिकेट के भविष्‍य में दिलचस्‍पी के कारण उन्‍होंने अपने करीब चार साल के कार्यकाल में दिग्‍गजों के खिलाफ कड़े फैसले लिए। टीम इंडिया के पूर्व विकेटकीपर एमएसके प्रसाद से पूछा गया कि उनके कार्यकाल का वह मुश्किल दौर था, जब पूर्व कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी के संन्‍यास पर बातचीत करनी थी।

एमएस प्रसाद का मार्च में कार्यकाल समाप्‍त हो गया। उन्‍होंने कहा, 'चयनकर्ता के रूप में आपकी यात्रा के दौरान आपको भारतीय क्रिकेट की भलाई के लिए दिग्‍गजों के खिलाफ फैसला लेना होता है।'

प्रसाद ने क्रिकेट डॉट कॉम से बातचीत में कहा, 'चयनकर्ता का सबसे प्रमुख काम सही उत्‍तराधिकारी खोजना होता है। आपको चयनकर्ता के रूप में गैरजुनूनी बनना पड़ता है। फिर आप कड़े फैसले लेने के लिए भावुक नहीं हो सकते। चयन समिति बनी इसीलिए ताकि उत्‍तराधिकारी बनाए जाएं। अब दूसरा धोनी या सचिन नहीं हो सकता क्‍योंकि ये बहुत अनोखे थे और इनका योगदान अमूल्‍यवान है और कोई इस पर सवाल नहीं करेगा।'

यह पूछने कि पर उनके योगदान की तारीफ नहीं होती तो निराशा महसूस होती है? बड़ी बात यह है कि भारतीय टीम विश्‍व टेस्‍ट चैंपियनशिप फाइनल खेल रही है और अधिकांश खिलाड़‍ियों का चयन पिछली सेलेक्‍शन समिति से हुआ था।

डब्‍ल्‍यूटीसी फाइनल में भारत को देखकर बहुत खुश: एमएसके प्रसाद

इस पर प्रसाद ने जवाब दिया, 'आपको वो करने की जरूरत है, जो आप करने वाले हो। हमारे कर्म वहां देखें जाएंगे। अगर भारतीय टीम के सात सुपरस्‍टार्स महत्‍वपूर्ण मैच में नहीं खेले। सात युवाओं ने उनकी भरपाई की और मैच जीतकर दिया। यह हमारी कड़ी मेहनत का फल है। चाहे लोग माने या जो मन करे बोले, लेकिन इसके तब तक मायने नहीं हैं जब तक नतीजा न देखने को मिले।' प्रसाद ने कहा कि डब्‍ल्‍यूटीसी के फाइनल में टीम इंडिया के पहुंचने की उन्‍हें बहुत खुशी है।

प्रसाद ने कहा कि वह भारतीय टीम को डब्‍ल्‍यूटीसी फाइनल में देखकर बहुत खुश हैं। पिछले दो साल में ज्‍यादा युवाओं को देश के लिए खेलने का मौका मिला।

प्रसाद ने कहा, 'इसमें कोई दो राय नहीं है। इस नतीजे से आपको ढेर सारी संतुष्टि और खुशी मिली। चयन के मद्देनजर हमने अपना सर्वश्रेष्‍ठ दिया। हमने इस भारतीय टीम को डब्‍ल्‍यूटीसी फाइनल में पहुंचाने में छोटी सी भागीदारी निभाई। यह टीम फाइनल खेलने की हकदार है क्‍योंकि पिछले चार साल से यह नंबर-1 टेस्‍ट टीम बनी हुई है। मैं फाइनल को देखने के लिए बेताब हूं।'

Edited by Vivek Goel
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