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भारत के अब तक के 10 सबसे बेहतरीन फुटबॉलर्स

CONTRIBUTOR
Modified 14 Oct 2016, 16:59 IST
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फुटबॉल को हमेशा भारत में क्रिकेट के सामने कमतर ही आंका गया है और इसका श्रेय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और इसका समर्थन करने वाले इंडियन फैंस को जाता है। हालांकि पिछले कुछ सालों में इंडियन सुपर लीग और एशियाई टूर्नामेंट में बेंगलुरू एफसी की आई-लीग जैसे क्लबों की सफलता के बाद अब भारतीय खेल प्रेमी फुटबॉल के प्रति धीरे-धीरे उदार नजर आ रहे हैं। ऐसा नहीं है कि भारत में फुटबॉल के हालत हमेशा से खराब रहे हैं। 50 और 60 के दशक में इंडियन फुटबॉल का सुनहरा दौर था जब भारतीय टीम को एशिया की सबसे बेहतरीन टीमों में गिना जाता था । यहां 1950 में भारत के फीफा विश्वकप के लिए क्वालिफाई करने का जिक्र करना जरूरी है, हालांकि भारत इस विश्वकप में नंगे पांव खेलने जैसे कुछ कारणों से इसमें भाग नहीं ले सका। लेकिन क्वालीफाई करना ही भारतीय फुटबॉल की बड़ी उपलब्धी कही जायेगी । 70 के दशक में, या यूं कहें कि भारतीय फुटबॉल के स्तर में गिरावट का दौर शुरु होने से पहले विश्व फुटबॉल ने सैयद अब्दुल रहीम जैसे बेतरीन भारतीय खिलाड़ी का शानदार दौर भी देखा। इसके बाद एक दौर एसा भी आया कि भारतीय फुटबॉल बंगाल, केरल और गोवा के क्लबों तक सीमित रह गया, जिसके लिए लोग भावनात्मक रूप से सोचते और समर्थन करते थे । 1990 और 2000 के दशक में फिर से स्टीफन कॉंन्सटाइन और बाब हाटन जैसे कई अच्छे फुटबॉल खिलाड़ियों की वजह से भारत ने एशिया में अलग मान्यता और सम्मान हासिल किया । चलिए ऐसे ही 10 बेहतरीन भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों पर एक नजर डालते हैं जिन्होंने फुटबॉल जगत में अपनी अलग ही जगह बनाई। #10 क्लाईमैक्स लॉरेंस  if 1 क्लाइमेक्स लॉरेंस ने एक दशक तक भारतीय टीम के लिए खेले और अब तक के सबसे बहतरीन इंडियन फुटबॉलर्स में से एक साबित हुए। गोवा में जन्मा ये बेहतरीन मिडफील्डर भारतीय फुटबॉल की लंबे समय तक धुरी बना रहा। अपने कैरियर के दौरान क्लाइमेक्स सालगांवकर, ईस्ट बंगाल, डेम्पो जैसे क्लबों के लिए भी खेले। लॉरेंस मैदान में भले ही बेशक एक खतरनाक मिडफील्डर थे, पर स्वभाव से बहुत ही सीधे औऱ सरल इंसान थे। जब तक वो टीम के हिस्सा रहे एसा कभी नहीं हुआ कि उनके बारे में उनके कोच या किसी ने भी कभी कोई सवाल उठाए हों । लॉरेंस ने अपने अंतरराष्ट्रीय कैरियर की शुरुआत सन् 2002 में स्टीफन कॉन्सटैन्टाइन के साथ की(जब वो भारतीय कोच के रूप में पहली बार देखे गए)। उनके कैरियर में सबसे बेहतरीन पल 2008 एएफसी चैलेंज कप के फाइनल में आया, जब उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ 91 वें मिनट में अपनी टीम को जीत दिलाई । क्लाइमेक्स के नाम 74 इंटरनेशनल कैप्स हैं, जो उनके अलावा केवल भूटिया, विजयन और छेत्री जैसे महान खिलाड़ी ही हासिल कर सके हैं। यही सब बाते हैं जो 2012 में फुटबॉल को अलविदा कहने वाले इस खिलाड़ी को भारत का महान फुटबॉलर बनाती हैं।
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Published 14 Oct 2016, 16:59 IST
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