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बच्चों के कान में दर्द का घरेलू उपचार: Bacchon Ke Kaan Mein Dard Ka Gharelu Upchaar 

कान में होने वाली परेशानी बड़ी घातक हो सकती है और अगर ये बच्चों में है तो इसकी तीव्रता और भी बढ़ जाती है। (फोटो: नवभारत टाइम्स)
कान में होने वाली परेशानी बड़ी घातक हो सकती है और अगर ये बच्चों में है तो इसकी तीव्रता और भी बढ़ जाती है। (फोटो: नवभारत टाइम्स)
Amit Shukla
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कान में दर्द होना तो एक आम घटना नहीं है। कान में दर्द होने का अर्थ है कि आपके कान में कुछ परेशानी है और अगर ये बच्चे के कान में हो रहा है तो इसके गंभीर परिणाम होते हैं। अगर आप अपने बच्चे के कान में दर्द होने पर सिर्फ तेल डालकर या पेनकिलर देकर उसे चुप करा दे रहे हैं या रही हैं तो आप बीमारी को बढ़ने का मौका दे रहे हैं।

बच्चों का जीवन, स्वास्थ्य और शरीर तीनों ही बड़े नाजुक होते हैं। बच्चों में हड्डियाँ ज्यादा होती हैं जो वक्त के साथ आपस में जुड़ जाती हैं। इसकी वजह से उनकी संख्या 206 पर आकर रुक जाती है। बचपन के समय जब हड्डियाँ कमजोर और नाजुक होती हैं उस समय अगर उन्हें दर्द हो रहा है तो ये एक रेड फ्लैग है।

रेड फ्लैग उसको कहते हैं जो होता घातक है और जिसपर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। सेहत को भी आप रेड फ्लैग में गिन सकते हैं। जब आपके पास रेड फ्लैग आता है और वो भी बच्चों से तो उसे किसी भी हाल में नजरअंदाज ना करें। आइए आपको बताते हैं कि अगर बच्चों के कान में दर्द हो रहा है तो आपको क्या करना चाहिए।

बच्चों के कान में दर्द का घरेलू उपचार: Bacchon Ke Kaan Mein Dard Ka Gharelu Upchaar

ठंडी सिकाई: cold massage

बच्चों के कान नाजुक होते हैं जिसकी वजह से वो कई बार गर्म सिकाई को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में अगर आप उनके कानों कि सिकाई ठंडे पानी या रूम टेम्प्रेचर वाले पानी से करते या करती हैं तो उससे आपको काफी लाभ होगा। सेहत के लिए ये एक अच्छा कदम होगा।

तुलसी के पत्ते: Holy Basil leaves

तुलसी के पत्तों में काफी खूबियाँ होती हैं। अगर इन्हें बीमारी नाशक कहा जाए तो कोई अतिशंयोक्ति नहीं होगी। तुलसी की पत्तियाँ सेहत के लिए बेहद अच्छी होती हैं। आप चाहें तो इसको बच्चे को खिलाएं और अगर वो ना खाना चाहे तो तुलसी की पत्तियों के रस की कुछ बूँदें उनके कान में ड़ाल दें। इससे बच्चे को बेहद जल्दी लाभ मिलेगा।

सरसों का तेल: Mustard Oil

वक्त के साथ हमने सरसों के तेल को ना जाने कितने तेलों से बदल दिया लेकिन जो बात ओरिजिनल में है वो किसी और में नहीं हो सकती है। सरसों के तेल की बूँदें आपने भी बचपन में अपने कानों में डाली होंगी और ये आज भी सबसे कारगर हैं। सेहत हो अच्छी तो सबकुछ अच्छा लगता है और वैसे भी कान ही हैं शरीर की जान।

(डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए है, इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रुप में नहीं लिया जा सकता। कोई भी स्टेप लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर कर लें।)


Edited by Amit Shukla
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