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भारतीय हॉकी टीम के स्टार खिलाड़ी रुपिंदर पाल सिंह और बीरेंद्र लाकड़ा ने कहा हॉकी को अलविदा

रुपिंदर और बीरेंद्र टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा थे।
रुपिंदर और बीरेंद्र टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा थे।

भारतीय हॉकी टीम के दो दिग्गज खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कह दिया है। टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे डिफेंडर खिलाड़ी रुपिंदर पाल सिंह और बीरेंद्र लाकड़ा, दोनों ने सीनियर हॉकी टीम का साथ छोड़ दिया है। रुपिंदर ने सोशल मीडिया के जरिए खेलप्रेमियों के साथ अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर को खत्म करते हुए रिटायरमेंट की घोषणा की जबकि बीरेंद्र लाकड़ा के रिटारमेंट का ऐलान हॉकी इंडिया ने अपने ट्विटर हैंडल से किया। पिछले 13 साल से भारतीय सीनियर नेशनल टीम का हिस्सा रहे रुपिंदर टोक्यो ओलंपिक ब्रॉन्ज जीतने वाली भारतीय टीम में भी शामिल थे और टीम की जीत में रुपिंदर की बेहद अहम भूमिका रही। वहीं बीरेंद्र लाकड़ा भी एक दशक से भी अधिक समय तक टीम को मजबूती दे रहे थे।

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रुपिंदर पाल वर्तमान समय में दुनिया के सबसे बेहतरीन ड्रैग-फ्लिकर में गिने जाते हैं। पेनेल्टी कॉर्नर हो या पेनेल्टी स्ट्रोक, रुपिंदर का हॉकी स्टिक को ड्रैग करते हुए गेंद को गोल पोस्ट में डालना वाकई देखने लायक होता था। रुपिंदर का गेंद पर नियंत्रण शानदार है और यही कारण है कि उन्हें पेनेल्टी कॉर्नर स्पेशलिस्ट भी कहा जाता है। वहीं बीरेंद्र लाकड़ा का तगड़ा डिफेंस दुनिया भर में मशहूर है। लाकड़ा गेंद को भारत के गोल पोस्ट तक जाने में रोकने में जान झोंक देख देते थे।

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साल 2008 में टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने वाले रुपिंदर ने कुल 223 मैचों में खेलते हुए 119 गोल दागे। रुपिंदर ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में जर्मनी के खिलाफ ब्रॉन्ज मेडल मैच में पेनेल्टी को गोल में बदलते हुए पोडियम फिनिश में अहम भूमिका निभाई थी। वहीं बीरेंद्र लाकड़ा ने भारतीय सीनियर टीम के लिए 201 मुकाबले खेलते हुए बतौर डिफेंडर प्रतिद्वंदी टीम के कई अटैक रोके। लाकड़ा के नाम कुल 10 गोल हैं। दोनों खिलाड़ी 2014 में एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली टीम इंडिया में साथ थे। रुपिंदर के रिटायरमेंट के ऐलान के कुछ ही घंटों के भीतर लाकड़ा के ऐलान के बाद खेल प्रेमी उम्मीद लगा रहे हैं कि शायद जल्द ही ये दोनों शानदार खिलाड़ी देश में हॉकी के लिए कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी में हैं।

हॉकी परिवारों से है ताल्लुक

ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट रुपिंदर और लाकड़ा के जाने से टीम को नुकसान होगा।
ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट रुपिंदर और लाकड़ा के जाने से टीम को नुकसान होगा।

रुपिंदर और बीरेंद्र के बीच एक खास बात मेल खाती है और वो है कि ये दोनों खिलाड़ी ऐसे परिवारों से आते हैं जहां हॉकी रगों में दौड़ती है। बीरेंद्र लाकड़ी के बड़े भाई बिमल लाकड़ी भी टीम इंडिया के लिए खेल चुके हैं, वहीं इनकी बहन असुन्ता लाकड़ा भी भारतीय महिला टीम की कप्तान रह चुकी हैं। वहीं रुपिंदर पाल भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे गगन अजीत सिंह के कजिन हैं, गगन के पिता 1972 ओलंपिक में ब्रॉन्ज जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं।

सभी को कहा थैंक्यू

रुपिंदर ने हॉकी इंडिया के साथ ही पंजाब के फिरोजपुर की बाबा शेरशाह वाली अकादमी को भी धन्यवाद दिया है जहां उन्होंने हॉकी के गुर सीखे। चंडीगढ़ हॉकी अकादमी के अपने साथियों और पूर्व कोच को भी धन्यवाद दिया है। रुपिंदर और बीरेंद्र, दोनों ही भारतीय पुरुष टीम के दो मजबूत स्तंभ की तरह थे, ऐसे में इन दोनों का टीम से जाना निश्चित रूप से टीम को कमजोर कर सकता है। हालांकि टीम में नए चेहरे हैं जो बेहतर खेल सकते हैं। लेकिन यह जरूर है कि सभी हॉकी प्रेमी इन दो खिलाड़ियों के खेल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जरूर मिस करेंगे।

Edited by निशांत द्रविड़
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