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स्पोर्ट्सकीड़ा एक्सक्लूसिव: उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी मैं इतना कुछ हासिल कर लूंगी- मनु भाकर

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सावन गुप्ता

महज 16 साल की उम्र में ही कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीत इतिहास रचने वाली मनु भाकर आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। पहले तो उन्होंने 2018 के कॉमनवेल्थ खेलों में निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीता। उसके बाद इसी साल मैक्सिको में आयोजित शूटिंग वर्ल्ड कप में भी उन्होंने 2 पदक अपने नाम किए। पहले तो उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में गोल्ड मेडल जीता, फिर 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट में ओम प्रकाश मिथरवाल के साथ मिलकर गोल्ड पर निशाना साधा।

हरियाणा की रहने वाली मनु भाकर ने स्पोर्ट्सकीड़ा से खास बातचीत में अपने करियर और भविष्य को लेकर अपने विचार रखे:

16 साल की उम्र में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल, उसके बाद शूटिंग वर्ल्ड कप में दो-दो गोल्ड मेडल जीता। इतनी कम्र में ही आपने इतनी बड़ी-बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है, क्या कहेंगी इस बारे में ?

मनु भाकर: पिछले साल तक मुझे उम्मीद नहीं थी कि इतना कुछ कर पाउंगी। बस मैं आगे बढ़ने और बेहतरीन प्रदर्शन करने की कोशिश कर रही थी। इसके बाद धीरे-धीरे मैंने भारतीय टीम में जगह बनाई और एक के बाद एक टूर्नामेंट खेलती गई। मुझे पता ही नहीं चला कि एक साल का इतना लंबा वक्त कैसे निकल गया। मेरे लिए ये काफी अच्छा साल रहा और एक साल में इतने सारे मेडल जीतकर काफी अच्छा लगता है। कई सारे खिलाड़ी हैं जिन्हें काफी प्रैक्टिस और लंबे समय के बाद ये सफलता हासिल होती है। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि इतनी कम उम्र में मैंने ये सब हासिल कर लिया है।

शूटिंग को प्रोफेशनल करियर के तौर पर आपने कैसे चुना ?

मनु भाकर: जो भी नई चीज मैं सुनती हूं, उसे करने की कोशिश करती हूं। शूटिंग में मैंने हाथ आजमाया और इसमें अच्छा करती चली गई । इसके बाद किसी और खेल में हाथ आजमाने का मौका ही नहीं मिला तो यही चलता गया।

आपके करियर का अगला बड़ा लक्ष्य क्या है ?

मनु भाकर: मेरा अगला सबसे बड़ा लक्ष्य ओलंपिक कोटा हासिल करना है।

खेलो इंडिया के बारे में आपके क्या विचार हैं। जनवरी 2018 में खेलो इंडिया स्कूल गेम्स हुए और अगले साल अब खेलो इंडिया यूथ गेम्स होने जा रहे हैं। किस तरह से इससे छोटे-कस्बों और गांवों से प्रतिभा निकलकर सामने आएगी ?

मनु भाकर: खेलो इंडिया एक बहुत ही अच्छा कार्यक्रम है। इसकी वजह से नए-नए खिलाड़ी निकलकर सामने आ रहे हैं। हर साल हजारों बच्चों को खेलने का मौका मिलता है और सबसे बड़ी बात उनको स्कॉलरशिप भी मिलती है। इससे उनकी काफी सारी आर्थिक समस्याएं भी दूर हो जाती हैं। कुल मिलाकर खेलो इंडिया प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म है।

शूटिंग में कितने अनुशासन और कितनी प्रैक्टिस की जरुरत होती है ?

मनु भाकर: प्रैक्टिस हर एक इंसान के ऊपर निर्भर करता है कि उसको कितनी जरुरत है। जहां तक अनुशासन का सवाल है, वो तो हर एक खेल में काफी जरूरी होता है और शूटिंग में भी उसकी काफी अहमियत है।


Edited by सावन गुप्ता

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