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प्रो-रैसलिंग की 5 बातें जो हमें बुरी लगती हैं

Sanjay Dutta

प्रो-रैसलिंग की दुनिया कुछ ऐसी है कि सिर्फ इसके चाहने वाले ही इसकी कद्र कर सकते हैं। कुछ लोगों को यह कीड़ा जल्द ही लग जाता है जबकि कुछ लोग उम्र के साथ-साथ इसके साथ जुड़ते जाते हैं।

हालांकि दूसरे खेलों की तरह, इस खेल में भी कई खामियां है लेकिन यह बहुत छोटी और व्यक्तिगत है। लेकिन इन खामियों के वजह से ही हम इस खेल से लगातार जुड़े रहते हैं।

इसी के साथ आइए नजर डालते हैं उन पांच चीजों पर जो हमें प्रो रैसलिंग में बुरी लगती है।

#5 क्वॉलिटी में अंतर

कुछ अजीब कारण से, ऐसा लगता है कि यह विचार दुनिया भर में फैल गया है कि आप सिर्फ एक प्रकार के मैच या शैली का आनंद उठा सकते हैं। एक तरफ है इंडिपेंडेंट रैसलिंग फैन्स जो रैसलिंग मैचों में हाई-फलाइंग एक्शन देखना पसंद करते हैं तो वही दूसरी तरफ WWE फैन्स है,जो कहानी कहने की शेली और रैसलर्स के बचने की क्षमता का लुत्फ उठाते हैं।

लेकिन कुछ फैन्स इन दोनों को पसंद नहीं कर सकते क्योंकि वे एक-दूसरे के पूर्ण विपरीत है। इसके अलावा, कुछ पुराने रैसलर्स का यह मानना ​​है कि मैच में काम करने का सिर्फ एक ही तरीका, काफी बचकाना लगता है। 2018 में प्रोफेशनल रैसलिंग पहले की तुलना में ज्यादा गतिशील और आकर्षक है।

#4 बाहरी लोगों की राय

हम सभी ने रैसलिंग को नापसंद करने वाले लोगों को यह कहते हुए सुना है- "यह नकली है, आप इसे क्यों देखते हैं, एमएमए इससे बेहतर है।" उन्हें अपनी राय रखने का पूरा हक हैं, लेकिन बुरा तब लगता है जब वह इसके बारे में ज्ञान देने लगते हैं जबकि उन्हें खुद इस विषय में कुछ नहीं पता होता है।

वह आपको यह समझाने की कोशिश करते हैं कि आपको नहीं पता कि आप जो देख रहे हैं, उसमें जानबूझकर हिंसा नहीं की जाती और इस चार्चा में दूसरे व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं देते क्योंकि यह लोग काफी ज़िद्दी और अड़ियल होते हैं। हमें काफी बुरा लगता है जब यह लोग रैसलिंग में डालें गए निष्ठा और कौशल की कद्र नहीं करते।

#3 कमेंट्री की आपदा

हमें लगता है कि माइकल कोल एक अत्यंत प्रतिभाशाली काॅमेंटेटर है। लेकिन दुर्भाग्य से, WWE कमेंट्री टीम की सीमाओं में जकड़े रहने की वजह से उन्हें अपने प्रतिभा का प्रदर्शन करने का मौका ही नहीं मिलता। कभी-कभी इससे एक हास्यास्पद लम्हा जरूर मिलता है, लेकिन ज्यादातर समय चीजें निर्मित और निष्ठाहीन लगती हैं।

ऐसा WWE के बाहर भी होता है जहां कई कंपनिया वैध विश्लेषण और 80% समय तक रैसलर्स और एक-दूसरे में खोट निकालने के बीच का संतुलन नहीं ढूंढ पाते। कमेंट्री रैसलिंग का एक बड़ा हिस्सा है और हम चाहते हैं कि इसमें कुछ बदलाव आए।

#2 ब्रांड्स में घृणा

अगर रॉ और स्मैकडाउन लाइव को एक-दूसरे दूसरे से नफ़रत करनी चाहिए तो ये दोनो ब्रांड सिर्फ सर्वाइवर सीरिज में ही एक-दूसरे से क्यों टकराते हैं। हद तब हो जाती है जब रेड और ब्लू ब्रांड एक-दूसरे के पे-पर-व्यू का खुलम-खुला विज्ञापन करते हैं। यह हमें काफी तर्कहीन लगता है। हमें पता है कि ऐसा उस शो पर ज्यादा लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया करते हैं लेकिन हर हफ्ते अपने प्रतिद्वंदी के शो को विज्ञापित करने की क्या जरूरत हैं।

यह इन दोनों ब्रांडों की सर्वाइवर सीरिज के दौरान जागी दुश्मनी के माया को पूरी तरह से बर्बाद कर देता है और अब यह दोनों ब्रांड मिलकर एक पीपीवी में हिस्सा लेंगी।

#1 चैंपियन को लाभ

ज्यादातर खेलों में, चैंपियन को फायदा सिर्फ तभी होता जब उनका मैच ड्रा होता है या वे अपनी चैम्पियनशिप को रिटेन करते हैं। लेकिन कुछ विचित्र कारणों की वजह से प्रोफेशनल रैसलिंग में, चैंपियन DQ हार या काउंट-आउट से अपनी चैंपियनशिप रिटेन कर सकते है। यह नियम एक हद तक हमारी समझ में आता है। लेकिन एक हील हर मैच में इस नियम का फायदा क्यों नहीं उठाता। इस नियम से DQ या काउंट-आउट का रोमांच कम हो जाता है क्योंकि हमें पता होता है कि चैंपियन में कोई बदलाव नहीं होने वाला है।

यह अब काफी बेकार लगता है और स्मैकडाउन लाइव को अगर फिर से शानदार बनना है तो शेन मैकमोहन या डैनियल ब्रायन को ब्लू ब्रांड से इस नियम को हटाना होगा। लेकिन अगर कोई हील चैंपियनशिप जीतने के लिए उस मैच में दूसरे हील को अपने दोस्त से पिटवाता है, तो इसे जानबूझकर धोखाधड़ी की रणनीति मानकर खारिज किया जा सकता है।

लेखक - हैरी केटल , अनुवादक - संजय दत्ता

Edited by Staff Editor

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