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घर से दूर बने स्कूल भागकर जाने की मजबूरी ने बनाया अविनाश को एथलीट, अब CWG में जीता ऐतिहासिक मेडल

3000 मीटर स्टीपलचेज का सिल्वर जीतने के बाद बाकि पदक विजेताओं के साथ अविनाश (बाएं)।
3000 मीटर स्टीपलचेज का सिल्वर जीतने के बाद बाकि पदक विजेताओं के साथ अविनाश (बाएं)।
Hemlata Pandey

भारत के अविनाश साबले ने 2022 कॉमनवेल्थ खेलों में पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा का सिल्वर मेडल जीत इतिहास रच दिया है। साबले 0.05 सेकेंड के बेहद कम अंतर से गोल्ड से चूक गए। फिर भी ये मेडल ऐतिहासिक है क्योंकि इससे पहले इस स्पर्धा में किसी भारतीय धावक ने कोई पदक नहीं जीता था।

🚨 RECORD ALERT 🚨Avinash Sable, who today won 🥈 in the Men’s 3000m steeplechase, became the first non-Kenyan to be on the podium since CWG 1994 😱👏Take a bow! 🙌#CWG2022 #B2022 https://t.co/p32odC5hw7

13 सितंबर 1994 को महाराष्ट्र के बीड जिले के मांडवा में जन्में अविनाश साबले को बचपन की मजबूरी दौड़ना सिखा गई। किसानों के परिवार से ताल्लुक रखने वाले साबले का स्कूल घर से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर बना था और स्कूल तक जाने के लिए बस आदि की सुविधा भी नहीं थी। ऐसे में रोज साबले 6 किलोमीटर दौड़ कर स्कूल जाते और यही दूरी नापते हुए वापस भी आते थे। इसकी वजह से उन्हें दौड़ने की आदत हो गई।

Avinash Sable is a remarkable youngster. I am delighted he has won the Silver Medal in the men’s 3000m Steeplechase event. Sharing our recent interaction where he spoke about his association with the Army and how he overcame many obstacles. His life journey is very motivating. https://t.co/50FbLInwSm

12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद साबले भारतीय सेना की भर्ती में शामिल हुए और साल 2015 में पहली बार भारतीय सेना में ही क्रॉस कंट्री दौड़ में भाग लिया। धीरे-धीरे साबले को अपनी क्षमता का एहसास हुआ और वो लॉन्ग डिस्टेंस रनर बन गए। साल 2018 में साबले ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में 3000 मीटर स्टीपलचेज का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। 2019 में दोहा में हुई एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में साबले ने सिल्वर मेडल जीता। 2019 में ही साबले विश्व चैंपियनशिप में 3000 मीटर स्टीपलचेज के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय एथलीट बने। इस बार भी अमेरिका में हुई विश्व चैंपियनशिप में साबले फाइनल तक पहुंचे थे।

इस साल मई में साबले ने अमेरिका में हुई साउंड रनिंग ट्रैक मीट में 5000 मीटर दौड़ में 13: 25:65 मिनट का समय निकालते हुए 30 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ कीर्तिमान अपने नाम कर लिया। उन्होंने साल 1992 में बहादुर प्रसाद के द्वारा बनाया गया 13:29:70 मिनट का रिकॉर्ड ध्वस्त किया। साबले के नाम 3000 मीटर स्टेपलचेज का रिकॉर्ड भी है। बर्मिंघम कॉमनवेल्थ खेलों में साबले भले ही गोल्ड से चूक गए हों लेकिन उन्होंने लंबी दूरी की रेस में कीनिया और इथियोपिया के धावकों के दबदबो को तोड़ा है। साल 1994 के बाद पहली बार कॉमनवेल्थ खेलों में 3000 मीटर स्टीपल चेज की स्पर्धा में कोई मेडल किसी गैर-कीनियाई धावक ने जीता है।


Edited by निशांत द्रविड़

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