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CWG 2022 : एथलेटिक्स में नीरज चोपड़ा पदक के सबसे बड़े दावेदार, कुल 43 खिलाड़ियों पर रहेगी नजर

नीरज चोपड़ा ने 2018 के कॉमनवेल्थ खेलों मे जैवलिन थ्रो का गोल्ड जीता था।
नीरज चोपड़ा ने 2018 के कॉमनवेल्थ खेलों मे जैवलिन थ्रो का गोल्ड जीता था।
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Hemlata Pandey

नीरज चोपड़ा भारतीय एथलेटिक्स की दुनिया में इतिहास का सबसे बड़ा नाम बन चुके हैं। टोक्यो ओलंपिक में जैवलिन थ्रो का गोल्ड जीतने वाले नीरज ने हाल ही में विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर जीतकर 19 साल बाद देश को पदक दिलाने में कामयाबी हासिल की। और अब बर्मिंघम कॉमनवेल्थ खेलों में भी नीरज समेत देश के एथलेटिक्स दल से पदकों की उम्मीद है। भारत की ओर से इस बार 24 पुरुष और 19 महिला एथलीट समेत कुल 43 खिलाड़ी कॉमनवेल्थ गेम्स की ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में दम दिखाने को तैयार हैं। 43 में से भी कुछ खिलाड़ी ऐसे हैं जिनसे मेडल की उम्मीद सबसे ज्यादा है -

फील्ड इवेंट-

इवेंट पुरुष एथलीटमहिला एथलीट
जैवलिन थ्रोनीरज चोपड़ाडीपी मनूरोहित यादवअन्नू रानीशिल्पा रानी
लॉन्ग जम्पएम श्रीशंकरमुहम्मद अनसएंसी सोजान
हाई जम्पतेजस्विन शंकर--
ट्रिपल जम्पएल्डहॉस पॉलअब्दुल्लाह अबूबकरप्रवीण चित्रावेल--
शॉट पुट--मनप्रीत कौर
डिसकस थ्रो--नवजीत ढिल्लोंसीमा पुनिया
हैमर थ्रो--सरिता सिंहमंजू बाला
डिस्कस थ्रो (पैरा)देवेंद्र कुमार देवेंद्र गहलोत--
शॉट पुट (पैरा)--पूनम शर्माशर्मीलासंतोष

फील्ड इवेंट्स में नीरज चोपड़ा जैवलिन थ्रो का खिताब बचाने उतरेंगे। ओलंपिक चैंपियन और विश्व चैंपियनशिप सिल्वर मेडलिस्ट चोपड़ा ने 2018 गोल्ड कोस्ट खेलों में भी जैवलिन थ्रो का गोल्ड जीता था। 89.94 मीटर का पर्सनल बेस्ट रिकॉर्ड हाल ही में बनाने वाले नीरज से गोल्ड से कम फैंस को मंजूर नहीं होगा। महिलाओं में अन्नू रानी जैवलिन थ्रो के इवेंट में लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियनशिप फाइनल में पहुंची हैं और कॉमनवेल्थ खेलों में पदक लाने का दम रखती हैं।

विकास गौड़ा ने 2014 ग्लास्गो खेलों में डिस्कस थ्रो का गोल्ड जीता था।
विकास गौड़ा ने 2014 ग्लास्गो खेलों में डिस्कस थ्रो का गोल्ड जीता था।

ट्रिपल जम्प में एल्डहॉस पॉल सबसे बड़ी चुनौती पेश करेंगे। 25 साल के राष्ट्रीय चैंपियन पॉल ने हाल ही में विश्व चैंपियनशिप के ट्रिपल जम्प फाइनल में जगह बनाई और 9वें स्थान पर रहे। वहीं लॉन्ग जम्प में एम श्रीशंकर भी पदक के बड़े दावेदार हैं। उनके अलावा मुहम्मद अनस भी कमाल कर सकते हैं। हाई जम्प खिलाड़ी तेजस्विन शंकर मौजूदा राष्ट्रीय चैंपियन हैं और कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद कॉमनवेल्थ खेलों तक पहुंचे है। 2015 कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स के विजेता शंकर की बेस्ट जम्प 2.29 मीटर की है। नवजीत ढिल्लों ने महिलाओं के डिस्कस थ्रो ईवेंट में पिछली बार ब्रॉन्ज जीता था और इस बार गोल्ड पर निशाना लगाने को तैयार हैं। वहीं सीमा पुनिया लगातार दो बार 2014, और 2018 में डिस्कस थ्रो में सिल्वर जीत चुकी हैं और इस बार वो भी गोल्ड से कम की नहीं सोच रहीं।

ट्रैक इवेंट

इवेंट पुरुष एथलीटमहिला एथलीट
100 मीटर बाधा दौड़--ज्योति याराजी
4 गुणा 100 मीटर रीले--दुती चंदहिमा दासश्राबनी नंदाएमवी जिल्नाएनएस सिमी
10 हजार मीटर पैदल चालअमित खत्रीसंदीप कुमारप्रियंका गोस्वामीभावना जाट
3000 मीटर स्टीपलचेजअविनाश साब्ले--
4 गुणा 400 मीटर रीलेनोआह निर्मलमुहम्मद अजमलनागनाथन पांडीराजेश--
मैराथननितेंदर रावत--

ट्रैक इवेंट में 2019 की ऐशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप के सिल्वर मेडलिस्ट अविनाश साबले पर निगाहें होंगी। साबले 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में खेलेंगे। 4 गुणा 400 मीटर रीले में भारत पदक ला सकता है। जबकि हिमा दास, दुती चंद की मौजूदगी मे महिला 4 गुणा 100 मीटर में भी भारत को मेडल मिल सकता है।

खेलगोल्डसिल्वरब्रॉन्ज
1958 कार्डिफ100
1966 किंग्स्टन010
1970 एडिनबर्ग001
1974 क्राइस्टचर्च010
1978 ऐलबर्टा001
2002 मैनचेस्टर011
2006 मेलबर्न021
2010 दिल्ली237
2014 ग्लास्गो111
2018 गोल्ड कोस्ट 11 1
कुल51013

कॉमनवेल्थ खेलों में भारत ने एथलेटिक्स में बाकी देशों के मुकाबले ज्यादा अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। पहला मेडल गोल्ड के रूप में 1958 के खेलों में धावक मिल्खा सिंह ने दिलाया था। इसके बाद साल 2010 में महिला 4 गुणा 400 मीटर रीले का गोल्ड भारत ने जीता और कृष्णा पुनिया ने डिस्कस थ्रो का गोल्ड दिलाया। 2014 में विकास गौड़ा ने डिस्कस थ्रो का गोल्ड जीता और खेलों में फील्ड इवेंट का गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बने। आज तक देश ने कुल 28 मेडल एथलेटिक्स में जीते हैं। लेकिन उम्मीद यही है कि इस बार बर्मिंघम में भारतीय एथलीट इस संख्या को अच्छे खासे अंतर से बढ़ाएंगे।


Edited by Prashant Kumar
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