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पांच महीने की गर्भवती महिला अंकिता गौर ने किया हैरान, 62 मिनट में पूरी की मैराथन रेस

अंकिता गौर
अंकिता गौर
Vivek Goel
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टीसीएस वर्ल्‍ड 10के बेंगलुरु 2020 की सबसे प्रेरणादायी कहानियों में से एक है कि पांच महीने की गर्भवती महिला ने सिर्फ 62 मिनट में रेस पूरी की। इनका नाम अंकिता गौर है, जिन्‍होंने रविवार को टीसीएस वर्ल्‍ड 10के रन पूरी की। अंकिता गौर पिछले 9 सालों से लगातार दौड़ रही हैं। अंकिता गौर का मानना है कि सांस लेना जैसी गतिविधि नैसर्गिक रूप से उनमें आई हैं। अंकिता गौर ने कहा, 'यह ऐसी चीज है, जो मैं पिछले 9 साल से करती आ रही हूं, लगभग रोज। आपको पता है कि आपको उठना है और दौड़ने जाना है। ऐसे भी समय होता है जब आप चोटिल हो या तबीयत ठीक नहीं है, तो आपको पीछे हटना पड़ता है।'

अंकिता गौर ने आगे कहा, 'वरना मैं 9 साल से नियमित रूप से दौड़ रही हूं। यह ऐसी चीज हो गई है, जैसे मेरे लिए सांस लेना। यह मेरे अंदर काफी नैसर्गिक रूप से आई है। असल में दौड़ना काफी सुरक्षित है। गर्भवती होने के दौरान दौड़ना बहुत अच्‍छी एक्‍सरसाइज है। साथ ही अगर आप अमेरिकन काउंसिल ऑफ हेल्‍थ को देखेंगे तो हर जगह बताया गया है कि अगर आप दौड़ते हैं तो बिलकुल ठीक है।' अंकिता गौर पेशे से इंजीनियर हैं। वह 2013 से टीसीएस वर्ल्‍ड 10के में दौड़ती आ रही हैं। अंकिता गौर ने अन्‍य पांच-छह अंतरराष्‍ट्रीय मैराथन जैसे बर्लिन (तीन बार), बोस्‍टन और न्‍यूयॉर्क में भी हिस्‍सा लिया।

अंकिता गौर की डॉक्‍टर भी इस फैसले से खुश

अंकिता गौर ने कहा, 'मैंने ऐप-आधारित रेस का भी लुत्‍फ उठाया। वो बहुत यूजर फ्रेंडली था। एक बार आपने ऐप शुरू की, तो ये आपका समय गिनकर नतीजा बताता था। ऐसा लगता है कि आप असली रेस में हिस्‍सा ले रहे हो।' यह पूछने पर कि इस साल के इवेंट में हिस्‍सा लेने के लिए कैसे तैयारी की तो अंकिता गौर ने कहा, 'मैं रोजाना करीब 5-8 किमी हल्‍की दौड़ करती हूं, बहुत धीमे। मैं दौड़ती हूं और पैदल चलती हूं व ब्रेक लेती हूं क्‍योंकि अब मैं पांच महीने गर्भवती हूं, इसलिए मेरा शरीर पहले की तुलना में काफी अलग है। पहले तो मैंने टीसीएस 10के में मेडल जीते हैं। मगर इस बार नहीं क्‍योंकि मुझे ब्रेक लेने पड़े व पैदल चलना पड़ा।'

इस रेस में हिस्‍सा लेने की बात गाइनेकोलॉजिस्‍ट को पता चली तो उनका क्‍या रिएक्‍शन था, इसके जवाब में अंकिता गौर ने कहा, 'मेरी डॉक्‍टर ने कहा कि यह बहुत स्‍वस्‍थ है। उन्‍होंने तो मुझे आगे जाने और दौड़ने के लिए प्रोत्‍साहित भी किया। उन्‍होंने मुझे तेज नहीं दौड़ने की सलाह दी। मुझे कोई परेशानी नहीं हुई, इसलिए मुझे दौड़ने के लिए स्‍वीकृति मिली। पिछले तीन साल से मेरे साथ रह रही मेरी फिजियोथेरेपिस्‍ट ने मुझे धीमे दौड़ने के लिए प्रोत्‍साहित किया क्‍योंकि यह मेरे और बेबी दोनों के लिए काफी अच्‍छी चीज है।'

अंकिता गौर की मां को शुरूआत में नहीं था भरोसा

परिवार का क्‍या रिएक्‍शन था, इसके जवाब में अंकिता गौर ने कहा, 'शुरूआत में मेरी मां को पूरा भरोसा नहीं था। मैं यह जरूर कहूंगी कि वो मुझै खेल से जुड़े रहने के लिए हमेशा प्रोत्‍साहित करती रही हैं। इसलिए जब मैंने उन्‍हें कहा कि डॉक्‍टर ने इजाजत दे दी तो फिर वह भी मान गईं। मेरे पिता हमेशा से समर्थन करते रहे हैं। उन्‍हें मुझ पर गर्व है कि मैं अब भी दौड़ रही हूं और वह खुद भी खिलाड़ी रह चुके हैं। तो वह मेरा साथ देते हैं। इसके साथ ही मेरे पति भी काफी साथ देते हैं और हमेशा मेरे साथ रहते हैं। जब हम डॉक्‍टर के पास गए तो मेरे साथ थे। इसलिए मैं कहती हूं कि मैं इस मामले में काफी भाग्‍यशाली हूं।'


Edited by Vivek Goel
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