25 जून 1983 वह दिन था जब भारत ने लॉर्ड्स के मैदान पर पहली बार वर्ल्ड कप का खिताब जीतकर अपने देश को गौरवान्वित किया था। इस टीम का नेतृत्व 24 वर्षीय कपिल देव कर रहे थे, जो अब तक के वर्ल्ड कप इतिहास में खिताब जीतने वाले सबसे युवा कप्तान हैं।
भारतीय टीम जब इस टूर्नामेंट में खेल रही थी तो यह किसी ने नहीं सोचा था कि भारत नॉकआउट में भी पहुंच सकती है। लेकिन उन्होंने शानदार प्रदर्शन करके और पिछले दो वर्ल्ड कप की विजेता टीम वेस्टइंडीज को फाइनल में हराकर खिताब पर कब्जा किया।
आइए जानते हैं कि 1983 के फाइनल में वेस्टइंडीज को हराकर भारत को पहली बार वर्ल्ड कप का खिताब देने वाले खिलाड़ी अब कहाँ हैं ?
#11. बलविंदर संधू:
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मध्यम गति के तेज गेंदबाज बलविंदर संधू का अंतरराष्ट्रीय करियर उतना बड़ा नहीं रहा है। उन्होंने वर्ल्ड कप 1983 के फाइनल मैच में 9 ओवरों में 32 रन देकर 2 विकेट चटकाए थे।
पेशेवर क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद बलविंदर संधू ने मुंबई और पंजाब के कोच के रूप में काम किया था। अब वे मुंबई में अपने परिवार के साथ एक शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
#10. सैयद किरमानी (विकेटकीपर):
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सैयद किरमानी ने वर्ल्ड कप 1983 के फाइनल में 43 गेंदों पर मात्र 14 रनों की पारी खेली थी। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने बॉलीवुड में भी अपनी किस्मत आजमाई। वे कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय चयन समिति के अध्यक्ष पद पर भी रह चुके हैं। अब वे विभिन्न समाचार चैनलों में क्रिकेट मैचों का विश्लेषण करते नजर आते हैं।
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#9. मदन लाल:
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मध्यम गति के तेज गेंदबाज मदन लाल ने वर्ल्ड कप 1983 के फाइनल मैच में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने बल्लेबाजी करते हुए 17 रन बनाए थे, जबकि गेंदबाजी करते हुए 12 ओवरों में 31 रन देकर 3 विकेट चटकाए थे।
संन्यास लेने के बाद उन्होंंने वर्ल्ड कप 1996 के समय यूएई टीम को ट्रेनिंग दिया। बाद में 1996 से 1997 तक वे भारत के मुख्य कोच भी रह चुके हैं। अब वे दिल्ली के सीरी फोर्ट स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में क्रिकेट अकादमी चलाते हैं।
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#8. रोजर बिन्नी:
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रोजर बिन्नी में वर्ल्ड कप 1983 के फाइनल में किफायती गेंदबाजी करते हुए 10 ओवरों में 23 रन देकर मात्र एक विकेट चटकाए थे। वे इस टूर्नामेंट में भारत की ओर से सबसे सफल गेंदबाज थे। उन्होंने इस टूर्नामेंट में कुल 18 विकेट हासिल किए थे।
रोजर बिन्नी साल 2007 में बंगाल के कोच बनने से पहले कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के प्रशासक बने थे। इसके बाद वे 27 सितंबर, 2012 को भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता बने। अभी वे कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े हुए हैं।
#7. कीर्ति आजाद:
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कीर्ति आजाद फाइनल मैच में शून्य पर पवेलियन लौट गए थे। उनके पिता भागवत झा आज़ाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री थे। पेशेवर क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने भी राजनीति में कदम रखा। वे दिल्ली के गोल मार्केट से विधायक भी रह चुके हैं। साल 2014 में वे बीजेपी से दरभंगा सीट पर चुनाव लड़कर लोकसभा सांसद भी बने। साल 2019 में वे कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा चुनाव लड़े और हार गए।
#6. संदीप पाटिल:
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संदीप पाटिल ने वर्ल्ड कप 1983 के फाइनल में 27 रनों की पारी खेली थी। संन्यास लेने के बाद संदीप पाटिल ने केन्या टीम के कोच पद का जिम्मा संभाला। उनके कार्यकाल में ही केन्या वर्ल्ड कप 2003 के सेमीफाइनल तक पहुंची थी। वे साल 2012 से 2016 तक बीसीसीआई के चयन समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
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#5. यशपाल शर्मा:
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यशपाल शर्मा वर्ल्ड कप 1983 के फाइनल मैच में 11 रन बनाकर आउट हो गए थे। उन्होंने उस टूर्नामेंट में कुछ यादगार पारियां भी खेली। उन्होंने पहले ही मैच में वेस्टइंडीज के खिलाफ 89 रनों की पारी खेली। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भी उन्होंंने 61 रनों की शानदार पारी खेली थी।
संन्यास लेने के बाद उन्होंने कुछ दिनों तक अंपायरिग भी की। इसके बाद वे भारतीय टीम के चयनकर्ता भी रहे। फिलहाल वह अपने परिवार के साथ खुशनुमा जिंदगी बिता रहे हैं।
4. मोहिंदर अमरनाथ:
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ऑलराउंडर मोहिंदर अमरनाथ ने वर्ल्ड कप 1983 में भारत की जीत में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने फाइनल मैच में 26 रनों की पारी खेली और गेंदबाजी करते हुए 7 ओवरों में 12 रन देकर 3 विकेट चटकाकर मैन ऑफ द मैच बने।
संन्यास लेने के बाद मोहिंदर अमरनाथ ने 1990 दशक के शुरुआत में बांग्लादेश टीम के साथ काम किया था, लेकिन वर्ल्ड कप 1996 में टीम के क्वालीफाई न कर पाने के कारण उन्हें से हटा दिया गया था। वह वर्तमान में विभिन्न समाचार चैनलों के लिए क्रिकेट विश्लेषक के रूप में नजर आते हैं।
#3. कृष्णमाचारी श्रीकांत:
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कृष्णमाचारी श्रीकांत ने वर्ल्ड कप 1983 के फाइनल में 37 रनों की पारी खेली थी। वर्ल्ड कप 2011 के समय वे भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता थे। वे अब कमेंटेटर की भूमिका में नजर आते हैं।
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#2. सुनील गावस्कर:
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सुनील गावस्कर वर्ल्ड कप 1983 के फाइनल में मात्र 2 रन पर ही आउट हो गए। संन्यास के बाद उन्होंने एमसीए के उपाध्यक्ष, अंतरिम बीसीसीआई अध्यक्ष (आईपीएल 2014 के दौरान) आईसीसी मैच रेफरी, आईसीसी क्रिकेट कमेटी के अध्यक्ष आदि बड़े पदों की जिम्मेदारियों का निर्वाहन किया। आजकल वे क्रिकेट मैचों में कमेंट्री करते हुए नजर आते हैं।
#1. कपिल देव (कप्तान):
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कपिल देव ने वर्ल्ड कप 1983 में 8 मैचों में 60 के औसत से 303 रन बनाए थे। इसके अलावा गेंदबाजी करते हुए भी उन्होंने 13 विकेट लिए थे। उन्होंने ज़िम्बाब्वे के खिलाफ 175 रनों की ऐतिहासिक पारी भी खेली थी।
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आज वे एक सफल बिजनेसमैन और कमेंटेटर हैं। वह चंडीगढ़ और पटना में कुल ग्यारह रेस्तरां व एक होटल के मालिक हैं। वे मैचों के दौरान कमेंटेटर की भूमिका में भी नजर आते हैं। साथ ही वे कई क्रिकेट चैनलों के लिए विशेषज्ञ के रुप में भी नजर आते हैं।