FIFA World Cup: 10 ऐसे रिकॉर्ड जो शायद कभी न टूट पाएं

रूस के 11 शहरों और 12 स्टेडियम में 14 जून से 32 देशों के बीच शुरू होने जा रहा है फ़ुटबॉल का महासंग्राम, जिसका जादू पूरी दुनिया में अभी से ही चढ़ चुका है। इस टूर्नामेंट में कई शानदार खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से ट्रॉफ़ी पर कब्ज़ा जमाने के इरादे से उतरेंगे। एक महीने तक चलने वाले इस खेल की सबसे बड़ी जंग में कई बड़े रिकॉर्ड भी बनते और टूटते नज़र आएंगे। लेकिन कुछ ऐसे भी रिकॉर्ड्स हैं जिन्हें तोड़ पाना बेहद मुश्किल है और संभव है कि इस बार भी वे रिकॉर्ड्स बरक़रार रहें। एक नज़र उन 10 बड़े रिकॉर्ड्स पर डाल लेते हैं जिनको तोड़ पाना नमुमकिन तो नहीं लेकिन मुश्किल ज़रूर है।

#10 एक मैच में सबसे ज़्यादा दर्शकों का जमावड़ा

वर्ल्डकप के किसी एक मैच में जो आधिकारिक तौर पर किसी मैदान में सबसे ज़्यादा दर्शकों की संख्या दर्ज की गई है वह है 1 लाख 73 हज़ार 830 लेकिन इसे कुछ लोग 1 लाख 99 हज़ार 854 भी मानते हैं। क़रीब 2 लाख लोगों की उपस्थिति में ये मुक़ाबला 1950 में एस्टाडियो डी मराकाना में खेला गया था। ये मुक़ाबला जूल्स रिमेट कप के लीग दौर का ख़िताबी मैच था, जहां ब्राज़ील और उरुग्वे आमने सामने थे। ब्राज़ील को चैंपियन बनने के लिए सिर्फ़ ड्रॉ की ज़रूरत थी तो उरुग्वे को चैंपियन बनने के लिए जीत की दरकार थी। मैच में शुरू से ही ब्राज़ील का पलड़ा भारी था और कहीं से भी उरुग्वे की जीत की संभावना तक नहीं थी लेकिन 0-1 से पीछे चलते हुए उरुग्वे ने सभी को चौंकाते हुए 2-1 से मैच और ख़िताब अपने नाम कर लिया। मैच के साथ साथ क़रीब 2 लाख लोगों का मैदान में होना अपने में ख़ास था, और ये एक ऐसा रिकॉर्ड है जो शायद ही क़रीब टूट पाए। क्योंकि तब स्टैंड्स में कुर्सियों की जगह सीढ़ियां होती थीं, जहां ज़्यादा से ज़्यादा लोग बैठ सकते थे। लेकिन अब सभी स्टेडियम में कुर्सियां आ गईं हैं इसलिए इतनी तादाद में दर्शकों का आना संभव नहीं। फ़िलहाल दुनिया में सबसे ज़्यादा दर्शकों को बैठने की झमता उत्तर कोरिया के योंगपयांग में हैं लेकिन वह भी डेढ़ लाख है, यानी जब तक कि 2 लाख से ज़्यादा दर्शकों के बैठने की क्षमता वाला स्टेडियम तैयार नहीं किया जाता 1950 में बना ये रिकॉर्ड बरक़रार रहेगा।

#9 वर्ल्डकप क्वालिफ़ायर मैच में सबसे लंबा निलंबन

फ़ुटबॉल के इतिहास की शायद ये सबसे बड़ी और ख़राब ग़लती होगी जिसकी सज़ा भी फ़ीफ़ा की ओर से बेहद कड़ी दी गई। 1990 में हुए चिली और ब्राज़ील के बीच क्वालिफ़ायर मुक़ाबले के दौरान चिली के गोलकीपर रोबर्टो रोजास को फ़ीफ़ा ने उनकी हरकत के लिए आजीवन निलंबित कर दिया था। हालांकि बाद में सज़ा को कम करते हुए 12 सालों का निलंबन कर दिया गया था। दरअसल, मैच के दौरान रोजास ने अपने दस्तानों के अंदर रेज़र छुपा रखा था, और जैसे ही एक ब्राज़ील के फ़ैन ने फ़्लेयर फेंका तो रोजास ने ख़ुद को रेज़र से काट लिया था। इतना ही नहीं इसके बाद चिली के कोच ऑर्लैन्डो अरावेना ने रोजास और टीम डॉक्टर को पिच पर मौजूद रहने और खेल को बाधित करने के लिए बोलते रहे। ताकि फिर नतीजा ब्राज़ील की जगह उनके पक्ष में चला जाए। हालांकि अब जब तकनीक इतना ज़्यादा बढ़ गई है तो ये बेहद मुश्किल है कि कोई फिर दोबारा ऐसी करतूत कर पाए। हमें भी उम्मीद है कि भविष्य में कोई दूसरा खिलाड़ी इस तरह की हरकत नहीं करेगा और खेल भावना को ख़राब नहीं करेगा।

#8 सबसे कम उम्र के कोच जिन्होंने पूरी टीम को संभाला

सबसे कम उम्र में कोच बनने का वर्ल्ड रिकॉर्ड अर्जेंटीना के पूर्व कोच जुआन जोस ट्रामुटोला के नाम है, जिन्होंने 1930 वर्ल्डकप में 27 साल की उम्र में टीम की कोचिंग की ज़िम्मेदारी निभाई थी। जब अर्जेंटीना ने 1930 विश्वकप में अपना पहला मैच फ़्रांस के ख़िलाफ़ खेला तो टीम के कोच जुआन जोस तब 27 साल और 267 दिन के थे। उन्होंने अपनी कोचिंग के दौरान अर्जेंटीना को 1929 के कोपा अमेरिका कप का चैंपियन बनाया और 1930 में हुए पहले विश्वकप में टीम को रनर अप बनाया था। किसी भी कोच का सपना होता है कि वह वर्ल्डकप में ये ज़िम्मेदारी निभाए और जुआन जोस ने इस काम को अंजाम सिर्फ़ 27 साल की उम्र में देकर सभी को हैरान कर दिया था। आज 88 सालों बाद भी जुआन जोस के रिकॉर्ड को तोड़ पाना तो दूर कोई उनके आस पास भी नहीं आ पाया है। इसकी वजह यही है कि कोई भी टीम कोच के लिए ऐसे शख़्स की तलाश करती है जो काफ़ी अनुभवी और होशियार हो न कि जुआन जोस जैसा युवा।

#7 किकऑफ़ के ज़रिए वर्ल्डकप में सबसे तेज़ गोल

तुर्की के स्टार स्ट्राइकर हकान सुकुर के नाम फ़ीफ़ा वर्ल्डकप इतिहास के सबसे तेज़ किकऑफ़ गोल का रिकॉर्ड दर्ज है। द बुल ऑफ़ बोसफ़ोरस के नाम से मशहूर सुकुर के नाम कुल 51 गोल दर्ज हैं। क्लब फ़ुटबॉल में भी सुकुर ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 260 गोल दागे हैं। हकान सुकुर ने फ़ीफ़ा वर्ल्डकप इतिहास का सबसे तेज़ किकऑफ़ गोल सिर्फ़ 10.8 सेकंड्स में करते हुए सभी को हैरान कर दिया था। इधर रेफ़री ने मैच शुरू होने की सिटी बजाई और उधर पलक झपकते ही सुकुर ने गेंद को गोल पोस्ट में पहुंचा दिया। सुकुर से पहले ये रिकॉर्ड चेकोसोलोवाकिया के वाकलव मासेक के नाम था जिन्होंने 16 सेकंड्स में गोल किया था।

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हालांकि इस बार 2018 के फ़ीफ़ा वर्ल्डकप क्वालिफ़ायर में बेलजियम के क्रिस्टियान बेंटेक ने गिब्राल्टर के ख़िलाफ़ सिर्फ़ 8.1 सेकंड्स में गोल दाग कर सनसनी मचा दी थी, लेकिन सवाल ये है कि क्या बेंटेक वर्ल्डकप में ये कारनामा दोहराते हुए सुकुर के रिकॉर्ड को तोड़ पाएंगे ?

#6 पहली बार विश्वकप में क्वालिफ़ाई करते ही वर्ल्डकप ट्रॉफ़ी पर कब्ज़ा जमाने वाले दो देश

इटली और उरुग्वे ऐसे दो देश हैं जिन्होंने अपने पहले विश्वकप में ही चैंपियन बनने का सौभाग्य हासिल किया। उरुग्वे ने जहां 1930 में खेले गए पहले वर्ल्डकप को जीता तो 1934 में पहली बार क्वालिफ़ाई करने वाली इटली भी उसी साल चैंपियन बन गई। इस साल जो देश पहली बार वर्ल्डकप में खेल रहे हैं वह हैं पनामा और आइसलैंड, अब सवाल ये है कि क्या इन दोनों में से कोई उरुग्वे या इटली जैसा कारनामा दोहरा पाएगा ? हालांकि ये बेहद मुश्किल है क्योंकि ये दोनों ही देशों के लिए एक जीत भी किसी उलटफेर से कम नहीं कहलाएगी। आपको ये भी बताते चलें कि इस बार इटली वर्ल्डकप के क्वालिफ़ाई नहीं कर पाई है जो एक बड़ा झटका है।

#5 वर्ल्डकप क्वालिफ़ाइंग मैच में सबसे बड़ा जीत का अंतर

ये रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के नाम दर्ज है जिन्होंने क्वालिफ़ाइंग मैच में अमेरिकन सामोआ के ख़िलाफ़ 2002 के वर्ल्डकप क्वालिफ़ायर्स में 31-0 से जीत दर्ज की थी। सिर्फ़ ये जीत का सबसे बड़ा अंतर ही नहीं है बल्कि ऑस्ट्रेलिया के आर्ची थॉमसन ने उस मैच में 13 गोल दागे थे जो किसी भी अंतर्राष्ट्रीय मैच में सबसे ज़्यादा गोल करने का विश्व कीर्तिमान है। थॉमसन के अलावा डेविड ड्रिलिक ने भी 8 गोल किए थे जो पहले विश्व युद्ध के बाद से किसी भी अंतर्राष्ट्रीय मैच में दूसरा सर्वाधिक गोल है। इन रिकॉर्ड्स का टूट पाना बेहद मुश्किल नज़र आता है, क्योंकि अब फ़ीफ़ा ने भी छोटी टीमों को सीधे क्वालिफ़ाइंग न खिलवा कर एक प्रीलिमनेरी राउंड से गुज़रवाती हैं ताकि इस तरह के इकतरफ़े मुक़ाबले की गुंजाइश कम हो।

#4 सबसे तेज़ लाल कार्ड का रिकॉर्ड

1986 वर्ल्डकप में स्कॉटलैंड के ख़िलाफ़ उरुग्वे के जोस बतिस्ता को सिर्फ़ 56 सेकंड्स के बाद ही लाल कार्ड दिखाते हुए मैच से बाहर कर दिया गया था। किसी भी विश्वकप में किसी को इतनी जल्दी रेड कार्ड देने का ये वर्ल्ड रिकॉर्ड भी है, जो अब तक बरक़रार है। उरुग्वे को वर्ल्डकप में क्वालिफ़ाई कराने में जोस बतिस्ता का बहुत बड़ा किरदार था और उरुग्वे के फ़ैस को उम्मीद थी कि जोस इसी प्रदर्शन को दोहराते हुए टीम को वर्ल्डकप में भी दूर तक ले जाएंगे। लेकिन बतिस्ता अपने ग़ुस्से पर कंट्रोल नहीं कर पाए, उन्होंने विपक्षी मिडफ़िल्डर गोर्डन स्ट्राचन को जानबूझकर स्लाइड करते हुए ज़ोरदार धक्का दे दिया था। रेफ़री ने बतिस्ता की इस हरकत पर तुरंत ही उन्हें रेड कार्ड दिखाते हुए बाहर कर दिया। हालांकि इससे कहीं तेज़ सेंड ऑफ़ क्लब फ़ुटबॉल में भी देखने को मिले हैं जिसमें किकऑफ़ के सिर्फ़ 2 सेकंड्स बाद ही ली टॉड को मिला रेड कार्ड सबसे ऊपर है। लेकिन वर्ल्डकप में बतिस्ता का रिकॉर्ड टूटने की गुंजाइश कम ही लगती है।

#3 फ़ीफ़ा वर्ल्डकप के मैच में सबसे कम उम्र के रेफ़री

1958 के फ़ीफ़ा वर्ल्डकप में हुए मुक़ाबले में स्पेन के रेफ़री जुआन गर्दीज़ाबल सिर्फ़ 24 साल और 193 दिन के थे। इस उम्र में वह फ़ीफ़ा विश्वकप के किसी मैच में रेफ़री की भूमिका अदा करने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के रेफ़री बन गए थे और ये रिकॉर्ड अभी भी क़ायम है। इस मैच में फ़्रांस ने पराग्वे को 7-3 से रौंद डाला था, इसके बाद वह क्वार्टर फ़ाइनल में फ़्रांस और उत्तरी आयरलैंड के ख़िलाफ़ हुए मैच में भी रेफ़री थे और इत्तेफ़ाक़ से उस मैच में 4-0 से फ़्रांस ने मैच अपने नाम किया था। इस बार रूस में होने वाले वर्ल्डकप में सबसे युवा रेफ़री रिकार्डो मोंटेरो होंगे लेकिन उनकी उम्र 32 साल है। यानी इस साल भी स्पेन के जुआन गर्दीज़ाबल का रिकॉर्ड नहीं टूटने वाला।

#2 किसी एक वर्ल्डकप में सबसे कम मैच खेलने वाला देश

वर्ल्डकप में सबसे कम मैच खेलने का रिकॉर्ड इंडोनेशिया के नाम है, 1938 वर्ल्डकप में इंडोनेशिया का नाम डच इस्ट इंडीज़ था और तब उन्हें सिर्फ़ एक मैच खेलने का मौक़ा मिला था। 1938 में हुए फ़ीफ़ा वर्ल्डकप में क्वालिफ़ाई करने के बाद इंडोनेशिया को पहले ही मैच में हंगरी के हाथों 6-0 से हार झेलनी पड़ी थी। तब का फ़ॉर्मेट अलग था लिहाज़ा इस हार के साथ ही इंडोनेशिया को टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ गया था। हालांकि इसके बाद फ़ीफ़ा ने फ़ॉर्मेट में बदलाव करते हुए इसे ग्रुप स्टेज कर दिया है, यानी कि हर एक टीम को कम से कम 3 मैच तो खेलने ही हैं। ऐसे में इंडोनेशिया का ये रिकॉर्ड भी इस फ़ॉर्मेट में अब टूटने से रहा।

#1 किसी एक वर्ल्डकप के मैच से सबसे ज़्यादा चेतावनी झेलने वाला खिलाड़ी

फक्रोशिया के जोसिप सिमुनिक के नाम 2006 फ़ीफ़ा वर्ल्डकप में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ कुल तीन बार (61’, 90’ और 93’) मैच रेफ़री ने पीला कार्ड दिखाया था। इस तरह किसी एक खिलाड़ी के नाम एक ही मैच में सबसे ज़्यादा बार चेतावनी का रिकॉर्ड जोसिप के नाम है। हालांकि मैच के आधिकारिक रिपोर्ट कार्ड में पहले तीन पीले कार्ड का ज़िक्र था और फिर बाद में 90वें मिनट वाले कार्ट को हटा दिया गया और इसे दो कर दिया गया। ये अब तक नहीं पता चल पाया है कि आख़िर ऐसा क्यों किया गया। लगता तो ऐसा ही है कि क्रोशिया के जोसिप सिमुनिक के नाम दर्ज ये रिकॉर्ड आगे भी क़ायम रहेगा।