बॉडी बिल्डिंग से जुड़े 10 बड़े भ्रम और सच्चाई

स्टाइल और फैशन के इस दौर में सभी लोग एक ऐसी बॉडी पाना चाहते हैं जिसे लोग पसंद करें, जिसकी लोग तारीफ करें। और इसी कोशिश में लोग रुख करते हैं बॉडी बिल्डिंग का। हालांकि बॉडी बिल्डिंग से जुड़े कई अंधविश्वास हैं जिनके बारे में लोग नहीं जानते। तो आइये आपको बताते हैं बॉडी बिल्डिंग से जुड़े कुछ बड़े भ्रम के बारे में।

#1 बिना स्टेरॉइड के भी बन सकती है प्रो बॉडी बिल्डर्स के जैसी बॉडी

आप बिना स्टेरॉइड लिए भी बॉडी बिल्डर्स के जैसी भारी भरकम बॉडी बना सकते हैं। ये केवल एक अंधविश्वास है। बिना हार्मोन्स से छेड़छाड़ किए प्रो बॉडी बिल्डर्स के जैसी बॉडी पाना संभव नहीं है। इसके लिए स्टेरॉइड काम में आते हैं। आपका ट्रेनर सप्लीमेंट बेचने के लिए आपको हमेशा बिना स्टेरॉयड बॉडी बिल्डर जैसी बॉडी बनने का आश्वासन दे सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है।

#2 एक बड़े शरीर के लिए आपको लेनी होगी सुपर हाई कैलोरी डाइट

एक बड़ा शरीर पाने के लिए आपको लेनी होगी सुपर हाई कैलोरी डाइट, लेकिन तब आप मिशेलिन मैन के भाई से कम नहीं लगेंगे। अगर आप एक बड़ा लेकिन पतला शरीर चाहते हैं तो सुपर हाई कैलोरी डाइट लेने की आपको कोई ज़रुरत नहीं। रिसर्च के मुताबिक़ सुपर हाई कैलोरी से बने नए टिशूज़ में से 65% केवल फैट होता है। और लगभग 20% मसल मास ही बन पाता है। तब तक सुपर हाई कैलोरी से दूर ही रहे जब तक आप बहुत ज़्यादा लीन नहीं हैं और आपको वज़न बढ़ाने में कोई समस्या नहीं है।

#3 जितना ज़्यादा वर्कआउट, उतना ज़्यादा असर

ये सबसे ज़्यादा नुकसान करने वाले अंधविश्वासों में से एक है। 95 प्रतिशत प्रो आपको यही कहेंगे कि उनकी सबसे बड़ी गलती रही है ज़रूरत से ज़्यादा वर्कआउट करना। जब आप अपने मसल्स पर बार-बार ज़रुरत से ज़्यादा काम करते हैं तो नतीजा शून्य ही रहता है, उल्टा नुकसान होने की संभावना भी रहती है। ये ज़रूरी है कि आप अपने शरीर को आराम भी दें और वर्कआउट भी करें। मसल्स को ठीक होने में समय लगता है और अगर आप बिना समय दिए वर्कआउट करते ही जायेंगे तो उसके फायदे कम नुक्सान ज़्यादा होंगे।

#4 ज़्यादा देर तक वर्कआउट करना बेहतर है

एक्सरसाइज़ के 20-30 सेट्स मारना ज़रूरी नहीं है। सही तरीके से किये गए 10 सेट्स भी अच्छा असर दिखा सकते हैं। एक रिसर्च के अनुसार मसल्स को अंदर से तोड़ने के लिए एक सेट भी काफी है। आप रेपीटीशन्स कर सकते हैं। रेपीटीशन्स में धीरे धीरे उठाने वाला वज़न घटाते रहिये। रेपीटीशन्स आप तब तक कर सकते हैं जब तक आप कर पाएं या फिर जब वज़न ख़त्म हो जाए। आपको 20-30 सेट करने की कोई ज़रुरत नहीं।

#5 हर अंग को हफ्ते में एक बार समय देने से शरीर नहीं बढ़ेगा

अगर आप ढंग से वर्कआउट करते हैं तो आपके मसल्स को टूट कर ठीक होने में 5-10 दिन का समय लगता है। इसलिए बेहतर होगा कि शरीर के हर अंग पर आप कम से कम एक-एक हफ्ते बाद ध्यान दें। ये केवल एक अंधविश्वास है कि अगर आप एक अंग को हफ्ते में एक ही बार समय देंगे तो शरीर नहीं बढ़ेगा।

#6 सेट्स के बीच में केवल 45 सेकंड का आराम लें

ये सच है, लेकिन तब जब आप हृदय की सेहत या बॉडी फैट घटाना चाह रहे हैं। लेकिन अगर आप मसल्स बना रहे हैं तो आपको अपने मसल्स को ठीक होने के लिए समय देना होगा। अगर आप ज़्यादा वज़न उठा रहे हैं जोकि मसल्स बनाने के लिए ज़रूरी है तो आपको हर सेट के बीच में कम से कम 2-3 मिनट का आराम ज़रूर लेना चाहिए। लेकिन ये केवल तब करना है जब आप बहुत एक्सट्रीम ट्रेनिंग कर रहे हैं। और एक्सट्रीम ट्रेनिंग आप रोज़ाना नहीं कर सकते।

#7 अगर आप रोज़ 100 सिट-अप्स करें तो आपको पतला मिडसेक्शन (पेट) मिलेगा

केवल एक हिस्से का फैट कम करने जैसी कोई चीज़ नहीं होती। हज़ारों सिट-अप्स करने के बाद भी आपके एब्डोमिनल मसल्स तो मज़बूत बन जाएंगे लेकिन उस हिस्से का फैट कम नहीं होगा। जब तक आप कैलोरी कम नहीं करेंगे तब तक फैट कम नहीं होगा। इसलिए रोज़ाना 100 सिटअप्स करना और कुछ नहीं केवल एक अंधविश्वास है।

#8 महिलाओं को पुरुषों से अलग वर्कआउट की ज़रुरत है

माइक्रोस्कोपिक स्तर पर महिलाओं और पुरुषों के मसल्स टिशू में कोई अंतर नहीं है। दोनों में हार्मोन्स की मात्रा का अंतर ज़रूर है जोकि मसल्स का अंतर पैदा करती है। इसीलिए ऐसा कोई कारण नहीं है कि महिलाओं और पुरुषों को अलग अलग वर्कआउट की ज़रुरत है। दोनों एक ही तरीके का वर्कआउट कर सकते हैं अगर दोनों का मकसद एक है: फिटनेस।

#9 स्टेरॉइड जैसा असर दिखाने वाले सप्लीमेंट्स, जोकि सेफ हैं

एक बात साफ़ है स्टेरॉइड के जैसा असर दिखाने वाली एक ही चीज़ हो सकती है, वो हैं दूसरे स्टेरॉयड, और कुछ नहीं। कोई भी सप्लीमेंट किसी स्टेरॉइड की तरह काम नहीं करता। सप्लीमेंट का असर शरीर पर शानदार हो सकता है लकिन स्टेरॉइड जितना नहीं। बहरहाल, ये तो सभी जानते हैं कि स्टेरॉइड की तुलना में सप्लीमेंट ज़्यादा सुरक्षित है।

#10 वर्कआउट बंद करते ही फैट में बदल जाएंगे मसल्स

इस बात को कोई भी आधार नहीं है। जिस तरह सोना पीतल में तब्दील नहीं होता उसी तरह मसल्स भी फैट नहीं बनते। मसल्स बनते हैं सैल से, जबकि फैट लिपिड का स्टोरेज मात्र होता है। ऐसे में एक चीज़ दूसरी चीज़ में तब्दील होने की कल्पना कैसे की जा सकती है। अगर आप एक्सरसाइज़ करना बंद कर देते हैं और मसल्स पर ज़्यादा ज़ोर नहीं देते तो आपके मसल्स दूसरी शेप ले लेते हैं, या फिर सिकुड़ जाते हैं।

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