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Adho Mukha Svanasana (अधोमुखश्वानासन)

आसन के बारे में

ये एक ऐसा आसन है जिसे बड़ी आसानी से किया जा सकता है और ये सूर्य नमस्कार आसन के अंतर्गत आने वाले बारह आसनों में से एक है। इस आसन को करने के लिए आपको कोई अधिक मेहनत या पहले से जानकार होना आवश्यक नहीं है। ये आसन अपने नाम के अनुसार ही किया जाता है।

इस आसन के नाम को संधि विच्छेद करने पर हमें तीन शब्द स्पष्ट रूप से प्राप्त होते हैं। वे हैं अधो, मुख, और श्वान। इसमें अधो का अर्थ है सामने, मुख को मुँह या चेहरे के नाम से सम्बोधित किया जा सकता है और श्वान का अर्थ है कुत्ता या डॉग (आप जिसे भी बोलने में बेहतर महसूस करें)। इस आसन में आप कुत्ते के समान आगे की तरफ झुकते हैं और ये एक प्रतीतात्मक रूप से एक श्वान के जैसा रूप लेता है जिसकी वजह से इस आसन का ये नाम है।


आसन को करने के लिए आवश्यक चीजें

इस बात का ध्यान रखें कि योग को कभी भी टाइट अर्थात शरीर से ज्यादा चिपके हुए कपड़ों के साथ ना करें। इससे कपड़ों के साथ साथ आसन के प्रभाव को प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न होती है। योग के लिए आप ढीले ढाले कपड़े ही पहनें। यदि संभव हो तो योग के किसी भी आसन को खाली पेट करें। इसे सुबह करें तो इसका प्रभाव और भी अच्छा रहता है लेकिन अगर आप किन्हीं अपरिहार्य कारणों से इसे सुबह नहीं कर सकते हैं तो इन्हें उस समय करें जब आपके खाने और आसन के बीच में चार से छह घंटे का अंतर हो चुका हो।

ये बात सदैव ध्यान में रखें कि आप अपने शरीर के सभी अंगों और आंतरिक नसों पर काम करने वाले हैं। शरीर में मौजूद नाड़ियों पर भी इसका प्रभाव होता है और वो बेहद सूक्ष्म होती हैं। आप किसी भी प्रकार से उन्हें परेशानी में नहीं लाना चाहेंगे। योग के दौरान जमीन का इस्तेमाल बहुत होता है। इसलिए अगर आप अपने घर पर टाइल्स या किसी पार्क में इस या किसी भी आसन को कर रहे हों तो ये प्रयास करें कि आपके पास एक चटाई अवश्य हो। यदि चटाई संभव नहीं है तो योग मैट ले लें या फिर ऐसे किसी कपड़े का इस्तेमाल करें जिसके कारण फिसलन का ड़र ना हो। योग के दौरान अपने आस पास पानी से भरी बोतल रखें या फिर तांबे के बर्तन में पानी रखें और यदि आवश्यकता हो तो ही उसका सेवन करें। यदि आप इन चीजों को कर चुके हैं तो आइए आपको आसन के बारे में बताते हैं।


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अधोमुखश्वानासन से पहले किए जाने वाले आसन

जिस तरह से एक्सरसाइज से पहले स्ट्रेचिंग करना आवश्यक होता है ताकि आपका शरीर अपनी बंदिशों से आगे बढ़कर आनेवाले बदलावों को आसानी से स्वीकार कर सके उसी प्रकार से अधोमुखश्वानासन से पहले भी कुछ आसन कर लेने चाहिए। ये आपके शरीर में खून के बहाव को ठीक कर देते हैं जिसकी वजह से आसन करते समय आपको चोट लगने या दर्द होने की अवस्था से दो चार ना होना पड़े।

आप धनुरासन और दण्डासन कर सकते हैं ताकि आपके शरीर में ऊर्जा का संचार हो जाए और आपको एक ताजगी का एहसास हो। ये बात ध्यान रखें कि खून का बहाव जब दिमाग तक सही रूप से होता है तो आपको काफी अच्छा महसूस होता है और अधोमुखश्वानासन से पहले किए जाने वाले आसनों एवं इस आसन के दौरान भी हम यही प्रयास करते हैं।


अधोमुखश्वानासन को प्रक्रिया वर कैसे किया जाना चाहिए


1. इसके लिए आप सबसे पहले जमीन पर पेट के बल लेट जाएं। इस समय आप अपने शरीर को ढ़ीला छोड़ दें। ये स्थिति हर योग आसन पर लागू होती है।

2. अब अपनी हथेलियों और पंजों को जमीन पर रखते हुए शरीर को ऊपर की तरफ उठाएं। इस दौरान आपका

शरीर एक मेज वाली अवस्था में आ जाना चाहिए जहाँ आपका धढ़ एक मेज के समान और हाथ एवं पैर उसके

चार स्तंभों की तरह हो जाएं।

3. इस स्थिति में रहते हुए पंजों को कमर के समानांतर यानी पैरेलेल रखें और अब एक उलटा वी आकार बनाने

का प्रयास करें।

4. जब शरीर को आप उलटे वी वाले आकार में ले आएं तो अब सर को अपने कंधों के बीच वाली जगह से नीचे ले

जाएं लेकिन इस दौरान आप साँस को अंदर खीचें और अपनी नाभि पर ध्यान केंद्रित करें।

5. इस स्थिति में खुद को शुरुआत में पंद्रह सेकेंड के लिए करें लेकिन जब आप अभ्यस्थ हो जाएं तो इस समय को

तीस सेकेंड कर दें।

6. साँस को छोड़ते हुए मेज वाली स्थिति और फिर अपनी नार्मल स्थिति में आ जाएं।


अधोमुखश्वानासन के बाद किए जाने वाले आसन

इस आसन को करने के बाद आप अर्धपिंचा मयुरासन, चतुरंग दण्डासन या ऊर्ध्व मुख श्वानासन कर सकते हैं। जिस तरह से हर एक्सरसाइज से पहले और बाद में स्ट्रेचिंग करना जरूरी है उसी तरह से लगभग हर योगासन के बाद कुछ आसन करने चाहिए। यदि आप किसी भी आसन को करने का मन नहीं रखते हैं तो आप अधोमुखश्वानासन के बाद शवासन कर सकते हैं।


अधोमुखश्वानासन से होने वाले फायदे

योग आपको निरोग तो रखता ही है लेकिन ये साथ में शरीर को भी कई प्रकार के लाभ देता है जिनमें से

अधोमुखश्वानासन के कारण होने वाले लाभों के बारे में नीचे बताया जा रहा है:

1. शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाए और मन को तरो ताजा करे।

2. ये आसन आपके गले से लेकर कमर तक के सभी अंगों को बेहतर करता है। इस आसन से आपकी रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है, छाती में मौजूद मांसपेशियों को बल मिलता है और फेफड़े की ताकत बढ़ती है।

3. हाथ, कंधों और पैरों की परेशानी से सदा के लिए निजात पाना चाहते हैं तो इस आसन को जरूर करें।

4. चूँकि इस आसन के दौरान सर से लेकर पैर तक सभी अंगों को अपना योगदान देना पड़ता है (जो अमूमन हर

योगासन में होता है) तो उससे मांसपेशियों को ताकत मिलती है और दिमाग में खून का बहाव ठीक होता है।

दिमाग को शरीर का पावरहाउस कहा जा सकता है और उसमें होने वाली परेशानी शरीर को दिक्कत वाली

स्थिति में पहुँचा सकता है।

5. नींद ना आने की बीमारी, थकान और सरदर्द के इलाज में ये आसन बेहद लाभकारी है।इन बातों का ध्यान रखें

हाई ब्लडप्रेशर, आँखों से जुड़ी किसी परेशानी या फिर कंधे में किसी दिक्कत के साथ साथ दस्त से पीड़ित हों तो इस आसन को अपने योगासनों में तब तक शामिल ना करें जब तक आप एकदम फिट नहीं महसूस करते हैं।


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