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Adho Mukha Vrikshasana (अधोमुखवृक्षासन)

आसन के बारे में

इस आसन को करने से आप अपने बैलेंस को बेहतर कर पाएंगे। अगर आपके शरीर में कोई दिक्कत है जिसमें सीधे खड़ा होना संभव नहीं हो पाता है या आपकी रीढ़ की हड्डी में दर्द या झुकाव महसूस होता है तो आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। ये एक आसन कई प्रकार की बीमारियों को दूर रखने में कारगर है।


आसन से पहले क्या जरूरी है

आसन से पहले ये जरूरी है कि आप उस समय उस स्थान पर उपलब्ध हों। ऐसे कई लोग होते हैं जो किसी आसन को कर तो रहे होते हैं लेकिन मानसिक तौर पर वो कहीं और ही विचरण कर रहे होते हैं। ये स्थिति कष्टकारी है और खुद को इस स्थिति में कभी ना आने दें।

आपकी सेहत आपके फैसलों पर निर्भर है और इसलिए आप ऐसा कुछ भी ना करें जिससे नुकसान की अवस्था बन जाए। अगर आप किसी आसन को करने में सक्षम नहीं हैं या आपके अंदर वो कॉन्फिडेंस नहीं है तो उस आसन को किसी भी रूप में ना करें। किसी भी योगासन से पहले एक योग मैट, पानी और आपका पूर्ण ध्यान सबसे ज्यादा जरूरी है।


अधोमुखवृक्षासन से पहले कौन सा आसन करना चाहिए

आप अपने शरीर की स्ट्रेचिंग कर लें। ऐसा करने से शरीर में एक ऊर्जा का प्रवाह होगा जो आपको आनंदित कर देगा। शरीर फिट, आपका मन शांत और आप ऊर्जा से भरपूर हों यही योग का लक्ष्य है। आपको इसे करना चाहिए ताकि आपको बैलेंस के साथ साथ सर में भी खून का बहाव बेहतर करने का मौका मिले। अगर आप इस आसन को करते समय कॉंफिडेंट नहीं हैं तो आपको दीवार का इस्तेमाल करना चाहिए।


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अधोमुखवृक्षासन को नियम वर कैसे करना चाहिए

1. इस आसन की शुरुआत से पहले आप खुद को अधोमुखश्वानासन वाली अवस्था में ले आएं।

2. अधोमुखश्वानासन से जुड़ी सभी क्रियाओं को करें ताकि आपका शरीर अगले चरण में जा सके और बेहतर काम

कर सके।

3. इसके बाद अपने शरीर को एक दीवार के सहारे ले आएं और धीरे धीरे अपने हाथों को जमीन पर लाएं। आपकी हथेलियाँ जमीन पर होनी चाहिए जबकि शरीर में से पैर वाला हिस्सा इस समय जमीन पर ही हो।

4. अब अपने पैरों को ऊपर ले जाने का प्रयास करें और धीरे धीरे एकदम ऊपर ले जाएं। आपको अपने पैरों को उस स्थिति में ले आना है जहाँ आपको अपने पैर से लेकर हाथों तक में एक स्ट्रेच महसूस हो।

5. जब आपके शरीर में एक स्ट्रेच होगा तो इसका अर्थ है कि आप आसन को सही तरह से कर रहे हैं। इस स्थिति में खुद को कुछ पलों के लिए रखें।

6. अब धीरे धीरे दीवार का सहारा छोड़ें और अपने हाथों के सहारे पूरे शरीर का भार कंट्रोल करने का प्रयास करें।

7. अगर आप पहली बार में इसे नहीं कर पा रहे हैं तो निराश ना हों। आपको इससे कोई असुविधा नहीं होगी।

आप धीरे धीरे अपने बैलेंस को बनाने का प्रयास करें। निराशा किसी भी समस्या का हल नहीं है।

8. अगर आप इस बैलेंस को करने में सफल रहे हैं तो खुद को उस स्थिति में सिर्फ दस सेकेंड ही रखें। आप खुद को किसी परेशानी में ना लाएं और ना ही वापस नार्मल स्थिति में आने में जल्दबाजी करें। इससे नुकसान हो सकता है।


अधोमुखवृक्षासन के बाद कौन सा आसन करना चाहिए

इस आसन के बाद आप धनुरासन कर सकते हैं। इससे आपको आराम मिलता है और इस आसन के दौरान या उससे पहले अगर शरीर में कोई पीड़ा होती है तो उसे ठीक करने में धनुरासन काफी लाभकारी है। इस आसन को जल्दबाजी में ना करें और ऐसा किसी भी आसन के साथ ना करें। एक जल्दबाजी आपको नुकसान दे सकती है।


अधोमुखवृक्षासन से होने वाले लाभ

पाचन तंत्र से जुड़ी कोई भी समस्या हो तो वो इस आसन से ठीक हो सकती है। इस आसन को करने में अगर परेशानी पेश आ रही हो तो आप अनुलोम विलोम को कर सकते हैं। वो भी पेट के लिए बेहद लाभकारी है। इसके साथ साथ ये शरीर एवं रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है। अगर आप किसी प्रकार के मानसिक रोग, खासकर तनाव से दो चार हो रहे हैं तो ये आसन आपको काफी लाभ देगा।


अधोमुखवृक्षासन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान


खाली पेट ही इस आसन का अभ्यास करें। इस आसन में चूँकि आपके शरीर का पूरा भार आपके हाथों पर आ जाता है तो आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आपके हाथ कमजोर ना हों या आपको कैल्शियम की कमजोरी से जुड़ी कोई समस्या ना हुई हो। इस आसन के दौरान अगर आप पहली बार इसे पहली बार करने वाले हैं तो कृप्या किसी को अपने आसपास रखें ताकि असुविधा होने पर वो आपको बचा सकें। इसके साथ साथ ना तो आसन की मुद्रा में जाने में या उससे बाहर आने के दौरान जल्दबाजी का प्रदर्शन करें क्योंकि इससे आपकी गर्दन को नुकसान हो सकता है।



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