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जानिए क्या है, छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की जल्द पहचान के लिए एनसीईआरटी द्वारा जारी दिशा-निर्देश!

Know what are the guidelines issued by NCERT for early detection of mental health problems in students!
जानिए क्या है, छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की जल्द पहचान के लिए एनसीईआरटी द्वारा जारी दिशा-निर्देश!
वैशाली शर्मा

बच्चों में बढ़ता ख़राब मानसिक स्वास्थ को जल्द से जल्द पहचानना भी मानसिक स्वास्थ के सुधार के लिए एक एहम कदम है, और आपको बता दूँ, मानसिक स्वास्थ को मद्दे नज़र, अगर बच्चों में सबसे पहले कोई तकलीफ़ घर करती है, तो वो है, अवसाद और यही अवसाद उन्हें सबसे ज्यादा परेशान रखता है.

क्या होता है किशोर अवसाद?

मान लीजिए कि आप अभी एक किशोर हैं, अपने परिवार के सभी सदस्यों और अपने प्यारे कुत्ते के साथ अपना जीवन पूरी तरह से जी रहे हैं। जो आपको सुबह-सुबह जगाता है और रोज़ रात को एक गुड नाईट हग देता है। आप अपने कुत्ते से सबसे ज्यादा प्यार करते हैं। लेकिन क्या होगा अगर एक दिन अचानक आपका कुत्ता मर गया तो? आप क्या महसूस करेंगे? ये एक किशोर के लिए बहुत ही निराशाजनक भावना है, क्योंकि किशोर इन क्षणों से आसानी से उदास हो सकते हैं, वे अपने स्वभाव से बहुत संवेदनशील होते हैं, वे चोटिल हो जाते हैं, क्रोधित हो जाते हैं, और बहुत आसानी से भावुक हो जाते हैं इसलिए अवसाद बहुत गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है. उदासी की भावना, रुचि की हानि, भावनाओं की कमी। हालांकि अवसाद जीवन में किसी भी समय हो सकता है, किशोरों और वयस्कों के बीच लक्षण भिन्न हो सकते हैं।

एनसीईआरटी का दिशा निर्देश जानिए यहाँ!

बच्चे अपना ज्यादातर समय स्कूल में अपने सहयोगी छात्र और अपने टीचर और प्रिंसिपल के साथ बिताते है इसलिए ज़रूरी है, की हम ये समझे की हमारे बच्चों की जरूरतें हमसे अलग होती है उनका मानसिक विकास लगातार हो रहा होता है, हारमोंस सक्रिय रहते है.

एनसीईआरटी के मैनुअल के अनुसार, प्रत्येक स्कूल या स्कूलों के समूह को एक मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार पैनल स्थापित करना चाहिए। ये बच्चों समेत सभी के लिए लाभकारी साबित होगी.

“इसकी अध्यक्षता प्राचार्य द्वारा की जानी चाहिए और इसमें शिक्षक, माता-पिता, छात्र और पूर्व छात्र सदस्य के रूप में होने चाहिए। यह जागरूकता पैदा करेगा, और एक आयु और लिंग-उपयुक्त वार्षिक स्कूल मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की योजना और कार्यान्वयन भी करेगा। स्कूलों में व्यवहार, पदार्थं के सेवन और आत्म-नुकसान, अवसाद और विकास संबंधी चिंताओं की पहचान करने, प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने और उचित रेफरल करने का प्रावधान होना चाहिए.

एनसीईआरटी ने सिफारिश की है कि, इसके अलावा परिवारों और माता-पिता, शिक्षकों को बच्चे के मानसिक स्वास्थ की जिम्मेदारी लेनी होगी, क्योंकि वे भी प्राथमिक देखभालकर्ता हैं।

एनसीईआरटी के मैनुअल के अनुसार शिक्षकों को कक्षा में बदमाशी के मामलों के बारे में बात करनी चाहिए और छात्रों को बदमाशी के बारे में शिक्षित करके उन्हें सशक्त बनाना चाहिए। उन्हें छात्रों को किसी भी घटना की रिपोर्ट करने के लिए एक गोपनीय तरीका सोचना होगा जो उनके लिए चिंता का विषय है.

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।


Edited by वैशाली शर्मा

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