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नीलगिरी का औषधीय उपयोग - Nilgiri ka Aushadhi upyog

जानिए  क्या  है नीलगिरी का औषधीय उपयोग
जानिए क्या है नीलगिरी का औषधीय उपयोग
Ritu Raj
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नीलगिरी का पेड़ काफी लंबा और पतला होता है। इसकी पत्तियों से प्राप्त होने वाले तेल का उपयोग औषधि और अन्य रूप से किया जाता है। नीलगिरी की पत्तियां लंबी और नुकीली होती हैं जिनकी सतह पर गांठों में तेल संचित रहता है। नीलगिरी को ही यूकेलिप्टस कहते हैं। परफ्यूम इंडस्ट्री में नीलगिरी का तेल खूब इस्तेमाल होता है। शरीर की मालिश के लिए नीलगिरी का तेल उपयोग में लाया जाए तो गंभीर सूजन और बदन में होने वाले दर्द से छुटकारा मिलता है। नीलगिरी का तेल जुकाम, पुरानी खांसी से पीड़ित रोगी के लिए फायदेमंद होता है। इसे छिड़ककर सूंघने से लाभ मिलता है। नीलगिरी तेल को बड़े पैमाने के तौर पर औषधीय के रूप में उपयोग किया जाता है।

नीलगिरी का औषधीय उपयोग - Nilgiri ka Aushadhi upyog in Hindi

साइनस, कोल्ड और फ्लू के लिए (Eucalyptus is beneficial for sinus, cold and flu)

साइनस, कोल्ड और फ्लू की समस्या में नीलगिरी का तेल काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। एक रिपोर्ट की मानें तो नीलगिरी के तेल में एंटीवायरल क्षमता होती है। इसके साथ ही इसके तेल में डीक्जेस्टेंट (सर्दी-खांसी की दवा) प्रभाव होता है। इससे नाक के श्वसन मार्ग और फेफड़े में जमे बलगम को साफ करके साइनस से निपटा जा सकता है। इसके लिए नीलगिरी के तेल की अरोमाथेरेपी या भाप ले सकते हैं।

गले में खराश (Treat sore throat with eucalyptus)

गले में खराश होने पर नीलगिरी तेल लाभदायक हो सकता है। एक रिसर्च के मुताबिक, इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक प्रभाव होते हैं। नीलगिरी के तेल में पाए जाने वाले ये प्रभाव खांसी और गले में होने वाली खराश को दूर कर सकते हैं। इसके लिए पानी में तेल की कुछ बूंदें डालकर भाप लें।

दर्द और सूजन (Eucalyptus oil is beneficial for pain and inflammation)

दर्द और सूजन की समस्या में भी नीलगिरी तेल लाभ पहुंचा सकता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक (दर्द-निवारक) प्रभाव होते हैं। इसके साथ ही तेल में पाए जाने वाले ये गुण दर्द को कम करने के साथ ही सूजन में भी सुधार लाते हैं।

फेफड़ों के रोगों के लिए लाभकारी है नीलगिरी (Eucalyptus is beneficial for lung diseases)

फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए नीलगिरी के तेल का लाभ उठा सकते हैं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-इंफेक्टिव प्रभाव होते हैं। ये फेफड़े की सूजन और इंफेक्शन को कम कर सकते हैं। इसके अलावा, यह तेल फेफड़ों में रोग व संक्रमण उत्पन्न करने वाले जीवाणुओं को पनपने से रोक सकते हैं।

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।


Edited by Ritu Raj
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