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Surya Namaskar (सूर्य नमस्कार)

आसन के बारे में

इस एक आसन को कई आसनों का समन्वय कहा जा सकता है। ये आसन उन लोगों के लिए ठीक है जिनके पास समय का अभाव रहता है लेकिन जो एक ही साथ कई आसनों का प्रभाव प्राप्त करना चाहते हैं। मैनेजमेंट की भाषा में इसे योगों का मैनेजमेंट या मल्टी टास्किंग योग कहा जा सकता है। इस एक योगासन में बारह मुद्राएं होती हैं जिन्हें अलग अलग आसन के नाम से जाना जाता है। इन सभी आसनों को एक साथ करने से आप खुद की सेहत को ठीक रखने के साथ साथ शरीर के कई अंगों को भी व्यायाम के क्रम में ला रहे होते हैं।


आसन को करने के लिए आवश्यक चीजें

अगर आप इस या किसी भी योगासन को खाली पेट करते हैं तो उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। आपने इस बात को कई बार सुना होगा कि खाली पेट फल खाना सबसे लाभकारी होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय आपके शरीर में पाचन तंत्र कोई अन्य कार्य नहीं कर रहा होता है और वो जरूरी कार्यों को पूरा कर चुका होता है।

उसी प्रकार से खाली पेट योगासन करने से आप सेहत को एक साथ कई लाभ पहुँचा रहे होते हैं। एक योग मैट, पानी की बोतल या तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पिएं। इस दौरान प्रयास करें कि ठंडा पानी ना पिएं और फ्रिज या फ्रीजर की बर्फ वाला पानी तो बिल्कुल ना पिएं।


सूर्य नमस्कार से पहले किए जाने वाले आसन

सूर्य नमस्कार में स्वयं ही बारह आसन होते हैं। इसलिए इससे पहले किसी भी आसन को करने की सलाह नहीं दी जाती है। आप चाहें तो शवासन कर सकते हैं। उस आसन से कोई हानि लाभ नहीं होता है तो वो एक प्रकार का आसन है जिसे आप कर सकते हैं लेकिन उसके अलावा किसी भी अन्य आसन को करने की जरूरत नहीं है।

सूर्य नमस्कार में हम प्रणाम आसन, हस्तउत्तानासन, हस्तपाद आसन, अश्व संचालन आसन, दंडासन, अष्टांग नमस्कार, भुजंग आसन, पर्वत आसन,अश्वसंचालन आसन, हस्तपाद आसन, हस्तउत्थान आसन, और ताड़ासन को करने वाले हैं| आइए आसन आरंभ करते हैं।


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सूर्य नमस्कार को प्रक्रिया वर कैसे किया जाना चाहिए


1. प्रणाम आसन - इस आसन को करने के लिए अपनी योग मैट के किनारे पर खड़े हो जाएं। इस दौरान आपके

दोनों पैर एवं पंजे जुड़े हुए होने चाहिए। अब साँस को अंदर खींचें और अपनी छाती को फुलाएं। कंधों को ढ़ीला

रखें और उन्हें सर के ऊपर ले जाकर नमस्कार वाली मुद्रा में आ जाएं। आप हाथों को नमस्कार वाली मुद्रा में

छाती के सामने ले आएं और आपने इस आसन को पूर्ण कर लिया है।

2. हस्तउत्तानासन - आप अपने हाथों को सर के ऊपर से ले जाते हुए पीछे ले जाएं और इस दौरान कंधों को कान के पास में रखें। ये चेक करने के लिए कि आप सिर्फ यूँ ही नहीं बढ़ रहे हैं, अपने हिप्स या कूल्हों को अंदर की तरफ पुश करें और फिर इस आसन को करें। इससे आप स्पष्ट रूप से इस आसन को कर सकेंगे।

3. हस्तपाद आसन - इस आसन के लिए साँस को छोड़ते हुए और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए कमर से आगे के हिस्से को झुकाएं। अब पूरी तरह से साँस छोड़ते हुए दोनों हाथों को पंजों के पास जमीन पर रखें। इस अवस्था में पंद्रह सेकेंड से ज्यादा ना रहें वरना परेशानी हो सकती है खासकर तब जब आप पहली बार इसे कर रहे हों।

4. अश्व संचालन आसन - भुजंगासन वाली अवस्था में आ जाएं और दाहिने पैर को जितना पीछे ले जा सकते हैं ले

जाएं। अपने चेहरे को ऊपर की तरफ उठाएं लेकिन अगर आपको कमर या रीढ़ की हड्डी से जुड़ी हुई कोई दिक्कत है तो इस आसन को आराम से करें, खासकर चेहरे को ऊपर उठाने वाले क्रम को वरना दिक्कत हो सकती है। इस दौरान साँस को नॉर्मल क्रम में लेते रहें।

5. दंडासन - इस आसन को करने के लिए अब आप अपने बाएं पैर को पीछे ले जाएं और शरीर को जितना संभव

हो सीधे क्रम में रखें। शरीर का पॉस्चर ये निर्धारित करता है कि आप कैसा करेंगे और उसका प्रभाव शरीर पर

कैसा होगा। एक गलत पॉस्चर के साथ आप आसन से मिलने वाले अच्छे प्रभाव को खत्म कर देंगे।

6. अष्टांग नमस्कार - इस आसन के नाम से ही स्पष्ट है कि आपको अपने आठ अंगों के माध्यम से नमस्कार करना है। जी हाँ, एक शरीर, एक आसन लेकिन आठ नमस्कार और ये सब तब ही करें या संभव है जब आपकी रीढ़ की हड्डी अच्छा महसूस कर रही हो। अगर उसमें दिक्कत हो तो इस आसन को बिल्कुल ना करें और सिर्फ भुजंगासन करें। इस आसन के लिए अपने घुटनों को जमीन पर लाएं। इसके बाद हिप्स को ऊपर उठाएं। अपने शरीर को आगे की तरफ ले जाएं और छाती एवं ठुड्डी से जमीन को छुएं। इस अवस्था में आपके दो हाथ, दो पैर, घुटने और छाती एवं हड्डी मिलाकर आठ अंग एक साथ नमस्कार वाली मुद्रा में होंगे। इसे मात्र पंद्रह सेकेंड ही करें।

7. भुजंग आसन - अगर आपकी रीढ़ की हड्डी या आपको बैक में पेन है तो आपको ये आसन करना चाहिए। इस

आसन को बैक पेन के खिलाफ कारगर माना जाता है। इसके लिए आप पेट के बल लेट जाएं और हथेलियों को

कंधे के साथ में ले आएं। अब शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाएं। इसे आप दस से बीस सेकेंड कर सकते हैं। ये अलग से भी किया जा सकता है अगर आपको अपने बैक पेन को ठीक करना है। साँस को नॉर्मल प्रक्रिया से ही

लेते रहें।

8. पर्वत आसन - इस आसन को करते समय साँस को छोड़ें और अपने कूल्हे को जमीन से ऊपर और रीढ़ की हड्डी को जमीन की तरफ झुकाते हुए एक उलटे वी का आकार बनाएं। इसको और प्रभावी बनाने के लिए पंजों को

उनकी जगह पर रखें लेकिन कूल्हों को ऊपर खीचें। इससे आपको अपने कूल्हों और पंजों के बीच एक खिंचाव

महसूस होगा।

9. अश्वसंचालन आसन - साँस लेते हुए दाहिने पैर को दोनों हाथों के बीच एवं छाती के करीब ले आएं। आप इसके लिए भुजंगासन में आ सकते हैं। इससे आपको आराम होगा लेकिन अगर आप प्रेशर को अच्छे से महसूस करना चाहते हैं तो दाहिनी पिंडली को जमीन के पैरेलेल रखें। इसके बाद कूल्हों को नीचे ले जाएं। आपको शरीर में एक खिंचाव का एहसास होगा जो एक अच्छी बात है।

10 एवं 11 - इस आसन के दसवें और ग्यारहवें आसन में आपको पहले तीसरे नंबर वाला आसन और फिर दूसरे नंबर वाला आसन करना है। ये अब वापस पहली प्रक्रिया या स्वरुप में जाने का प्रयास हो रहा है इसलिए इन आसनों को दोबारा से करना होता है। इस बात का ध्यान रखें कि अगर आप एक ही आसन से सभी प्रकार के लाभ चाहते हैं तो ये आसन जरूर करें।

12. ताड़ासन - इस आसन को करने के लिए आप हस्तउत्थान आसन से खुद को एक नार्मल अवस्था में ले आएं। इस समय शरीर में हो रही हलचलों को महसूस करें। इस समय आपको अपने शरीर के हर अंग, नस और इंद्री में एक शक्ति का एहसास हो रहा होगा। अपना ध्यान अवश्य रखें और किसी भी समय अगर आपको कष्ट हो तो आसन रोक दें।


सूर्य नमस्कार के बाद क्या करें

आप सूर्य नमस्कार के बाद योग निद्रा जरूर करें। इससे शरीर में आए एक कंपन या बदलाव को आप स्पष्ट रूप से महसूस कर सकेंगे। किसी भी आसन के बाद आराम जरूर करें और इसके साथ साथ शवासन जरूर करें। शवासन आपके शरीर के लिए बेहद लाभकारी है। इसका इस्तेमाल अपने शरीर को रिलैक्स करने के लिए करें।


सूर्य नमस्कार से लाभ

सूर्य नमस्कार से आपको अपने शरीर में एक ऊर्जा का संचार होते हुए महसूस होगा। खून का बहाव तेज होता है और आपको हर आसन के लाभ इस एक आसन में ही प्राप्त हो जाते हैं। इसे एक पूर्ण व्यायाम माना जाता है। इसलिए अपनी सेहत को ठीक रखने के लिए सूर्य नमस्कार जरूर करें। इस आसन के लिए आप ऊपर बताए गए तरीके को इस्तेमाल करें और इस आसन के कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं।

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